आपका आसरा (प्रज्ञा छंद)
आपका आसरा,मातु मन में बसा।
आपके पास आ,आज मन है हंसा।
माँ कभी आपसे,लोग जो माँगते।
आप देती उसे,लोग जो चाहते।
दूर करती सदा,लोग की दुर्दशा।
आपके पास आ..........
आपके प्यार में, भक्त पागल सभी।
आपकी आस है,आज कायल सभी।
कष्ट हरणी अभी, फेर मेरी दसा।
आपके पास आ.........
आपसे माँगती, आज मन की खुशी।
आस पूरी करो,जो हृदय में बसी।
पाँच मेरा अभी कीच में है फंसा।
आपके पास आ........
माँ तुझे है पता, माँगते जो सभी।
कामना पूर्ण कर,चाहता मन अभी।
आपके प्यार का मातु है लालसा।
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'