मुरलिया घनश्याम की
मुरलिया घनश्याम की राधा-राधा बोले।
राथा-राधा बोले,हाँ जी राधा-राधा बोले।
मुरलिया घनश्याम की ...........
यमुना किनारे श्याम मुरली बजाते।
मुरली की धुन पर राधा को बुलाते।
मुरली की धुन कानों में मधुर रस घोले।
मुरलिया घनश्याम की............
धुन सुनकर राधा हो गई बाबरी।
दौड पड़ी लेकर माथे पर गगरी।
यमुना के तीर जाकर घूंघट पट खोले।
मुरलिया घनश्याम की...............
नाच रही राधिका,नाचे कन्हैया।
तिनक-तिनक धुन,ता-ता थैया।
झूम-झूम नाच रहे हैं दोनों हौले-हौले।
मुरलिया घनश्याम की...............
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'