Thursday, September 3, 2026

जन्मदिन का उपहार

जय माँ शारदे🙏🙏जन्मदिन का उपहार गुलाबी फ्राक में सजी संवरी शिखा परियों की शहजादी लग रही थी।पूरा हॉल चमकिले झालरों और रंगीन बल्बों से जगमग कर रहा था।पूरा हॉल मेहमानों से भरा पड़ा था।छोटी-छोटी कुर्सियों पर उसके दोस्त बैठे हैं। बधाई हो बधाई की धुन पर कुछ पैर थिरक रहे थे।शिखा की निगाह बार-बार मुख्य द्वार की ओर उठती और निराश हो इधर-उधर भटक...... टेबल पर केक रखाते ही दादी ने कहा -"जल्दी से केक काटो शिखा सभी मेहमान आ गए! "सभी कहाँ आये दादी माँ! अभी मेरी सहेली सुरुचि.........."मै आ गई! तभी साधारण फ्राक पहनी एक छोटी लड़की ने हॉल में आते हुए कहा।और अपने लाये थैले से एक मिट्टी का गुल्लक निकालकर उसकी ओर बढाते हुए कहा- हैपी बर्थ डे शिखा।"शिखा का चेहरा चमक उठा।"यह तो तुमने बहुत बढिया गिफ्ट दिया। इसमें मैं आज मिले सारे पेसे रखूंगी। ""और इसमें सारे गिफ्ट ""अच्छा यह भी मेरा है।?"हाँ मेरी माँ ने खास तुम्हारे लिए बनाया है।"शिखा ने हंसते हुए कहा-"आज सबसे बढिया गिफ्ट तुम्हारा ही है।क्योंकि तुमने और आंटी ने इन्हें अपने हाथों से बनाया है।"फिर शिखा ने केक काटे और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा हॉल ....... सुजाता प्रिय समृद्धि

एक 
         बड़ा ही
      वजनी पत्थर,
 रखा है सीने के ऊपर
पूछो न मुझसे ऐ दोस्तों
    कसकें दबीं हुईं हैं 
       कितनी  सारी
          इस सिला 
              तले
          सुजाता प्रिय

कसकें

कसकें 
           एक 
         बड़ा ही
      वजनी पत्थर,
 रखा है सीने के ऊपर
पूछो न मुझसे ऐ दोस्तों
    कसकें दबीं हुईं हैं 
       कितनी  सारी
          इस सिला 
              तले
          सुजाता प्रिय

Wednesday, September 2, 2026

उफ्फ

   उफ्फ 

           एक 
         बड़ा ही
      वजनी पत्थर,
 रखा है सीने के ऊपर
पूछो न मुझसे ऐ दोस्तों
    कसकें दबीं हुईं हैं 
       कितनी  सारी
          इस सिला 
              तले
         सुजाता प्रिय

Saturday, August 29, 2026

बढे चलो ( प्रेरण गीत )

बढे चलो (प्रेरणा गीत)

बढे चढे,बढे चलो रुके नही कभी कदम।
सतत मन धैर्य  ले,हौसला नही हो कम।

चले  जिस मुकाम पे,सफल उसे करो सदा।
गिरे तो उठकर दिखा,पुरुषार्थ  रहे  सर्वदा।
रुको नही,झुको नहीं उठो-उठो बढा कदम।
सतत मन धैर्य ले.........

उद्देश्य मान में जीत की,लक्ष्य तक बढे चलो।
नव-राह भी गढे चलो,चढ़ाव पर चढ़े चलो।
बढा कदम,बढा कदम,चले चलो कदम-कदम 
सतत मन धैर्य ले.............

सफलता ही लक्ष्य है,हार कभी न मानना।
जन-गण-धन हित,रार सदा ही ठानना।
विजय करो,विजय करो,उठो वीर ठोक खम।
सतत मन धैर्य ले.................
            सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

सत्कर्मों का फल

>          थोड़ा 
         सब्र  रखो
     सुसमय आने पर
तुम्हारे सत्कर्मों का फल
   तुम्हें  जरूर  मिलेगा
    यश-गुण की प्राप्ति 
        बहुत   प्रतीक्षा
           परीक्षा और 
             परिश्रम 
              के बाद 
                होती 
                  है

Thursday, August 27, 2026

भरोसा

>                             तू
                             कभी
                           संसार से 
                      उम्मीद मत करो
                बस संसार रचने वाले पर 
            भरोसा रख सुकर्म करते जाओ
     कर्मों के अनुसार फल देना उनका काम है
हर मुश्किल का हल करना भी उन्हीं के हाथ में है
                            प्रत्येक 
                           कर्म का
                          हिसाब व                                                                  लेखा-जोखा
                    भी वही  रखते  हैं