Tuesday, June 16, 2026

आपका आसरा (प्रज्ञा छंद)

मापनी -212212,212212

आपका आसरा,मातु मन में बसा।
आपके पास आ,आज मन है हंसा।

मान् कभी आपसे,लोग जो मान्गते।
आप देती उसे,लोग जो चाहते।
दूर करती सदा,लोग की दुर्दशा।
आपके पास आ..........
आपके प्यार में, भक्त पागल सभी।
आपकी आस है,आज कायल सभी।
कष्ट हरनी अभी, फेर मेरी दसा।
आपके पास आ.........
आपसे माँगती, आज मन की खुशी।
आस पूरी करो,जो हृदय में बसी।
पाव मेरा अभी कीच  में है फंसा।
आपके पास आ........
मा तुझे क्या पता,भी।
कामना पूर्ण हो,चाहता मन अभी।
आपके प्यार का मातु है लालसा।
         सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

मन का मैल

मन में  मैल भरा है तेरे
लोभ-मोह है तुझको घेरे
दुखी-विकल तू सान्झ -सबेरे

झूठ, छल औ कलुष मिटाकर,
मन-मंदिर को कर ले साफ।
निर्मल मन का दीप जलाकर,
दूर करो उर के संताप। 
कर तुम मन से दूर अन्धेरे।
मन में.........................

जैसी करनी,वैसी भरनी,
इस जग का है सत्य अटल।
बुरे कर्म का सदा बुरा फल,
आज नहीं तो होता कल।
काहे जग से मुखड़ा फेरे
मन में................


Sunday, June 14, 2026

मदारी (बाल गीत)

मदारी (बाल  गीत  )

अगङम-बगङम बम्बे बोल।जोर-जोर  से बाजे ढोल।।
झूमोन् नाचो घूमो गोल।भारत माता की जय बोल।।
अगङम......
एक मदरी आया,साथ में भालू लाया।
डमरू खूब बजाया,भालू को नचाया।
नाच भालू नाच,नाच-नाच रे नाच। 
दाग दुदादु दुल्लू-दुल्लू,करता ठक-ठक-ठक भालू।
झाग झुझालु झुल्लु-झुल्लू,नाचेन् हम सब और भालू।
नाच भालू नाच, नाच-नाच रे नाच। 

अगङम-बगङम बम्बे बोल, जोर जोर...........
झूमो-नाचो घूमो गोल भारत..............

एक बंदरिया आई,छम-छम नाच दिखाई। 
घूंघट में शरमाई, मंद-मंद मुसकाई।
बंदर ने मारा डण्डा, बिगड गया सारा फण्डा।
गई बंदरिया रूठ,रोई फूट-फूट 2
बंदर ने अपने पकड़ कान,बंदरिया क्यूँ जाती जल्दी मान। 
तब बंदर ने जोङे हाथ, गुस्ताखी मेरी कर दो माफ।
चल बंदरिया चल, साथ मेरे घर चल।
अगङम-बगडम बम्बे बोल...........
                सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Saturday, June 13, 2026

श्रीकृष्ण के आठ प्रतीक

श्रीकृष्ण के प्रतीक 

मोर  मुकुट माथ है ।
  वंशी भी तेरे हाथ है।।
      गौ  चराते  वन-घुम।
         माखन चुराते  तुम।।
            सुदर्शन  चक्र  रख।
               हाथ पंचजन्य शंख।।
                  गले  वैजयंती माल।
                   गीता सुनाते कमाल।।

                        सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, May 31, 2026

गोदना (बाल नाटिका )

गोदना (बाल नाटीका )

स्वतंत्रता सेनानियों का काफिला अंग्रेजों के खिलाफ नारा लगाते हुए। 
"भारत माता की जय" 
"अंग्रेजों भारत छोड़ो"
एक बूढ़ी माता आती दिखाई पडती है।उन्हें देख कर स्वतंत्रा सेनानी -
पाव लागून् बूढ़ी माई !
बूढ़ी माई-जुग जुग 

मुक्तक

जब देखती तो साफ दिखती हैं।
मुस्कुराती - बेबाक  दिखती  हैं।
आप आई नहीं  महफिल में पर-
हर  तस्वीर  में आप दिखती  हैं। 
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        सुजाता प्रिय 'समृद्घि'

Monday, May 25, 2026

अपमान (रोला छंद )

अपमान (रोला छंद)

मत कर तू अपमान,किसी का सुन ले भाई।
कर सबका सम्मान, इसी  में   है  चतुराई।।

जिनका हो अपमान, सदा मन उनका रोता।
दिल ही नहीं दिमाग, सदा है आहत होता।।

अपमान जहाँ हो जाय,दुःख है आता मन पर।
उनके दिल की हाय,अहो लगती जीवन भर।।

हरदम रखना ध्यान, न अपमान किसी का हो।
न सम्मान  का दान, कभी  भी फीका हो।।

थोड़ा  कर  लो  मान, मन प्रफुल्लित होगा।
तेरा भी तो आज , चित  प्रसन्नचित्त  होगा।

जो करता है मान, वही  होता  है  राजा।
वही  सभा  में  बैठ, बनता है महाराजा।।

मन्थन कर लो मीत,कहाँ मन आहत होता।
फिर उसका मन जीत,हिया मर्माहत होता।

हरदम रखो ध्यान, कभी यहाँ  दिल न  टूटे।
इतना भी लो जान,किसी का हक ना लूटे।

            सुजाता प्रिय 'समृद्धि'