Thursday, April 30, 2026

जेठ की दुपहरी

जेठ की दुपहरी

लू की लहरी
तपती दुपहरी
ना मन भाए।

सूर्य तपता
लहक-दहकता
यूँ झुलसाए।

अग्नि लपटें
लप-लप झपटे
तन जलाए।

हो गया जीना
बह रहा पसीना
जी घबराए।

बंद चलना
घूमना औ फिरना
किसे बताएँ।

गर्मी सहना
पढ़ना व लिखना
रास न आए।

सूर्य तपता
तन-मन जलता
किसे बताएँ।

कंठ हैं सूखे
रहकर यू भूखे
प्यास बुझाएं।

सूखे हैं भैया,
कूप ताल-तलैया,
जल धाराएंँ।

जीव आकुल 
तन-मन व्याकुल
घेरी चिंताएँ।

तपन सारा
औ संताप तुम्हारा
किसे बताएँ।

सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Monday, April 27, 2026

दोहे

दोहे (शब्द आधारित)

काक चेष्टा सभी करे,रखते मन में लोभ।
धोखा दे सब घट भरें,रखकर मन में क्षोभ।।

धर्मों का झण्डा दिखा,फैलाते हैं द्वेष। 
हिन्सा,धर्म व झूठ से,देते सदा क्लेश।।

सत्ता की लालच दिखा,जुमले कसे हजार।
कपट भाव से आप वे,बना रहें सरकार ।।

छल से मन घृणा बढ़ा,करवाते हैं वैर। 
रखता इसमें पाँव जो,छल की करता सैर।।

कहता बात बढा-चढ़ा,भरता मन उन्माद। 
वादा जो करते यहाँ,जीत न रखते याद।।

अन्याय का छत्र बढा,दे न्याय की छाँव। 
अपना काम निकाल वे,पीछे खींचे पाँव।।
         सुजाता प्रिय 'समृद्घि'
             राँची, झारखण्ड

Wednesday, April 22, 2026

तुम चुप मत रहना

तुम चुप मत रहना

हे स्त्री !  तुम चुप मत रहना।
सीखो अब इतिहास बदलना।
हे स्त्री! तुम ..............
अगर सदा तुम रहोगी मौन। 
दर्द हिया -का सुनेगा कौन। 
पीड़ा अपनी सबको कहना।
हे स्त्री! तुम,.............
निज हृदय में लाओ  शक्ति। 
मत करना  दुष्टों की भक्ति।
अन्याय कभी मत तुम सहना।
हे स्त्री ! तुम...................
ख़ामोशी तुमको जब सताए। 
तेरे मन  के टुकड़े कर जाए। 
यूँ टूटकर तुम नहीं बिखरना।
हे स्त्री! तुम,.............
सच्चाई को तुम नहीं छुपाओ।
मक्कारी से भी मत घबराओ।
सीखो तुम भी सदा निखरना।
हे स्त्री ! तुम...............
           सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Monday, April 20, 2026

अक्षय तृतीया आयी

अक्षय तृतीया आयी

वैशाख माह के शुक्ल-पक्ष की,अक्षय तृतीया आयी।
शुभ तिथि है आज अपने संग,शुभ-सौभाग्य है लायी।

शुभ मुहूर्त है आज,सभी मिल पूजन-अर्चन कर लो।
शुभाशीष पाओ ईश्वर से, और अच्छे-अच्छे वर लो।
देखो भगवन विष्णु के संग में खड़ी है लक्ष्मी -माई।
शुभ तिथि है आज............

बड़ी ही पावन तिथि है, पुण्य-कार्य भी सब कर लो।
अच्छे-सच्चे कर्मों से अपने,  जीवन का घट भर लो।
अच्छे फल देंगे तब ईश्वर,जीवन की है यही कमाई ।
शुभ तिथि है आज...............

आज हम दीन-दुखियों को, चलकर दान करें कुछ। 
दुखित-पीड़ित जो जन हैं,उनका कल्याण करें कुछ।
जरूरतमंद लोगों की भी, हम चलकर करें भलाई।
शुभ तिथि है आज...................

सुख-सौभाग्य का देखो जी,य़ह अक्षय पर्व  है आया।
रोग - शोक,संताप को भी,अब देखो यह दूर भगाया।
रिद्धि-सिद्धि खुश होकर देखो, सुख 'समृद्धि' हैं लाई।
शुभ तिथि है आज .....................

                                     सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, April 19, 2026

बढता जा

बढता जा
बढ़ता जा तू पग-पग प्रतिपल,जीवन भर बढता जा।
मंजिल की जब राह न सूझे,राह नयी गढता जा।।
            जीवन को तुम कर ले रोशन। 
            खुशियों से तू भर ले तन-मन।
             इस  दुनिया  में  रंग बहुत  है,
             सब  रंगो  से  रंग ले  जीवन। 
रंग लगाकर, प्यार जमाकर, कंचन से मढ़ता जा।
            मारुत  से  बढना  सीखो,
            जलधारा से बहना सीखो।
            इस जीवन की राह बड़ी है,
            चंदा  से  तू  चलना सीखो।
अग्निधूम से शिक्षा लेकर,पर्वत पर चढ़ता जा।
          रुको नहीं तुम जीवन पथ पर,
          बढ़े चलो तुम बस जीवन भर,
          बढ़ना   ही   है  धर्म   तुम्हारा-
         बढ़े चलो तुम यह निश्चय कर। 
सुखी जीवन का मंत्र यही है,मन-ही-मन पढता जा।
            बढ़ने वाले ही मंजिल पाते।
            जीवन पथ में जो न घबराते।
           उतार-चढ़ाव को समतल कर,
            सुंदर - सुगम  हैं राह  बनाते।
अपनी मेहनत से जीवन में,मानिक-मोती जङता जा।
               सुजाता प्रिय 'समृद्घि'

Saturday, April 18, 2026

शिक्षक

नए-नए नित ग्यान सिखाने आते हमको शिक्षक।
शिक्षा का अनमोल रतन दे जाते हमको शिक्षक।

अक्षर लिखना ,शब्द बनाना और वाक्य रचवाते।
निबंध लिखना ,कविता रचना, सब हमको सिखलाते।
अक्षर-अक्षर ग्यान दे साक्षर ,बनाते हमको शिक्षक।
शिक्षा का अनमोल रतन दे जाते हमको शिक्षक।

अनुशासन  की शिक्षा देते, कहते पालन करना।
गुरूजनों का आदर करना ,मानना हरदम कहना।
जीवन जीने की कला,सिखलाते हमको शिक्षक।
शिक्षा का अनमोल रतन दे जाते हमको शिक्षक।

टेढ़े-मेढ़े ,जीवन पथ पर ,चलना हमें सिखाते।
भला-बुरा का ग्यान देकर ,जीना हमें सिखाते।
अच्छे-अच्छे कर्म करना, बतलाते हमको शिक्षक।
शिक्षा का अनमोल रतन दे जाते हमको शिक्षक।
                                       सुजाता प्रिय

Friday, April 17, 2026

धूर्त की पहचान

धूर्त की पहचान 

मीठी-बोली बोलना,धूर्तों की पहचान।
मीठा-मीठा बोलकर,बात सभी ले जान।।

हर मानव से दोस्ती,करते आठो याम।
भले-मानुस बने सदा,जपे राम का नाम।।

मिल्लत की बातें बता,दिखलाते हैं प्यार। 
आग पीठ पीछे लगा,लड़वाते ललकार।।

मुँह पर करते हैं सदा,प्यारी-प्यारी बात।
पीठ पीछे वही करे,जा करके आघात।।

दिल की बाते पूछते,मीठी बोली बोल। 
वक्त-मिले तो आपके,राज सभी दे खोल।।

करो सभी से दोस्ती,पर रखो यह ध्यान। 
जितना ही दरकार हो,उतना ही दो मान।।

देते धोखा चाल चल,सुनो खोलकर कान।
बार हैं करते पीठ पर,रहो तुम सावधान।।