Tuesday, August 18, 2026

सुन



>                            सुन 
                             झूठी
                         मुस्कान भी
                   परोसा करते हैं लोग 
           अपने प्यारे,भोले-भाले चेहरे पर
       जरा उन्हें परखने की हुनर तो सीख लो
  उनपर अपनी पैनी नजर रखने की आदत डालो
समय बदलने पर लोगों को बदलते देर नहीं लगता
                              अपने
                             हृदय में 
                             तुम इन
                            बातों को
                            सदा  ही
                            बसा लो

Thursday, August 13, 2026

बोलो सब हर हर महादेव

बोलो सब हर हर महादेव 
बिराज रहे घर-घर महादेव 
देवघर भी जाना है, बासुकीनाथ भी जाना है,
मेरे भोले बाबा का, घर में भी ठिकाना है।
मन में  भी शंकर महादेव 
विराज रहे................
फूल भी चढाना है, बेलपत्र भी चढ़ना है।
अपने भोले-बाबा को भांग भी चढाना है।
संकट लेते सब हर महादेव 
विराज रहे..................
ढोलक भी बजाना है ,मृदंग भी बजाना  है।
भोलेनाथ के आगे बोल बम भी गाना है।
धन-दौलत देते हैं भर महादेव 
विराज रहे घर-घर महादेव 

सबको देगे वर महादेव 
विराज रहे........


Wednesday, August 12, 2026

महाकाल (शक्ति छंद)

महाकाल (शक्ति छंद)
122,122,122,12

महाकाल तेरा ठिकाना कहाँ। 
मुझे भी बुला लो जहाँ हो वहाँ।।
लगा भाल चंदन लगाऊँ तुझे।
खिला भांग गोला मनाऊँ तुझे।
करूँ आरती मैं कपूर जला।
मिटा दो घनेरा टालो बला
अभी पास आई सुनो हे प्रभो।
सभी कष्ट हर लो सुनो हे प्रभो।।
तुझे मैं सुनाऊँ सभी दास्ताँ। 
दुखों से पङा है अभी वास्ता।।
झुका सिर चरण में नमन मैं करूँ। 
उठा हाथ दोनों विनय मैं करूँ।।
पधारो हमारे हृदय में अभी।
सभी कष्ट हर लो हमारे अभी।।



Tuesday, August 11, 2026

हरी-हरी चूड़ियाँ

हरी-हरी चूड़ियाँ 

हाथों में शोभ रही हरी-हरी चूड़ियाँ। 
गोरी कलाई पर भरी-भरी चूड़ियाँ।
लगती है सावन की हरियाली-सी।


जब-जब चूड़ियाँ खन-खन खनकती।
गोरी की पायलिया झन-झन झनकती।
सुर लग रही है बड़ी मतवाली-सी।


माँग में सिन्दूर और होठों पर लाली।
माथे पर बिन्दी ओर कानों में बाली।
कमर लचकाती फूल की डाली-सी।

          सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Monday, August 10, 2026

नटखट मोहन-श्याम

नटखट मोहन-श्याम 

बड़ा नटखट मोहन-श्याम सखी-
बड़ा नटखट......
तंग करता आठो याम सखी!
बड़ा नटखट.......
जब पनघट पर मैं जाती हूँ,
मेरे पीछे-पीछे आता है।
झकझोर मेरी मटकी को,
सारे जल को गिराता है।
मटकी लेता थाम सखी!
तंग करता........
जब मधुवन में मैं जाती हूँ,
मेरे पीछे-पीछे आता है।
बेली-चमेली की कलियाँ,
तोङ मुझ पर गिराता है।
हर दिन उसका काम सखी!
तंग करता.................
जब बाग-बगीचे जाती हूँ,
गैया को चराने आता है।
ठोक-पीटकर लकुटी को,
मुझे अपनी ओर रिझाता है,
भोर से लेकर शाम सखी!
तंग करता...................
बैठ कदम की डाली पर,
वह वंशी मधुर बजाता है।
राधा-राधा कह वंशी की,
धुन में वह मुझे बुलाता है।
करता है मुझे बदनाम सखी!
तंग करता....................

सावन महीना (कजरी)

सावन महीना (कजरी)

हरि बोलो ! सावन महीना पावन, मनमा हरसे हरि बोलो।
हरि बोलो ! रिमझिम रिमझिम, मेघा बरसे हरि बोलो।

गड़-गड़, गड़ -गड़ बोले बदरिया।
चम-चम,चम-चम चमके बिजुरिया।हो रामा,
हरि बोलो !अजब आवाज आबे, अम्बर से हरि बोलो।
हरि बोलो!सावन महीना...........

वर्षा की देखो है बुंदे ये न्यारी।
लगती है यह हर जन को प्यारी।हो रामा,
हरि बोलो ! कड़क -कड़क कर,बदरा गरजे हरि बोलो।
हरि बोलो!सावन महीना .........

धरती पर छायी है हरियाली।
हरी- भरी है पेड़ों की डाली।हो रामा।
हरि बोलो ! खेतों की क्यारी में, पौधे लरजे हरि बोलो।
हरि बोलो !सावन महीना...........

       सुजाता प्रिय समृद्धि

Sunday, August 9, 2026

ज्ञानामृत बरसाओ

अप्रत्यक्षित ज्ञान उजागर कर दो।
समस्त ज्ञान का गागर भर दो।
जग में ज्ञानामृत बरसाओ। 
अच्छा क्या होता बुरा क्या होता।
मूढ जगत में कैसे है रोता।
आगे बढ़कर सबको दरसाओ।

कैसे ज्ञानी जग में उठते।
अज्ञानी के दम कैसे हैं घुटते।

सबको बोलो सबको समझाओ।