Sunday, March 8, 2026

बुद्धिमान गदहा

एक धोबी था। लोगों के कपड़े धोकर पैसे कमाता। परिवार का भरण-पोषण कर कुछ पैसे बचा भी लेता था।
एक बार उसकी पत्नी बहुत बीमार पड़ी। उसकी इलाज में जब उसके जमा किए गए सारे पैसे खत्म हो गये,तब उसने एक व्यापारी से यह कहकर कुछ पैसे उधार लिए,कि जल्द ही उसके पैसे वापस कर देगा। किन्तु समय पर वह व्यपारी को पैसे वापस नहीं कर पाया। व्यापारी उससे अपने पैसे मांगने आने लगा।इसी बीच उसकी निगाह धोबी के गदहे पर पड़ी। उसने धोबी से कहा- यदि तुम मेरे नहीं वापस कर सकते तो उसके बदले अपने गदहे को ही दे दो।
धोबी ने उससे बहुत कहा कि वह जितने कपड़े धोने के लिए ले जाता और लाता है उसे गदहा ही ढोता है। उसके जाने से कपड़ा धोना कठिन हो जाएगा। लेकिन व्यापारी ने एक नहीं मानी।हारकर धोबी ने व्यपारी  को अपना गदहा दे दिया।
गदहे को अपने मालिक की विवशता देखी नहीं जा रही थी।सोचा व्यपारी के साथ ना जाए।पर नहीं जाने से भी उसके मालिक को पर

Monday, February 16, 2026

सौन्दर्य

देखकर आईने में सूरत निहारती।
बड़े ही जतन से सजाती-संवारती।

साँवली सूरत को गोरी बनाने को।
दागदार चमड़ी को कोरी बनाने को।
सौंदर्य-प्रसाधनों से उसको निखारती।
बड़े ही जतन से..............
केशों को संवारती विभिन्न तरीके से।
गूँथती और बांधती बड़े सलीके से।
देखकर आईना कंघी से हो झाड़ती।
बड़े जतन से... ‌......................
पहनकर वसन बार-बार हो देखती।
आईने में हर बार नज़रे हो फेंकती।
वसन को ठीक करने को हाथ मारती।
बड़े ही जतन से.................
तू काश आईने में अपने मन को देखती।
बस एक बार अंतर में नजर को फेंकती ।
अपनी बुराइयों को थोड़ा सुधारती।
बड़े ही जतन से...................
मन के सौंदर्य को तू निखारती सखी। 
कभी भी किसी जन से करती न बेरूखी।
हृदय- सुन्दरी कह सखी तुम्हें पुकारती 
बड़े ही जतन से ..............     
          सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, February 8, 2026

सपने

सपने 
                
                कभी 
             लड़कपन में 
        हमने जो देखे सपने 
   काश!अभी वे हो जाते अपने 
ऊँची उड़ान भरते हम भी नभ में 
  खेल तारों संग आँख-मिचौनी 
     फिर चढ़ कर चाँद के ऊपर 
         सारे जग की सैर कर
           आ लौट अपने घर 
              दादी- दादा को 
                हाल सुनाते
                    चंदा 
                  तारे की 
                बात बताते 
          नभ में कैसे वे रहते हैं 
      रात को कैसे चमका करते हैं 

            सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

आईना

1.    आईना 
                        हम 
                   आईने को 
              लाख साफ कर लें 
              चेहरे पर नकाब है 
         तो खुद को पहचान पाना 
                भी मुश्किल है 
                    इसलिए 
               आईने को साफ 
               करने  से  अच्छा  
               चेहरे  साफ रखो 
                     क्योंकि 
            हमारा  प्यारा आईना 
            जितना  साफ   होगा 
            चेहरे  के   धब्बों  को  
            उतनी ही बारीकी  से                                         
             सभी  को  दिखाएगा 
             हमारे होठों की वाणी
             हमारे  चेहरे  के भाव
             आँखों  की  दृष्टि   ही 
              हमारे  प्यारे चेहरे की 
              अनमोल   सुंदरता  है

               सुजाता प्रिय समृद्धि

आया सुंदर भोर

,       आया सुन्दर भोर 

          उठ  भाई अब 
          आलस्य त्याग 
          मिटा   मन  के
          सारे   अवसाद 
     आया प्यारा सुंदर भोर
   सूर्य-किरण फैली चहुँ ओर 
  सभी जीव का मन विहसता
 खुशियों से तन - मन हुलसता
  उड़ी चिरैया भर मन उल्लास
    चहक कर करती परिहास
         खुश कर मन उदास

Friday, January 30, 2026

खुशबू चमन से (ग़ज़ल)

खुशबू चमन से 

चुराया किसी ने है खूशबू चमन से। 
मगर है न जाता महक  मेरे मन से। 

बहारों का मौसम, फिजा में समाया, 
मग़र वह महक न आता वदन से।
 
गुल तो खिलें हैं, बहुत गुलशन में, 
मगर उनमें रौनक नहीं है अगन से। 

कोई मुझसे कह दे जरा पास आकर, 
मिला क्या किसी को,इसके हनन से ।

अगर तोड़ लेता, कोई फूल आकर, 
Aस्क न गिरता फूलों के नयन से ।

फूलों में रहता महक उनकी प्यारी, 
अलग वह न होता, अपने रतन से। 

लगन से

Thursday, January 29, 2026

,माँ शारदे भवानी

माँ शारदे भवानी 

माँ शारदे भवानी इतनी कृपा तू करना। 
मुझ मूढ के हृदय से अज्ञानता को हरना। ।
तेरे चरण में माता हम शीश हैं  नवाते। 
कर जोड़कर विनीत हो  विनती सदा ही गाते। ।
विद्या ददाति  माता !हमको सुघड़ बना दो। 
सन्मार्ग पर भी चलना, हमको तू  माँ सिखा दो। 
छोटा बड़ा सभी माँ हर काम को करें हम ।
विद्या  के ashma में उड़ान भी भरें हम।।
आशीष तुम दो माता, जो कामना करें हम। 
जो दीन और दुखी हो, उन सबका दुःख हरे हम ।।
आकाश से भी ऊंचा, मन भाव  हो  हमारा। 
गंगा बहे हृदय में, हों प्रेम की ही धारा। ।
मस्तक सदा हो ऊंचा, वरदान  मुझको देना ।
किसी का न दिल दिखाऊ, सच्चा विचार देना। ।

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