तुम चुप मत रहना
हे स्त्री ! तुम चुप मत रहना।
सीखो अब इतिहास बदलना।
हे स्त्री! तुम ..............
अगर सदा तुम रहोगी मौन।
दर्द हिया -का सुनेगा कौन।
पीड़ा अपनी सबको कहना।
हे स्त्री! तुम,.............
निज हृदय में लाओ शक्ति।
मत करना दुष्टों की भक्ति।
अन्याय कभी मत तुम सहना।
हे स्त्री ! तुम...................
ख़ामोशी तुमको जब सताए।
तेरे मन के टुकड़े कर जाए।
यूँ टूटकर तुम नहीं बिखरना।
हे स्त्री! तुम,.............
सच्चाई को तुम नहीं छुपाओ।
मक्कारी से भी मत घबराओ।
सीखो तुम भी सदा निखरना।
हे स्त्री ! तुम...............
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'