Tuesday, March 24, 2026

sur

सुर छेड़o न अभी तुम सांवरिया। 
तेरी सुर सुन होती मैं  बाबरिया।।
सुर छेड़ न.........
मैं तो paniया  भरण को जाती रहीं, 
छलक-छलक छलक जाए मोरी gagriyan

Sunday, March 22, 2026

यमुना किनारे

हरी बोलो!कृष्ण जी बंसी बजावे यमुना किनारे हरि बोलो।
हरि बोलो! वंशी के धुन में सबको रिझाबे हरी बोलो।
हरी बोलो .....
यमुना किनारे कदम की गछिया,
हरि बोलो गाछ पर चढ़कर डाली नवाबे हरि बोलो ।
हरि बोलो ......
सब सखियन मिली वसन उतारे,
हरि बोलो  यमुना के जल में संग नहाबे हरि बोलो
हरि बोलो .......
देख गोपन की स्नान की रीति, 
हरि बोलो धीरे से जाकर कान्हा वसन चुराबें हरि बोलो ।
हरि बोलो ...
सब सखियां मिली अर्थ करत हैं,
हरि बोलो कान्हां से विनय कर वसना मांगे हरि बोलो।
हरि बोलो....
 कृष्ण जी बोले वसन मत खोलो,
हरि बोलो जल में वरुण के वास बताए हरि बोलो।
हरि बोलो......
                     सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Wednesday, March 18, 2026

तुम से मिलकर

S               तुम से मिल कर 

                तुम  से  मिल कर
                ऐसा लगता है कि 
                कुछ  खोया हुआ 
                पा लिया है हम ने 
            उस रास्ते की याद आई 
        जहाँ कभी हम साथ चलते थे 
     गलबहियाँ डाल,पीठ पर बस्ते लिए 
  नन्हें कदमों से मंजिल की दूरियाँ नापते 
   संजीदगी -से रास्ते की धूल उड़ाते हुए 
    चलते चले  जाते थे, बढ़ते जाते थे, 
       तब  हमारे  मक़सद एक होते थे, 
        और हमारे उद्देश्य एक होते थे,
          सभी सपने भी एक होते थे,
             पर आज हमारा मिलना
              एक सपने से कम नहीं
                
               सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, March 8, 2026

बुद्धिमान गदहा

एक धोबी था। लोगों के कपड़े धोकर पैसे कमाता। परिवार का भरण-पोषण कर कुछ पैसे बचा भी लेता था।
एक बार उसकी पत्नी बहुत बीमार पड़ी। उसकी इलाज में जब उसके जमा किए गए सारे पैसे खत्म हो गये,तब उसने एक व्यापारी से यह कहकर कुछ पैसे उधार लिए,कि जल्द ही उसके पैसे वापस कर देगा। किन्तु समय पर वह व्यपारी को पैसे वापस नहीं कर पाया। व्यापारी उससे अपने पैसे मांगने आने लगा।इसी बीच उसकी निगाह धोबी के गदहे पर पड़ी। उसने धोबी से कहा- यदि तुम मेरे नहीं वापस कर सकते तो उसके बदले अपने गदहे को ही दे दो।
धोबी ने उससे बहुत कहा कि वह जितने कपड़े धोने के लिए ले जाता और लाता है उसे गदहा ही ढोता है। उसके जाने से कपड़ा धोना कठिन हो जाएगा। लेकिन व्यापारी ने एक नहीं मानी।हारकर धोबी ने व्यपारी  को अपना गदहा दे दिया।
गदहे को अपने मालिक की विवशता देखी नहीं जा रही थी।सोचा व्यपारी के साथ ना जाए।पर नहीं जाने से भी उसके मालिक को पर

Monday, February 16, 2026

सौन्दर्य

देखकर आईने में सूरत निहारती।
बड़े ही जतन से सजाती-संवारती।

साँवली सूरत को गोरी बनाने को।
दागदार चमड़ी को कोरी बनाने को।
सौंदर्य-प्रसाधनों से उसको निखारती।
बड़े ही जतन से..............
केशों को संवारती विभिन्न तरीके से।
गूँथती और बांधती बड़े सलीके से।
देखकर आईना कंघी से हो झाड़ती।
बड़े जतन से... ‌......................
पहनकर वसन बार-बार हो देखती।
आईने में हर बार नज़रे हो फेंकती।
वसन को ठीक करने को हाथ मारती।
बड़े ही जतन से.................
तू काश आईने में अपने मन को देखती।
बस एक बार अंतर में नजर को फेंकती ।
अपनी बुराइयों को थोड़ा सुधारती।
बड़े ही जतन से...................
मन के सौंदर्य को तू निखारती सखी। 
कभी भी किसी जन से करती न बेरूखी।
हृदय- सुन्दरी कह सखी तुम्हें पुकारती 
बड़े ही जतन से ..............     
          सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, February 8, 2026

सपने

सपने 
                
                कभी 
             लड़कपन में 
        हमने जो देखे सपने 
   काश!अभी वे हो जाते अपने 
ऊँची उड़ान भरते हम भी नभ में 
  खेल तारों संग आँख-मिचौनी 
     फिर चढ़ कर चाँद के ऊपर 
         सारे जग की सैर कर
           आ लौट अपने घर 
              दादी- दादा को 
                हाल सुनाते
                    चंदा 
                  तारे की 
                बात बताते 
          नभ में कैसे वे रहते हैं 
      रात को कैसे चमका करते हैं 

            सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

आईना

1.    आईना 
                        हम 
                   आईने को 
              लाख साफ कर लें 
              चेहरे पर नकाब है 
         तो खुद को पहचान पाना 
                भी मुश्किल है 
                    इसलिए 
               आईने को साफ 
               करने  से  अच्छा  
               चेहरे  साफ रखो 
                     क्योंकि 
            हमारा  प्यारा आईना 
            जितना  साफ   होगा 
            चेहरे  के   धब्बों  को  
            उतनी ही बारीकी  से                                         
             सभी  को  दिखाएगा 
             हमारे होठों की वाणी
             हमारे  चेहरे  के भाव
             आँखों  की  दृष्टि   ही 
              हमारे  प्यारे चेहरे की 
              अनमोल   सुंदरता  है

               सुजाता प्रिय समृद्धि