पैगाम
प्रशंसा करने से किसी की,
रहते हो पीछे क्यो भला।
निन्दा सभी की कर तू अपना,
दिल भी लेते हो जला।
गंभीरता से आत्म चिन्तन,
कर कभी तुम देख लो।
द्वेष का पर्दा हटाकर
नजरे हृदय में फेंक लो।
बुराई करने से किसी का,
मन भी हो जाता बुरा।
परमात्मा का अंश हैं सब,
मत किसी को तुम दुरा।
जो सुपथ से डगमगाये,
हाथ उसका थाम लो।
रास्ता सच का दिखा दो,
भलाई का पैगाम दो।
भटके जनों को राह देना,
का नाम है।
अज्ञानियों को ज्ञान देना,
ज्ञानियों का काम है।
अज्ञान का पर्दा हटकर,
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'