अपराजिता
Sunday, May 31, 2026
मुक्तक
जब देखती तो साफ दिखती हैं।
मुस्कुराती - बेबाक दिखती हैं।
आप आई नहीं महफिल में पर-
हर तस्वीर में आप दिखती हैं।
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सुजाता प्रिय 'समृद्घि'
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