चिड़िया रानी
मीठे-मीठे गीत सुनाती,
नन्हीं चिडिया जब घर आती।
सुबह-सबेरे रोज आकार,
मेरी मुनिया को बहलाती।
आती जब वह फुदक-फुदक,
मुनिया ताली खूब बजाती।
जब भी वह रोने लगती तब,
गाना गाकर चुप कर जाती।
नन्ही,प्यारी चोंच खोलकर,
छोटे दाने को चुग जाती।
जब मुन्ने का मन भर जाता,
उड़ जाती है पंख फैलाती।
सोती सूरज के सोने पर,
पर उससे पहले जग जाती।
स्नेह-प्यार से चीं-चीं गाकर,
हर प्राणि को रोज जगाती।
सुजाता प्रिय 'समृद्घि'
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