जय माँ शारदे 🙏🏽🙏🏽
तीखे बोल
अर्चना के पति विलास जी अचानक बीमार पड़े ।डॉक्टरों ने किडनी की बीमारी बताकर वेल्लोर ले जाने को कहा।वह पड़ोसन सोनाक्षी को बच्चों एवं घर की देखभाल की जिम्मेदारी सौंप कर चल पड़ी।
मोह बस सोनाक्षी सारी जिम्मेदारी बखूबी........।
छह महीने इलाज के बावजूद विलास जी.............।
अंतिम संस्कार गाँव से होने के बाद दुःखी मन से जब अर्चना जी शहर वापस आई तो देखी- बच्चे सोनाक्षी अंटी के दिवाने हो गए हैं।
हर बात पर सोनाक्षी जी की तारीफों के पुल............।
"आंटी जी ने ऐसा खाना खिलाया, वैसा लंच दिया ! ऐसे घर, कपड़े, फूलों इत्यादि............।तबियत खराब होने पर खूब..........।किसी से लड़ाई झगड़े होने पर बीच-बचाव.............।"
हाँ अब बच्चे उनके अहसान के काईल हो या ममता के वशीभूत हो अंटी के भी ,बाजार के छोटे-मोटे काम कर देते।
माँ के मना करने पर कहते- अंटी ने हमें पैसे और मेहनत से जितना सहयोग व सहारा दिया उस अनुपात में तो हम तो कुछ भी नहीं करते मम्मी!"
उफ्फs s s s s s s s s s
हर समय सोनाक्षी की तारीफ.......
खीज कर वह बच्चों को डाट .....।
इस तरह भी जब बच्चे नहीं मानते तो सोनाक्षी को ही कठोर शब्दों में सुनाती -"मेरे बच्चों जैसा मुर्ख कोई हो ही नहीं सकता। कोई कुछ चिकना-चटपटा खिला देगी तो उसकी जी हजूरी में लगे रहेगें।इनके सीधेपन का फायदा चालबाज औरतें खूब उठाती हैं। एक तो दुसरे के बच्चों से काम कराने में कोई शर्म नहीं करतीं, ऊपर से खूब वाहवाही भी लूटती हैं।"
सोनाक्षी को समझते देर नहीं लगी- यह फिकरे किस पर......।
उसका दिल लहूलुहान........।
मन में संकल्प लिया- "चाहे जो हो, अब कभी भी इनके बच्चों की ........।"
ईश्वर ने जल्द ही वह दिन दिखा दिया। अर्चना की जेठानी जी स्वर्ग सिधार........।
गाँव जाना भी आवश्यक है और बच्चों की छह माही परीक्षा ........।
अब न अर्चना जी को ही मुँह रहा कि बच्चों की देखभाल की...........।
न ही सोनाक्षी का मन...........।
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'