जय माँ शारदे 🙏🏽🙏🏽
गजल
तेरी नजर ने मुझको चाहा,
इसे मुहब्बत का नाम दे दो।
मेरी नजर ने तुम्हीं को देखा,
सभी को ऐसा पैगाम दे दो।
खड़ी मै पथ पर तुम्हें निहारूं।
मन- ही -मन में तुम्हें पुकारू।
कभी मिले हम नदी किनारे,
बस एक ऐसी तू शाम दे दो।
बसी हृदय में तुम्हारी सूरत।
नहीं किसी की मुझे जरूरत।
मेरे हृदय में सदा विराजो,
हृदय में अपना ही नाम दे दो।
नहीं घड़ी भर है चैन मुझको।
अगर न देखे ये नैन तुझको।
जरा न होना नजर से ओझल,
मुझे दरस तुम तमाम दे दो।
तुम्हें जो लगता कि मैं हूँ पागल।
किया है मुझको तुम्हीं ने घायल।
मन को कुछ तो सुकूं मिलेगा,
मुझे यह तू छोटा इनाम दे दो।
तू अपने मन में जरा टटोलो।
हृदय का अपना तू राज खोलो।
फिजा में महकती है मेरी खुशबू ,
सुरा का ऐसा तू जाम दे दो।
हैं जहाँ में तेरे जो लोग प्यारे,
सभी ही न्यारे रहें हमारे।
मुझे तो आशीष उन्हीं से लेना,
सभी को मेरा प्रणाम दे दो।
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'