Friday, January 30, 2026

खुशबू चमन से (ग़ज़ल)

खुशबू चमन से 

चुराया किसी ने है खूशबू चमन से। 
मगर है न जाता महक  मेरे मन से। 

बहारों का मौसम, फिजा में समाया, 
मग़र वह महक न आता वदन से।
 
गुल तो खिलें हैं, बहुत गुलशन में, 
मगर उनमें रौनक नहीं है अगन से। 

कोई मुझसे कह दे जरा पास आकर, 
मिला क्या किसी को,इसके हनन से ।

अगर तोड़ लेता, कोई फूल आकर, 
Aस्क न गिरता फूलों के नयन से ।

फूलों में रहता महक उनकी प्यारी, 
अलग वह न होता, अपने रतन से। 

लगन से

Thursday, January 29, 2026

,माँ शारदे भवानी

माँ शारदे भवानी 

माँ शारदे भवानी इतनी कृपा तू करना। 
मुझ मूढ के हृदय से अज्ञानता को हरना। ।
तेरे चरण में माता हम शीश हैं  नवाते। 
कर जोड़कर विनीत हो  विनती सदा ही गाते। ।
विद्या ददाति  माता !हमको सुघड़ बना दो। 
सन्मार्ग पर भी चलना, हमको तू  माँ सिखा दो। 
छोटा बड़ा सभी माँ हर काम को करें हम ।
विद्या  के ashma में उड़ान भी भरें हम।।
आशीष तुम दो माता, जो कामना करें हम। 
जो दीन और दुखी हो, उन सबका दुःख हरे हम ।।
आकाश से भी ऊंचा, मन भाव  हो  हमारा। 
गंगा बहे हृदय में, हों प्रेम की ही धारा। ।
मस्तक सदा हो ऊंचा, वरदान  मुझको देना ।
किसी का न दिल दिखाऊ, सच्चा विचार देना। ।

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मुहब्बत का पैगाम

          मुहब्बत का पैग़ाम 

          माना कि तुमसे मेरा 
          खून का रिश्ता नहीं 
           पर अहसास से तो
            जुड़े  हुये  हैं  हम 
             तेरी झिड़की पर 
           मेरा शांत  हो जाना 
            मेरी नाराजगी पर 
         तेरा खामोश हो जाना 
    असली मुहब्बत को दर्शाता है 
  क्योंकि रिश्ते को निभाने के लिए 
     शब्द नहीं,नीयत होनी चाहिए 
          एक-दूसरे के दर्द को 
         जज्बा को जज्बातों को 
                 समझना ही 
           मुहब्बत का पैगाम है 
       उन दोनों की शादी हो गई 
            इस समाचार से ही 
          विवाह संपन्न नहीं होता 
       जरूरत होती है एक-दूसरे के 
       अंतर्मन को जानने-समझने  
            और सहयोग देने की 

              सुजाता प्रिय समृद्धि

Tuesday, January 27, 2026

सपने

सपने 
                
                कभी 
             लड़कपन में 
        हमने जो देखे सपने 
   काश!अभी वे हो जाते अपने 
ऊँची उड़ान भरते हम भी नभ में 
  खेल तारों संग आँख-मिचौनी 
     फिर चढ़ कर चाँद के ऊपर 
         सारे जग की सैर कर
           आ लौट अपने घर 
              दादी- दादा को 
                हाल सुनाऊँ
                    चंदा 
                  तारे की 
                बात बताऊँ 
           नभ में कैसे वे रहते हैं 
       रात को कैसे चमका करते हैं 
            सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Monday, January 26, 2026

१ दहेज ।9

जय मांँ शारदे 🙏🙏 💐💐
जय श्री गणेश 🙏🙏💐💐

दहेज (१)

वहाँ से खिसक गये। लड़कियों को बुलाकर वे अपनी बस में चढ़ाने लगे।मयंक ने देखा तो पागलों की भांति एक बार फिर अपनी सारी शक्ति संचित कर स्वयं को मुक्त कर लिया और उनकी तरफ लपका। लेकिन फिर उसे लोगों ने जकड़ लिया।वह उनकी बाहों से छुटने का जी तोड़ प्रयास कर रहा था।
इसी उपक्रम में उसकी नजरें छत पर चली गई जहांँ मुंडेर से झांकता उसे निरमा का सिर दिखा। क्या निरमा छत पर अकेली है ? उसकी छठी इंद्री उसे कुछ संकेत दे रही थी।एक बार फिर वह जोर लगाकर छुट गया और दौड़ कर सीढियांँ चढ़ने लगा।जब वह छत पर पहुंचा तो देखा निरमा छत की मुंडेर के निकट खड़ी है।वह धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ने लगा।पर निरमा को उसके आगमन का एहसास तक नहीं हुआ था। उसने अपनी दोनों हथेलियांँ रेलिंग पर टिकाए और पैर उचकाकर रेलिंग पर चढ़ गई और फिर नीचे कूदने हेतु छलांग लगा दिए।
पर ,यह क्या ? वह कूद नहीं पाई सिर्फ लड़खड़ा कर रेलिंग पर ही अटक गई। रेलिंग की रगड़ से उसके वदन में कहीं-कहीं खरोंच भी लग गये।पर उसका उसे कोई परवाह नहीं।उसे लगा उसकी चुनरी किसी चीज में फँस गयी है। उसने हाथ बढ़ाकर उसे छुड़ाना चाहा पर उसका हाथ भी किसी ने थाम लिया।वह हड़बड़ा कर पीछे पलटी।देखा मयंक उसे हाथ पकड़कर खींच रहा था।
छोड़ दो मुझे मयंक उसने रोते हुए कहा।
मयंक बिना कुछ कहे उसे रेलिंग से नीचे उतार लिया था।
उसके चेहरे से कठोरता लुप्त हो गई और वहाँ बेचारगी का साम्राज्य स्थापित हो गया।
उसी समय बारात की बस और कारें स्टार्ट हुईं और सड़क पर चल दी। मयंक को ऐसा लगा वह गाड़ियांँ उसके सीने पर चल रही हैं।
छोड़ो मुझे मयंक !अब मैं जीकर क्या करूंगी ? निरमा बेचैनी भरे स्वर में बोल उठी।उसकी आँखों में आंँसुओं की मोटी परत थरथरा रही थी।सीसे -पारदर्शी उन आँसू- परत के पीछे निरमा की आँखों की सफेदी सुर्खी  में बदली नजर आ रही थी।
ठहरो निरमा!इन आँसुओं को गिराकर बर्बाद मत करना। मयंक तड़प कर बोल उठा।
अब किस दिन के लिए जमा करके रखने क हते हो आशु को ?
 मैं मयंक के लहू-लुहान दिल पर जोरदार गुस्सा पड़ा। निरमा की बोली से उसका समूचा वजूद थर्रा उठा। उसे याद आया शादी ठीक होने के बाद निरमा किसी बात पर रो पड़ी थी तो वह उसे चिढ़ाते हुए बोला था रो-रो कर आंसुओं को बर्बाद मत करो निरमा ? कहीं यह आसु बिल्कुल खत्म हो गया सो बिदाई के समय रोओगी भी नहीं ।
और निरमा भी अपने लजीले स्वभाव के विपरित बोल उठी थी- हंसने लगूंगी और क्या।
 मयंक पहले तो मुँह बनाया था फिर बोला यह भी ठीक ही रहेगा। अन्य लड़कियों से निराली रहेगी तुम्हारी विदाई ।
और निरमा खिलखिला कर हंस पड़ी थी ।
लेकिन मयंक की पैनी निगाहों ने उसकी आंखों की कोरों में छलकाए आंसुओं को भी देख लिया था ।लेकिन आज समय आने पर निरमा वह सुख के आंसू नहीं गिरा सकी। उसका दिल सिसक उठा । निरमा के ये आंसू कार की सीट पर गिरने चाहिए थे और गिर रहा है छत पर ।हिम्मत से काम लो निरमा! वह अपने आप इस प्रकार बुदबुदा उठा जैसे खुद को तसल्ली दे रहा हो।
 अब कहांँ से हिम्मत लाऊँ ? जबकि सारा हिम्मत जवाब दे गया निरमा सिसकती हुई बोली।अब तो मुझे मर जाने में ही भलाई है ।अच्छा हुआ जो चाचा नहीं रहे ।नहीं तो वह सहन नहीं कर पाते यह सब ।मुझे भी उन्हीं के पास जाना है। नहीं निरमा! तुम्हारे मर जाने से उन कुत्तों के सेहत में कोई गिरावट नहीं आने वाली ।तुम्हारे जैसे हजारों निरमा होने इस धरती पर अपने प्राण त्यागे हैं। पर इन दहेज लोभियों के जबड़े फैलते ही चले गए। उन निरमाओं की मृत्यु के साथ ही इन दानवों की काली करतूतें भी दफन होकर रह गई ।और तुम मर कर इनकी कृत्य को दफना दोगी। अब तुम एक नया अवतार लेकर इन असमाजिक तत्वों का नाश करोगी । इन्हें सबक सिखाओ कि इस दहेज- सागर में गोते लगाने का अंजाम कितना भयानक हो सकता है।इस दहेज- सागर में कितने बड़े-बड़े जीव अपना विशाल जबड़ा फैला कर घात लगाए हुए हैं। जो किसी भी क्षण अपने जबड़े मैं दबोचकर उसका नामोनिशान तक मिटा सकते हैं । निरमा पर उसकी बातों का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। उसकी मुठियां भींच गई थी और चेहरे पर ऐसी दृढता उत्पन्न हो गई थी जैसे वह दुनिया की किसी भी बड़ी से बड़ी शक्ति से टकराने का इरादा बना ली हो। उसने स्वीकारात्मक ढंग से धीरे से सिर हिलाया।ही मयंक उसका हाथ थाम कर सीढियों की तरफ बढ़ गया । अगले ही कुछ मिनटों में दोनों नीचे बारात लौटने से शोकाकुल लोगों को समझा कर ढांढस बंधा रहे थे।

दो ही छन्द

दो ही  छन्द 
15,11 पर यति 
मेरे मन की य़ह कामना,पूर्ण करो  भगवान। 
जो लगती अच्छी भावना,उनका रख दो मान।।
हम सब बालक नादान हैं, समझ न पाते बात। 
भाई-बंधु और मeet से, लड़ते हैं दिन-रात।।
छल व कपट जो सदा करे,उसपर कर विश्वास। 
अपने लोगों को दूर कर, बनते उनके दास। ।
मेरे दिल में शुभ प्रेम का,भर दो नव प्रकाश। ।
निश्छल प्रेम दो मुझे, लेकर आई आस।।
हम दिनों के तुम नाथ हो, हरो हमारी पीर। 
आए जो संकट की घड़ी, मन में रखूँ धीर। ।
आपके चरण में हम प्रभो,झुका रहे हैं माथ।
अब जीवन आप smvariye ,दुःख हर दीनानाथ। ।

Friday, January 16, 2026

शीशा

1.    शीशा 
                        हम 
                    शीशे को 
              लाख साफ कर लें 
              चेहरे पर नकाब है 
         तो खुद को पहचान पाना 
                भी मुश्किल है 
                    इसलिए 
               शीशे को साफ 
               करने से पहले  
              चेहरे साफ रखो 
                    क्योंकि 
           हमारा  प्यारा   शीशा 
           जितना  साफ   होगा 
           चेहरे  के   धब्बों  को  
           उतनी ही बारीकी  से                                         
           सभी  को  दिखाएगा 
           हमारे होठों की वाणी
           हमारे चेहरे  के भाव
           आँखों की  दृष्टि   ही 
           हमारे प्यारे चेहरे की 
          अनमोल  सुंदरता  है

           सुजाता प्रिय समृद्धि