Saturday, September 12, 2026

भलाई का पैग़ाम

पैगाम 

प्रशंसा करने से किसी की,
            रहते हो पीछे क्यो भला।
निन्दा सभी की कर तू अपना,
               दिल भी लेते हो जला।
गंभीरता से आत्म चिन्तन,  
             कर कभी तुम  देख लो।
द्वेष का पर्दा हटाकर
             नजरे हृदय में फेंक लो।
बुराई करने से किसी का,
               मन भी हो जाता बुरा।
परमात्मा का अंश हैं सब,
             मत किसी को तुम दुरा।
जो सुपथ से डगमगाये,
                हाथ उसका थाम लो।
रास्ता सच का दिखा दो,
                भलाई का पैगाम दो।
भटके जनों को राह देना,
                            का नाम है।
अज्ञानियों को ज्ञान देना,
                 ज्ञानियों का काम है।
अज्ञान का पर्दा हटकर,
               सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

सुन

मन साफ नहीन

मन साफ नहीं,तन साफ नहीं।
जब कोई नही तो आप नही।

पटक-पटक कर कपड़े धोए,
गंध-मैल हटाए दूर। 
जो अपने मनमा को धोते,
हो जाते बेकसूर। 

रगड़-रगड़ कर घर को धोया,
कूङा-कचरा साफ किया।
मन-मंदिर को साफ करन में,
कोई झटपट नहीं रहा।

घास-फूस को काट-छांट कर,
आँगन की तूने की सफाई।
पर मनुवा को साफ करन में,
तूने क्यों इतनी देर लगाई।

लिप-पोतकर ऊंची कोठी पर,
सुन्दर रंग  से किया रंगाई। 
वैसे मन को सुन्दर रंग देने में,
बोलो क्यो कर किये ढिलाई। 

काले तन को साफ करन को,
हल्दी-अबटन बहुत लगाये।
पर मनमा को साफ करन में,
कोई झटपट नहीं  दिखाये।


सुजाता प्रिय समृद्धि

Friday, September 11, 2026

मन की सफाई

मन साफ नहीं,तन साफ नहीं।
जब कोई नही तो आप नही।

पटक-पटक कर कपड़े धोए,
गंध-मैल हटाए दूर। 
जो अपने मनमा को धोते,
हो जाते बेकसूर। 

रगड़-रगड़ कर घर को धोया,
कूङा-कचरा साफ किया।
मन-मंदिर को साफ करन में,
कोई झटपट नहीं रहा।

घास-फूस को काट-छांट कर,
आँगन की तूने की सफाई।
पर मनुवा को साफ करन में,
तूने क्यों इतनी देर लगाई।

लिप-पोतकर ऊंची कोठी पर,
सुन्दर रंग  से किया रंगाई। 
वैसे मन को सुन्दर रंग देने में,
बोलो क्यो कर किये ढिलाई। 

काले तन को साफ करन को,
हल्दी-अबटन बहुत लगाये।
पर मनमा को साफ करन में,
कोई झटपट नहीं  दिखाये।


सुजाता प्रिय समृद्धि

हिन्दी भाषा जिन्दाबाद

हिन्दी भाषा जिंदाबाद 

हिन्दी भाषा बोलो सब मिल,
सदा ही रखना इसे आवाद।
कहो हिन्द के हिन्दी-भाषी,
हिन्दी  भाषा  जिन्दाबाद।।
कहो हिन्द के.............

हिन्दी भाषा बड़ी मनोहर।
गर्व करो इसको अपनाकर।
हिन्दी ने परतंत्रता तोड़ी-
 हुआ हमारा देश आजाद।।
कहो हिन्द के.............

रच हिन्दी में छंद तुम प्यारे।
कथा-कहानी ग्रंथ भी न्यारे।
विदेशी भाषा को अपनाकर-
हिन्दी  को मत  कर बर्बाद।।
कहो हिन्द के............

कागद हिन्दी से सिंचित हो।
गीत-कविता से गुंजित हो।
क्षेत्रीय भाषाओं में भी तुम-
हिन्दी शब्दों को रखना याद।।
कहो हिन्द के...........

पढ़ो अगर तुम हिन्दी भाषा।
रखो मन में यह अभिलाषा।
हर भाषा के  ग्रंथों  का हो-
हिन्दी भाषा में अनुवाद।।
कहो हिन्द के.............

कम न हो हिन्दी की महिमा।
बनी रहे हमेशा इसकी गरिमा।
हिन्दी से ही है हिन्द हमारा-
मिटाता जो मन के अवसाद।।
कहो हिन्द के..............
           सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

हिन्दी भाषा जिंदाबाद

हिन्दी भाषा जिंदाबाद 

हिन्दी भाषा बोलो सब मिल,
सदा ही रखना इसे आवाद।
कहो हिन्द के हिन्दी-भाषी,
हिन्दी  भाषा  जिन्दाबाद।।
कहो हिन्द के.............

हिन्दी भाषा बड़ी मनोहर।
गर्व करो इसको अपनाकर।
हिन्दी ने परतंत्रता तोड़ी-
 हुआ हमारा देश आजाद।।
कहो हिन्द के.............

रच हिन्दी में छंद तुम प्यारे।
कथा-कहानी ग्रंथ भी न्यारे।
विदेशी भाषा को अपनाकर-
हिन्दी  को मत  कर बर्बाद।।
कहो हिन्द के............

कागद हिन्दी से सिंचित हो।
गीत-कविता से गुंजित हो।
क्षेत्रीय भाषाओं में भी तुम-
हिन्दी शब्दों को रखना याद।।
कहो हिन्द के...........

पढ़ो अगर तुम हिन्दी भाषा।
रखो मन में यह अभिलाषा।
हर भाषा के  ग्रंथों  का हो-
हिन्दी भाषा में अनुवाद।।
कहो हिन्द के.............

कम न हो हिन्दी की महिमा।
बनी रहे हमेशा इसकी गरिमा।
हिन्दी से ही है हिन्द हमारा-
मिटाती जो मन के अवसाद।।
कहो हिन्द के..............
           सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Wednesday, September 9, 2026

मुरलिया घनश्याम की

मुरलिया घनश्याम की

मुरलिया घनश्याम की राधा-राधा बोले।
राथा-राधा बोले,हाँ जी राधा-राधा बोले।
मुरलिया घनश्याम की ...........
यमुना किनारे श्याम मुरली बजाते।
मुरली की धुन पर राधा को बुलाते।
मुरली की धुन कानों में मधुर रस घोले।
मुरलिया घनश्याम की............
धुन सुनकर राधा हो गई बाबरी।
दौड पड़ी लेकर माथे पर गगरी।
यमुना के तीर जाकर घूंघट पट खोले।
मुरलिया घनश्याम की...............
नाच रही राधिका,नाचे कन्हैया।
तिनक-तिनक धुन,ता-ता थैया।
झूम-झूम नाच रहे हैं दोनों हौले-हौले।
मुरलिया घनश्याम की...............
              सुजाता प्रिय 'समृद्धि'