Wednesday, September 9, 2026

मुरलिया घनश्याम की

मुरलिया घनश्याम की

मुरलिया घनश्याम की राधा-राधा बोले।
राथा-राधा बोले,हाँ जी राधा-राधा बोले।
मुरलिया घनश्याम की ...........
यमुना किनारे श्याम मुरली बजाते।
मुरली की धुन पर राधा को बुलाते।
मुरली की धुन कानों में मधुर रस घोले।
मुरलिया घनश्याम की............
धुन सुनकर राधा हो गई बाबरी।
दौड पड़ी लेकर माथे पर गगरी।
यमुना के तीर जाकर घूंघट पट खोले।
मुरलिया घनश्याम की...............
नाच रही राधिका,नाचे कन्हैया।
तिनक-तिनक धुन,ता-ता थैया।
झूम-झूम नाच रहे हैं दोनों हौले-हौले।
मुरलिया घनश्याम की...............
              सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

हम दो हमारे दो

हम दो हमारे दो

आज अर्चना का मन बड़ा बेचैन....।उसकी माँ की तवियत ज्यादा खराब है। मोहन को छुट्टी नहीं।वह अकेली चली जाती।लेकिन,दोनों बच्चों की परीक्षा ....। उन्हें वह ले भी नहीं जा सकती और छोड़  भी नहीं ....।
मोहन अकेले उन्हें सम्हाल नहीं सकते।
किसके पास उन्हें छोड़कर .......।पिछली बार जब वह खुद बीमार पड़ी थी तो मोहन ने पड़ोस में उन्हें छोड़ दिया था।उन्होंने उन्हें ठीक से खिलाया-पिलाया।किन्तु उनके बच्चों ने उन्हें जाने कैसी-कैसी गंदी हरक्कतें , शैतानियाँ एवं गालियाँ .........।इसीलिए जब मोहन का एक्सीडेण्ट हुआ तो उन्हें घर में ही एक कमरे में बंद कर चली गई ।लेकिन जब वापिस आई तो देखी उतनी देर में उन्होंने कितने सारे सामान तोड़-फोड़ डाले।शरीर में कितनी जगह चोटें लगा ली।आपस में लड़कर एक-दूजे का शारीरिक नुकसान भी....।
     काश!कोई घर में उन्हें देख-भाल करने वाला .....।
पर कोई देख-भाल करने वाला होता कैसे ? 
उसकी अंतरात्मा ने उससे पूछते हुए याद दिलाया। तुम तो किसी को अपने साथ रहने नहीं देती।अभी भी घर से आते वक्त मोहन साथ में अपनी माँ को लाना चाहता था तो तुमने उसेे मना करते हुए कहा था हमारे घर में बस हम दो और..........। कभी भी माँ-पिताजी या कोई परिवार का सदस्य आ गया तुम्हारी तवियत बिगड़ जाती है ,या खाना बनाना भूल जाती हो।पिछली बार पिताजी आए थे तो उन्हें बार-बार मैगी खाने दे देती थी।जबकि तुम्हें पता है कि उन्हें मैंगी नहीं पसंंद।
     "लेकिन उनके रहने पर मुझे अतिरिक्त जिम्मेदारियाँ निभानी पड़ती है।फिर बच्चे उनसे चिपके रहते हैं और समय पर पढ़ाई -लिखाई नहीं कर पाते।"उसने अपने आप से.......।
तो फिर तुम्हारी मदद कोई कैसे कर सकता है ? 
एकल परिवार में रहोगी, तो बच्चों को संयुक्त परिवार की सुरक्षा कैसे .......... ?
              सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Tuesday, September 8, 2026

मन रह-रह भटकत मधुवन में

मन रह-रह भटकत मधुवन में 

मन रह-रह भटकत मधुवन में। 
मोहन  के  चंचल- चितवन  मेें। 
मन रह-रह................
बैठ  कदम  पर  वंशी  बजाबे।
मधुर-मधुर  धुन  छेड़   सुनाबे।
मारे  हिलोर मम   तन-मन  में ।
मन रह-रह.............
नंदन   वन   में    धेनु    चराबे।
लकुटी  उठाकर  पीछे     धाबे।
छोटे  पावों     की  भटकन  में। 
मन रह-रह................
यमूना    किनारे   नाग   नचाबे।
नाग  नाथ  कर  वस  मे   लाबे।
फन चढ  थिरकत छण-छण में। 
मन रह-रह ..................
गोपिन   के  संग   रास   रचाबे।
सहस्र  रूप  धर  सबको  भावे।
रूप -अनूप  है   कण-कण  में ।
मन रह-रह..........
          सुजाता प्रिय समृद्धि


Thursday, September 3, 2026

जन्मदिन का उपहार

जय माँ शारदे🙏🙏जन्मदिन का उपहार गुलाबी फ्राक में सजी संवरी शिखा परियों की शहजादी लग रही थी।पूरा हॉल चमकिले झालरों और रंगीन बल्बों से जगमग कर रहा था।पूरा हॉल मेहमानों से भरा पड़ा था।छोटी-छोटी कुर्सियों पर उसके दोस्त बैठे हैं। बधाई हो बधाई की धुन पर कुछ पैर थिरक रहे थे।शिखा की निगाह बार-बार मुख्य द्वार की ओर उठती और निराश हो इधर-उधर भटक...... टेबल पर केक रखाते ही दादी ने कहा -"जल्दी से केक काटो शिखा सभी मेहमान आ गए! "सभी कहाँ आये दादी माँ! अभी मेरी सहेली सुरुचि.........."मै आ गई! तभी साधारण फ्राक पहनी एक छोटी लड़की ने हॉल में आते हुए कहा।और अपने लाये थैले से एक मिट्टी का गुल्लक निकालकर उसकी ओर बढाते हुए कहा- हैपी बर्थ डे शिखा।"शिखा का चेहरा चमक उठा।"यह तो तुमने बहुत बढिया गिफ्ट दिया। इसमें मैं आज मिले सारे पेसे रखूंगी। ""और इसमें सारे गिफ्ट ""अच्छा यह भी मेरा है।?"हाँ मेरी माँ ने खास तुम्हारे लिए बनाया है।"शिखा ने हंसते हुए कहा-"आज सबसे बढिया गिफ्ट तुम्हारा ही है।क्योंकि तुमने और आंटी ने इन्हें अपने हाथों से बनाया है।"फिर शिखा ने केक काटे और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा हॉल ....... सुजाता प्रिय समृद्धि

एक 
         बड़ा ही
      वजनी पत्थर,
 रखा है सीने के ऊपर
पूछो न मुझसे ऐ दोस्तों
    कसकें दबीं हुईं हैं 
       कितनी  सारी
          इस सिला 
              तले
          सुजाता प्रिय

कसकें

कसकें 
           एक 
         बड़ा ही
      वजनी पत्थर,
 रखा है सीने के ऊपर
पूछो न मुझसे ऐ दोस्तों
    कसकें दबीं हुईं हैं 
       कितनी  सारी
          इस सिला 
              तले
          सुजाता प्रिय

Wednesday, September 2, 2026

उफ्फ

   उफ्फ 

           एक 
         बड़ा ही
      वजनी पत्थर,
 रखा है सीने के ऊपर
पूछो न मुझसे ऐ दोस्तों
    कसकें दबीं हुईं हैं 
       कितनी  सारी
          इस सिला 
              तले
         सुजाता प्रिय