Sunday, November 1, 2026

मैं तेरा बाप

मैं तेरा बाप (लघुकथा)

एक घंटा में परीक्षा की पुस्तिका जमा कर निखिल अपने दोस्तों के साथ सिनेमा हॉल .....।सीट पर बैठने ही जा रहा था कि बगल की सीट पर बैठे व्यक्ति ने घबराहट पूर्ण लहज़े में पूछा - "तुम इतनी जल्दी... यहाँ कैसे ...... ? क्या परीक्षा अधूरी छोड़ आये ?"
"मैं परीक्षा अधूरी छोड़ आऊँ या पूरी ! इसे पूछने वाले आप कौन होते हैं ?" 
चटाक S S S......
तीव्र ध्वनि के साथ एक झन्नाटेदार थप्पड़ उसके गाल पर ....।वह गाल सहलाता हुआ अंधेरे में उस शख्स का चेहरा देखने लगा। क्या सचमुच......?
हाँ-हाँ सचमुच! उसकी नजरें धोखा नहीं खा सकती।अंँधेरे में भी अपने पिता को ........⁹। 
आखिर उन्हें समझ आ ही गया कि मैं परीक्षा में पूरी नहीं लिखता हूँ , इसलिए उत्तीर्ण नहीं ......। इसलिए आज मुझे परीक्षा-भवन तक छोड़कर समय बिताने के लिए सिनेमा देखने  .......और संयोग से     ।'
"हम कितना भी अपने माता-पिता से झूठ बोलें,सच्चाई उनके समझ में आ ही जाती है।' कितना भी नजरें बचाकर गलत रास्ते पर चलें,उनकी नजरें उन्हें देख ही लेती है।"
अब झूठ की चादर हट चुकी थी उसके नीचे के चिथड़े तोसक पर उसके बाप की नजरें पड़ चुकी थी।उन नजरों में प्यार के शैलाब की जगह क्रोध,नफरत और अविश्वास की ज्वार .............।
           सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Tuesday, October 27, 2026

झंझावात जीवन के

झंझावात जीवन के

               जीवन के
            कुछ झंझावात 
            ऐसे भी होते हैं 
                 जिसमें 
  न तो कोई हवा,न तीव्र आंधियां 
            न कोई तुफान 
          न मूसलाधार वर्षा
        न बादलों का गरजना
       न बिजली का कड़कना
    न  किसी तरह की ओलावृष्टि
   बस हल्का-फुलका-धीमा अंधड 
 और  छोटा-मोटा-सा उठता बबन्डर
    गर्म हवा का     तेजी से उठना
   आ  शनैः-शनैः    व   नन्हें-नन्हें 
   कोमल   बूँदों      का  बरसाना
   फिर जीवन के    कुछ पन्नो को
   झट से उड़ाना    और  भीगाना 
       और? और,     फिर वही
 ऐसा जैसे कुछ      हुआ ही नहीं ?
 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
     सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

आशा का दीप

आशा का दीप जलाए रखना

मन में विश्वास जगाए रखना।
आशा का दीप जलाए रखना।

माना तुझे असफलता मिली है।
जो तुम चाहे वो गुल ना खिली है।
मन का प्रसून खिलाए रखना।
आशा का दीप जलाए रखना।

विफलता भी तो होती वरदान है।
सफलता की राह करती प्रदान है।
मन के कोने को सजाए रखना।
आशा का दीप जलाए रखना।

आशा  जीवन का एक अंग है।
जीवन भर आशा चलती संग है।
हृदय में यह बात बसाए रखना।
आशा का दीप जलाए रखना।

अंत समय तक आस न खोना।
शायद लिखा हो सफल होना।
अंत तक आस लगाए रखना।
आशा का दीप जलाए रखना।
             सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, October 25, 2026

जय भोलेनाथ

मंदिर पिरामिड 
                       
                           हे 
                         शम्भु 
                     भोले    नाथ 
                पुकार   सुन   लीजिए 
            स्वीकार  करें  मेरी   प्रार्थना 
    आप  आकर   मेरा  दुख   हर  लीजिए 
आपके शरण में हम, यही आस लेकर आए हैं
नाथ!अपने मन में यही विश्वास लेकर आए  हैं 
  मुझ दीन- दुखियों के आप ही दीनानाथ  हैं 
  मेरे संग कोई            नहीं,आप मेरे साथ हैं
  हे   देवों  के     देव     मुझे शरण में लीजिए 
  हे    महादेव    शिव    आप  कृपा  कीजिए 
  हे  त्रिपुरारी    शंकर    संताप  हर   लीजिए 
  दुःख  सब  हर  महादेव  सुख सभी  दीजिए
  दूर कर मेरी दूर्दशा को, जीवन मेरा संवारिए 
  तारे  हैं आप अधमो को,  हमको  भी तारिए

मंदिर पिरामिड

मंदिर पिरामिड 
                       
                           हे 
                         शम्भु 
                     भोले    नाथ 
                पुकार   सुन   लीजिए 
            स्वीकार  करें  मेरी   प्रार्थना 
    आप  आकर   मेरा  दुख   हर  लीजिए 
आपके शरण में हम, यही आस लेकर आए हैं
नाथ!अपने मन में यही विश्वास लेकर आए  हैं 
  मुझ दीन- दुखियों के आप ही दीनानाथ  हैं 
  मेरे संग कोई            नहीं,आप मेरे साथ हैं
  हे   देवों  के     देव     मुझे शरण में लीजिए 
  हे    महादेव    शिव    आप  कृपा  कीजिए 
  हे  त्रिपुरारी    शंकर    संताप  हर   लीजिए 
  दुःख  सब  हर  महादेव  सुख सभी  दीजिए
  दूर कर मेरी दूर्दशा को, जीवन मेरा संवारिए 
  तारे  हैं आप अधमो को,  हमको  भी तारिए

Saturday, October 10, 2026

जय माता शैलपुत्री

जय माँ शैलपुत्री
           हे 
        माता
        प्रथम
      शैलपुत्री
    तेरी महिमा
   है अपरम्पार
देखो जरा निहार 
भक्त खड़े हैं द्वार 
 झुका कर शीश
  हाथों को जोड़
      नमस्कार
         करने
         आये
           हैं 
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'
 🙏🙏🙏🙏🙏

Thursday, October 8, 2026

स्त्री

1,       स्त्री  

         उपेक्षा 
      अवहेलना, 
 तिरस्कार,फटकार
     सहकर भी
        मन के 
क्षोभ-भय-तृष्णा को
      दमन कर 
    रखती मन में 
        कामना 
     परिवार की 
    सुख-समृद्धि 
  शांति-सुरक्षा की 
      पूरी करती
         मन्नतें 
 रख व्रत-उपवास 
  माँगती आशीष 
 आँचल फैलाकर 
     हे परमेश्वर!
दीनानाथ! दया करो, 
    सब पाप हरो 
  भूल-चुक,गलती  
    सब माफ करो
  सबकी भला करो 

सुजाता प्रिय समृद्धि