Friday, July 31, 2026

सावन का महीना (लघुकथा)

सावन का महीना(लघुकथा)

     पढ़ाई करने के बाद राखी चहलकदमी करती हुई बाहर आई ।उसने देखा-सब्जी वाली बार-बार दादी से साग और बैंगन लेने के लिए मनुहार कर रही है।और दादी बार-बार उसे मना करते हुए बोल रही हैं- "सावन में साग बैंगन नहीं खाना चाहिए।"
     दादी द्वारा ली गई लौकी-झिंगी देखकर वह सोंच रही थी -यह दादी की कौन-सी मान्यता है कि सावन में साग बैंगन नहीं खाना चाहिए।कल दही वाले को भी कह रही थी सावन में दही नहीं खाना है।पिताजी को मछली लाने से मना करते हुए बोलीं सावन में मांसाहार नहीं करना चहिए। सावन माह में इन वस्तुओं के सेवन पर पावंदी क्यों?   आजकल दादी पूजा - पाठ भी विशेष रूप से करने लगीं हैं।भांग -धतुरे, वेलपत्र- आंक दूध -घृत, जाने क्या-क्या भोले बाबा पर चढ़ाती हैं।हर सोमवार को उपवास रखना।सुबह शाम भजन-आरती।फिर रक्षा बंधन का त्योहार की तैयारी भी जोरों से चल रही है।राखी ,डाक आवागमन मिठाई उपहार इत्यादि में नाहक कितने पैसे खर्च हो जाते हैं लोगों के। उफ़ s s s s  बेकार की फिजुलखर्ची।
      उसे इस प्रकार उधेड़-बुन में पड़े देख आखिर दादाजी ने पूछ ही लिया- "मेरी राखी बिटिया कुछ परेशान लग रही है?"
  राखी ने उपरोक्त सभी बातों को दादाजी के समक्ष रखते हुए कहा- "इन्हीं कारणों से तो लोग सनातन धर्म को ढकोसला कहते हैं।"
    दादाजी उसे अपने पास बैठाकर प्यार से समझाते हुए बोले-"सावन मास बड़ा ही पावन मास है।इस महीने में व्रत- त्योहार का केवल धार्मिक महत्व ही नहीं अपितु वैज्ञानिक महत्व भी है।शिवलिंग पर दूध और जल के अभिषेक करने से वातावरण को शीतलता प्राप्त होती है।भांग-धतुरे, आक - विल्वपत्र इत्यादि कीटाणु रोधक होते हैं।इन्हें चढा़ने से आस- पास पनपने वाले कीटाणुओं का नाश होता है।पूजा करने से लोगों का अंतःकरण भी शुद्ध होता है।
इस माह में साग- बैंगन और दही में कीटाणु जल्द पनपते हैं।जिन जीवों का मांस हम खाते हैं ,वे बरसात के कीटाणु जनित घास-पात खाकर पहले से ही रोग-ग्रस्त होते हैं  उनका मांस खाने से हमें भी संक्रमण का खतरा रहता है।इसलिए, इस महीने में लोगों को इन खाद्य पदार्थों का निषेध करना चाहिए।
      इस माह के रक्षा बंधन पर्व की महिमा भी अलग है।यह पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम और रिस्ते को द्योतक है। रक्षा बंधन के दिन ही तुम्हारा जन्म हुआ इसलिए हमने तुम्हारा नाम राखी रखा ।इस दिन भाई -बहन दूर-दूर से भी एक-दूसरे से मिलने और राखी बांधने-बंधवाने आते हैं।यदि बहन नहीं आ पाती हैं तो डाक 'द्वारा भी राखी भेजती हैं।
कितने प्यारे होते हैं वे पल ।पैसे खर्च होने की किसे परवाह ?मिठाई और उपहार तो मन का प्यार है। रिस्ते निभाने का महत्व सबसे ज्यादा होता है।"
राखी दादाजी की बाते सुनकर बहुत खुश हुई। दादाजी भी सावन के महीने के महत्व को समझा कर काफी खुश हुए।
           सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Thursday, July 30, 2026

शिव जी हैं देव खास

शिव हैं देव खास (घनाक्षरी )

आया है सावन मास
   शिव जी हैं देव खास 
      रख  मन में उल्लास 
         पूजा   पाठ    करिए।

देवों के  हैं  देव खास
   पूरी  करते   हैं  आस
      जाकर शम्भू के पास 
         कामना  तो   करिए। 

नहीं  करें  जी उदास 
   हृदय  रख   विश्वास 
      कर  ध्यान-उपवास 
        जप-तप     करिए। 

आस लिए जाए पास 
   दैत्य-मनुज -  पिशाच 
      हरते  सभी  के  त्रास
         नमन    भी    करिए।

            सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Wednesday, July 29, 2026

गुरु वंदना

गुरु वंदना

प्रातः उठकर कीजिए,गुरुवर को प्रणाम।
गुरु के चरणों में सदा,बसता गुण का धाम।।

पाकर गुरु-आशीष हम,पाते मन को चैन।
उनके ज्ञान उजास से,खुलता सबका नैन।।

गुरु ही देते हैं सदा,विद्या-बुद्धि व ज्ञान। 
उनसे ही हम सीखते,साहित्य व विज्ञान ।।

हम माटी की लोय हैं,गुरूजी हैं कुम्हार। 
गढ़ते हमको चाक पर, देते हैं आकार। ।

गुरु-ज्ञान ही आज है,जीवन का आधार।
ज्ञान की नाव चढ़ लगे,सबका जीवन पार।।

गुरुजी को ही याद कर,करें प्रारंभ काज।
सफल सदा ही आप हों,सुख से रहे समाज।।

नमन करें कर जोड़ कर,रख मन में सम्मान।
आरंभ करें काम तो,करिए गुरु का ध्यान।।
           सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

गुरु वंदना

गुरु वंदना

प्रातः उठकर कीजिए,गुरुवर को प्रणाम।
गुरु के चरणों में सदा,बसता गुण का धाम।।

पाकर गुरु-आशीष हम,पाते मन को चैन।
उनके ज्ञान उजास से,खुलता सबका नैन।।

गुरु ही देते हैं सदा,विद्या-बुद्धि व ज्ञान। 
उनसे ही हम सीखते,साहित्य व विज्ञान ।।

हम माटी की लोय हैं,गुरूजी हैं कुम्हार। 
गढ़ते हमको चाक पर, देते हैं आकार। ।

गुरु-ज्ञान ही आज है,जीवन का आधार।
ज्ञान की नाव चढ़ लगे,सबका जीवन पार।।

गुरुजी को ही याद कर,करें प्रारंभ काज।
सफल सदा ही आप हों,सुख से रहे समाज।।

नमन करें कर जोड़ कर,रख मन में सम्मान।
आरंभ करें काम तो,करिए गुरु का ध्यान।।
           सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Tuesday, July 28, 2026

सुनो जी साँवरिया

सुनो जी साँवरिया 
 
गर्मी के मारे मैं परेशान होकर,
सज-धज होठ लिपस्टिक पोतकर,
जब घूमने आयी बजरिया।
सुनो जी..................
सज-धज कर जब घूमने आई।
थैला और बटुआ हाथ  में लाई।
लेकिन लेने को भूली छतरिया।
सुनो जी..................
झम-झम,झमाझम पानी बरसे।
गड़-गड़,गड़-गड़ बादल गरजे।
मुझे सूझे न कोई डगरिया।
सुनो जी............
चुनरी भी भींगी,चोली भी भींगी।
केश के लट संग चोटी भी भींगी।
और संग में भींगी अचरिया।
सुनो जी................
चेहरा के सारा श्रृंगार को धोया।
होठ के सारी लाली भी धोया।
अंखिया के धोया कजरिया।
सुनो जी.................
    सुजाता प्रिय समृद्धि

Friday, July 24, 2026

आयी सुंदर भोर

,       आयी सुन्दर भोर 

           उठ  भाई अब 
           आलस्य त्याग 
           मिटा   मन  के
           सारे   अवसाद 
      आयी देखो सुंदर भोर
   सूर्य-किरण फैली चहुँ ओर 
  सभी जीव का मन विहसता
 खुशियों से तन - मन हुलसता
  उड़ी चिरैया भर मन उल्लास
    चहक कर करती परिहास
       खुश करती मन उदास

Sunday, July 19, 2026

मेरे शिवजी का रूप है निराला

मेरे शिवजी का रूप है निराला

मेरे शिवजी का रूप है निराला।
फिर भी भोला हैं जग रखवाला।

सब देव के सिर में सोने का मुकुट,
मेरे  शिव जी  का जटा  चंदावाला
फिर भी भोला हैं.................

सब देव के गले में सोना के हार,
मेरे शिवजी को है साँप के माला।
फिर भी भोला हैं...................

सब देवन के अंग में साल -दुशाला,
मेरे शिवजी को है बाघ की छाला।
फिर भी भोला हैं....................

सब देव खाते हैं फल-मेवा, मिठाई,
मेरे शिव खाते हैं भांग का गोला।

सब देव पीते अमृत और सोमरस,
मेरे शिव पीते हैं विष का प्याला।
फिर भी भोला हैं.....................

सब देव बजाते मृदंग-शंख-वीणा,
मेरे शिव-शंकरजी हैं डमरू वाला।
फिर भी भोला हैं.....................
       
सब देवों की हाथी-घोड़ा सवारी,
मेरे शिव-शंकर तो है बैल वाला।
फिर भी भोला हैं.....................

सब देव को है महल कोठा-अटारी,
मेरे शिवजी को मैड़ैया न ताला।
फिर भी भोला हैं.....................

सब देव करते हैं स्वर्ग में विचरण,
मेरे शिवजी घुमते जग में मतवाला।
फिर भी भोला हैं......................
           सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Saturday, July 4, 2026

आपका आसरा (प्रज्ञा छंद )

आपका आसरा (प्रज्ञा छंद)

आपका आसरा,मातु मन में बसा।
आपके पास आ,आज मन है हंसा।

माँ कभी आपसे,लोग जो माँगते।
आप देती उसे,लोग जो चाहते।
दूर करती सदा,लोग की दुर्दशा।
आपके पास आ..........
आपके प्यार में, भक्त पागल सभी।
आपकी आस है,आज कायल सभी।
कष्ट हरणी अभी, फेर मेरी दसा।
आपके पास आ.........
आपसे माँगती, आज मन की खुशी।
आस पूरी करो,जो हृदय में बसी।
पाँच मेरा अभी कीच  में है फंसा।
आपके पास आ........
माँ तुझे है पता, माँगते जो सभी।
कामना पूर्ण कर,चाहता मन अभी।
आपके प्यार का मातु है लालसा।
         सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Wednesday, July 1, 2026

धरती के भगवान (लघुकथा )

चिकित्सक 

विद्या का मन बहुत घबरा रहा था। बेटा को कोरोना मरीजों के वार्ड में ड्यूटी .....।मन की झुंझलाहट लंच बॉक्स पर ...
.। हरीश के लिए लंच बॉक्स में भूना हुआ बादाम भरती हुई वह सोच रही थी  इससे तो अच्छा था वह घर बैठ कर बैंक बगैरह की नौकरी की तैयारी ......। बस इसके पिता जी को ही ज़िद थी कि एक ही बेटा है डॉक्टर.....।अब देख लिया ना!इतनी बड़ी आपदा पड़ी है।सभी लोग घर में सुरक्षित बैठे हैं और मेरे जिगर के टुकड़े को कोरोना बैरियर बना ...।" स्टुडेंट-लाइफ में ही इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी। क्या और चिकित्सक नहीं है?मेरे फूल से बच्चे को ही बीमारों की इलाज में .....।
         "माँ जल्दी दो ना मेरा लंच- बॉक्स ।" हरीश ने तैयार होकर 
..........। 
"हाँ ठीक है ।"
माँ! तुम्हारे हाथ का बना हुआ मजेदार खाना खाए बगैर मुझे .....।"ऊपर से यह बचपन बाला लंचबॉक्स।
मांँ के हाथ से लंचबॉक्स लेकर. मांँ- पिताजी के चरण-स्पर्श किए और हॉस्पीटल के लिए ........
 माँ जानती थी यह सब बातें वह उसे बहलाने के लिए ........
 उसका जी चाहा उसे पकड़ कर ......लेकिन तब तक वह ......
         उसके मनोभावों को पढ़ते हुए शिखर जी ने कहा-"क्यों मन छोटा करती हो विद्या !उसे कुछ नहीं होगा।उसे अस्पताल जाने से हम रोक भी नहीं सकते।
       चिकित्सक धरती के भगवान होते हैं। बीमारों की इलाज कर उनकी जान बचाना चिकित्सक का  पहला कर्तव्य है। उन्हें अपनी जान की परवाह नहीं ........."।  हमारा आशीर्वाद है कि वह अपने कर्म-पथ पर हजारों बरस बना रहे।
"हाँ! वना रहे।" मांँ ने भी अपने चिंतायुक्त हृदय को तसल्ली देते हुए.........।
             सुजाता प्रिय 'समृद्धि'