Thursday, July 30, 2026

शिव जी हैं देव खास

शिव हैं देव खास (घनाक्षरी )

आया है सावन मास
   शिव जी हैं देव खास 
      रख  मन में उल्लास 
         पूजा   पाठ    करिए।

देवों के  हैं  देव खास
   पूरी  करते   हैं  आस
      जाकर शम्भू के पास 
         कामना  तो   करिए। 

नहीं  करें  जी उदास 
   हृदय  रख   विश्वास 
      कर  ध्यान-उपवास 
        जप-तप     करिए। 

आस लिए जाए पास 
   दैत्य-मनुज -  पिशाच 
      हरते  सभी  के  त्रास
         नमन    भी    करिए।

            सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Wednesday, July 29, 2026

गुरु वंदना

गुरु वंदना

प्रातः उठकर कीजिए,गुरुवर को प्रणाम।
गुरु के चरणों में सदा,बसता गुण का धाम।।

पाकर गुरु-आशीष हम,पाते मन को चैन।
उनके ज्ञान उजास से,खुलता सबका नैन।।

गुरु ही देते हैं सदा,विद्या-बुद्धि व ज्ञान। 
उनसे ही हम सीखते,साहित्य व विज्ञान ।।

हम माटी की लोय हैं,गुरूजी हैं कुम्हार। 
गढ़ते हमको चाक पर, देते हैं आकार। ।

गुरु-ज्ञान ही आज है,जीवन का आधार।
ज्ञान की नाव चढ़ लगे,सबका जीवन पार।।

गुरुजी को ही याद कर,करें प्रारंभ काज।
सफल सदा ही आप हों,सुख से रहे समाज।।

नमन करें कर जोड़ कर,रख मन में सम्मान।
आरंभ करें काम तो,करिए गुरु का ध्यान।।
           सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

गुरु वंदना

गुरु वंदना

प्रातः उठकर कीजिए,गुरुवर को प्रणाम।
गुरु के चरणों में सदा,बसता गुण का धाम।।

पाकर गुरु-आशीष हम,पाते मन को चैन।
उनके ज्ञान उजास से,खुलता सबका नैन।।

गुरु ही देते हैं सदा,विद्या-बुद्धि व ज्ञान। 
उनसे ही हम सीखते,साहित्य व विज्ञान ।।

हम माटी की लोय हैं,गुरूजी हैं कुम्हार। 
गढ़ते हमको चाक पर, देते हैं आकार। ।

गुरु-ज्ञान ही आज है,जीवन का आधार।
ज्ञान की नाव चढ़ लगे,सबका जीवन पार।।

गुरुजी को ही याद कर,करें प्रारंभ काज।
सफल सदा ही आप हों,सुख से रहे समाज।।

नमन करें कर जोड़ कर,रख मन में सम्मान।
आरंभ करें काम तो,करिए गुरु का ध्यान।।
           सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Tuesday, July 28, 2026

सुनो जी साँवरिया

सुनो जी साँवरिया 
 
गर्मी के मारे मैं परेशान होकर,
सज-धज होठ लिपस्टिक पोतकर,
जब घूमने आयी बजरिया।
सुनो जी..................
सज-धज कर जब घूमने आई।
थैला और बटुआ हाथ  में लाई।
लेकिन लेने को भूली छतरिया।
सुनो जी..................
झम-झम,झमाझम पानी बरसे।
गड़-गड़,गड़-गड़ बादल गरजे।
मुझे सूझे न कोई डगरिया।
सुनो जी............
चुनरी भी भींगी,चोली भी भींगी।
केश के लट संग चोटी भी भींगी।
और संग में भींगी अचरिया।
सुनो जी................
चेहरा के सारा श्रृंगार को धोया।
होठ के सारी लाली भी धोया।
अंखिया के धोया कजरिया।
सुनो जी.................
    सुजाता प्रिय समृद्धि

Friday, July 24, 2026

आयी सुंदर भोर

,       आयी सुन्दर भोर 

           उठ  भाई अब 
           आलस्य त्याग 
           मिटा   मन  के
           सारे   अवसाद 
      आयी देखो सुंदर भोर
   सूर्य-किरण फैली चहुँ ओर 
  सभी जीव का मन विहसता
 खुशियों से तन - मन हुलसता
  उड़ी चिरैया भर मन उल्लास
    चहक कर करती परिहास
       खुश करती मन उदास

Sunday, July 19, 2026

मेरे शिवजी का रूप है निराला

मेरे शिवजी का रूप है निराला

मेरे शिवजी का रूप है निराला।
फिर भी भोला हैं जग रखवाला।

सब देव के सिर में सोने का मुकुट,
मेरे  शिव जी  का जटा  चंदावाला
फिर भी भोला हैं.................

सब देव के गले में सोना के हार,
मेरे शिवजी को है साँप के माला।
फिर भी भोला हैं...................

सब देवन के अंग में साल -दुशाला,
मेरे शिवजी को है बाघ की छाला।
फिर भी भोला हैं....................

सब देव खाते हैं फल-मेवा, मिठाई,
मेरे शिव खाते हैं भांग का गोला।

सब देव पीते अमृत और सोमरस,
मेरे शिव पीते हैं विष का प्याला।
फिर भी भोला हैं.....................

सब देव बजाते मृदंग-शंख-वीणा,
मेरे शिव-शंकरजी हैं डमरू वाला।
फिर भी भोला हैं.....................
       
सब देवों की हाथी-घोड़ा सवारी,
मेरे शिव-शंकर तो है बैल वाला।
फिर भी भोला हैं.....................

सब देव को है महल कोठा-अटारी,
मेरे शिवजी को मैड़ैया न ताला।
फिर भी भोला हैं.....................

सब देव करते हैं स्वर्ग में विचरण,
मेरे शिवजी घुमते जग में मतवाला।
फिर भी भोला हैं......................
           सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Saturday, July 4, 2026

आपका आसरा (प्रज्ञा छंद )

आपका आसरा (प्रज्ञा छंद)

आपका आसरा,मातु मन में बसा।
आपके पास आ,आज मन है हंसा।

माँ कभी आपसे,लोग जो माँगते।
आप देती उसे,लोग जो चाहते।
दूर करती सदा,लोग की दुर्दशा।
आपके पास आ..........
आपके प्यार में, भक्त पागल सभी।
आपकी आस है,आज कायल सभी।
कष्ट हरणी अभी, फेर मेरी दसा।
आपके पास आ.........
आपसे माँगती, आज मन की खुशी।
आस पूरी करो,जो हृदय में बसी।
पाँच मेरा अभी कीच  में है फंसा।
आपके पास आ........
माँ तुझे है पता, माँगते जो सभी।
कामना पूर्ण कर,चाहता मन अभी।
आपके प्यार का मातु है लालसा।
         सुजाता प्रिय 'समृद्धि'