स्वागत गान
झारखंड की पावन धरती पर आपका स्वागत वंदन।
वार्षिकोत्सव में जो लोग पधारे,उन सबका अभिनंदन है।।
वीर भूमि यह बिरसा की है,इस पर है अभिमान हमें।
वीर पुत्र के रूप मिला है,कलियुग का भगवान हमें।
सिद्धू-कान्हू का पुन्य भूमि यह,इसका माटी चंदन है।
वार्षिकोत्सव में जो लोग.........
युग-युग से होता आया है,साहित्य का सम्मान यहाँ।
बच्चा-बच्चा भी करता है,कलम वीरों का गुणगान यहाँ।
हर कवयित्री यहाँ की सीता जैसी,हर कवि रघुनन्दन है।
वार्षिकोत्सव में..............
अहोभाग्य हमारा है जो,आप यहाँ पर आये हैं।
स्वयं रचकर प्यारी मनमोहक,कविताओं को लाये हैं।
छंद बद्ध कविताएँ लिखना,यहाँ न कोई बंधन है।
वार्षिकोत्सव में................
धन्य हुई यह धरा हमारी,कलाकारों के आने से।
दिशा- दिशा अब गूँज रही है,कविताओं के गाने से।
कवि- मणियो से समृद्घ भारत,रत्न-जड़ित यहाँ कुन्दन है।
वार्षिकोत्सव..............
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'
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