तमन्ना
तमन्ना है यही मेरी, कि तुम अब पास आ जाओ।
बड़ी तड़पा रहे मुझको,अभी मत और तड़पाओ।।
मुझे जो छोड़कर भागे, बताया भी नहीं मुझको।
तुझे भी रास कब आया,जताया तो नहीं मुझको।।
जिगर बेचैन है मेरा, परेशानी तुझे घेरी।
अगर मुझको न तड़पाते, सुधी लेते जरा मेरी।।
अभी इतनी गुजारिश है,चले आओ निकट मेरे।
तमन्ना आज पूरी हो, मिटे संताप सब तेरे।।
सुजाता प्रिय 'समृद्घि'
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