अर्जी. अर्जी
हे
मित्रों
मन विश्वास
सदा ही तुम रखो
आगे बढ़ना है हमको जीवन में
महकाना है अपनी इस फुलवारी को
मेहनत की सुगंध बिखरा-कर चहुँ दिशा में
रिश्तों की डोर पकड़ ,साथियों के हाथ थाम
चलते चले जाना है,कदम-से-कदम मिलाकर
यही
मेरी
मर्जी,
अर्जी
परम
पिता
परमेश्वर
से भी है
सुजाता प्रिय समृद्धि