Sunday, June 14, 2026

मदारी (बाल गीत)

मदारी (बाल  गीत  )

अगङम-बगङम बम्बे बोल।जोर-जोर  से बाजे ढोल।।
झूमोन् नाचो घूमो गोल।भारत माता की जय बोल।।
अगङम......
एक मदरी आया,साथ में भालू लाया।
डमरू खूब बजाया,भालू को नचाया।
नाच भालू नाच,नाच-नाच रे नाच। 
दाग दुदादु दुल्लू-दुल्लू,करता ठक-ठक-ठक भालू।
झाग झुझालु झुल्लु-झुल्लू,नाचेन् हम सब और भालू।
नाच भालू नाच, नाच-नाच रे नाच। 

अगङम-बगङम बम्बे बोल, जोर जोर...........
झूमो-नाचो घूमो गोल भारत..............

एक बंदरिया आई,छम-छम नाच दिखाई। 
घूंघट में शरमाई, मंद-मंद मुसकाई।
बंदर ने मारा डण्डा, बिगड गया सारा फण्डा।
गई बंदरिया रूठ,रोई फूट-फूट 2
बंदर ने अपने पकड़ कान,बंदरिया क्यूँ जाती जल्दी मान। 
तब बंदर ने जोङे हाथ, गुस्ताखी मेरी कर दो माफ।
चल बंदरिया चल, साथ मेरे घर चल।
अगङम-बगडम बम्बे बोल...........
                सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Saturday, June 13, 2026

श्रीकृष्ण के आठ प्रतीक

श्रीकृष्ण के प्रतीक 

मोर  मुकुट माथ है ।
  वंशी भी तेरे हाथ है।।
      गौ  चराते  वन-घुम।
         माखन चुराते  तुम।।
            सुदर्शन  चक्र  रख।
               हाथ पंचजन्य शंख।।
                  गले  वैजयंती माल।
                   गीता सुनाते कमाल।।

                        सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, May 31, 2026

गोदना (बाल नाटिका )

गोदना (बाल नाटीका )

स्वतंत्रता सेनानियों का काफिला अंग्रेजों के खिलाफ नारा लगाते हुए। 
"भारत माता की जय" 
"अंग्रेजों भारत छोड़ो"
एक बूढ़ी माता आती दिखाई पडती है।उन्हें देख कर स्वतंत्रा सेनानी -
पाव लागून् बूढ़ी माई !
बूढ़ी माई-जुग जुग 

मुक्तक

जब देखती तो साफ दिखती हैं।
मुस्कुराती - बेबाक  दिखती  हैं।
आप आई नहीं  महफिल में पर-
हर  तस्वीर  में आप दिखती  हैं। 
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        सुजाता प्रिय 'समृद्घि'

Monday, May 25, 2026

अपमान (रोला छंद )

अपमान (रोला छंद)

मत कर तू अपमान,किसी का सुन ले भाई।
कर सबका सम्मान, इसी  में   है  चतुराई।।

जिनका हो अपमान, सदा मन उनका रोता।
दिल ही नहीं दिमाग, सदा है आहत होता।।

अपमान जहाँ हो जाय,दुःख है आता मन पर।
उनके दिल की हाय,अहो लगती जीवन भर।।

हरदम रखना ध्यान, न अपमान किसी का हो।
न सम्मान  का दान, कभी  भी फीका हो।।

थोड़ा  कर  लो  मान, मन प्रफुल्लित होगा।
तेरा भी तो आज , चित  प्रसन्नचित्त  होगा।

जो करता है मान, वही  होता  है  राजा।
वही  सभा  में  बैठ, बनता है महाराजा।।

मन्थन कर लो मीत,कहाँ मन आहत होता।
फिर उसका मन जीत,हिया मर्माहत होता।

हरदम रखो ध्यान, कभी यहाँ  दिल न  टूटे।
इतना भी लो जान,किसी का हक ना लूटे।

            सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, May 24, 2026

विश्वासघात

विश्वासघात 

सुंदरवन में जामुन पेड़ पर,रहता था एक बंदर। 
उसके नीचे एक नदी थी,जिसमें रहता एक मगर।
दोनों गहरे मित्र थे,घुल-मिल बातें करते थे।
दोनों  मिलकर जामुन खाते,नदी का पानी पीते थे।
एक दिन बहला बंदर को,मगर ने पीठ पर बैठाया।
कहा मगरनी ने आज, तुमको दावत पर है बुलाया।
पहुँचे जब वे बीच नदी में,मगर ने बंदर को यू बताया।
मैं तो दोस्ती का वास्ता दे,छल से तुम्हें यहाँ  ले आया।
कोई दावत नहीं है घर में,नहीं मगरनी ने तुम्हें बुलाया।
तेरा कलेजा मीठा होगा,तुमने जामुन बहुत है खाया।
इसीलिए तुम्हें मारकर मैं, कलेजा तेरा खाऊन्गा।
बहुत दिनों की हसरत मैन,मन की आज पुराऊन्गा।।
कहा मगर से झट बंदर ने,काबू रखकर भय पर।
मैने अपना कलेजा सूखने,दिया पेड़ के ऊपर। 
जल्दी से मूझको वापस,पेड़ तक तू पहुँचा दे।
उठा पेड़ से कलेजा अपना,झट मैं तुम्हें थमा दूँ 
पुनः पेड़ तक उसको लाया,मगर ने 9बात में आकर।
पेड़ देख झट से चढ बैठा,बंदर ने छलांग लगाकर। ।
ऊँची डाल पर चढ़कर बोला,सुन ओ कपटी मित्र। 
कलेजा पेड़ पर सुख सकता है,यह बात नहीं है विचित्र। 
जो जन अपने मित्र से,विश्वासघात कrte है l
कोई उनका मित्र न होता,सभी दूर रहते हैं

Saturday, May 23, 2026

गाँधी जी के तीन बंदर

गाँधी जी के तीन बंदर 

गाँधीजी  के  तीन  बंदरों ने,
तीन  बातें  हैं  हमें  सिखाई। 

बुरा किसी  का कभी न देखो,
बुरा किसी का कभी न सीखो,
बुराई पर मत तुम नजरें फेंको, 
आँखे ढककर है हमें  सिखाई ।

बुरी बात तुम कभी न  सुनना।
बुरा किसी को कभी न कहना।
बुराई को अपने चित्त न धरना।
कान ढक - कर हमको बताई। 

जब  बोलने को मुख खोलो।
अपने शब्दों को पहले तोलो।
बुरी बात तुम कभी न बोलो।
मुँह ढक - कर  है हमें बताई। 
        सुजाता प्रिय 'समृद्घि'