Tuesday, January 23, 2024

राम जन्म

जनम लिए रघुराई,अवध में बजती  बधाई।
शुभ-दिन,शुभ-घड़ी आयी,अवध में.......
राम जी जनमें,लखनजी जनमे
भरत-शत्रुघ्न भाई।
अवध में...........
पिता दशरथ का मन है हर्षित,
पुलकित है तीनों माई।
अवध में बजती......
धन्य धन्य भाग्य है राजा दशरथ के।
जीवन है सुखदायी।
अवध में बजती..........
भारतवर्ष की पुण्यभूमि यह,
चहुँ दिशी खुशियाँ है छाई,
अवध में बजती.............
        सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Friday, January 19, 2024

राम नाम भजन

राम नाम भजन

नाम जपो श्री राम का।
अयोध्या पावन धाम का।
दो आखर का मनका है यह,
बना प्रभु के नाम का।
नाम जपो श्रीराम का.........
पुण्य भूमि यह भारत की है,राम यहांँ अवतार लिये।
हर जीव का पालक बनकर,हर जीव से प्यार किये।
राम नाम न जपे अगर तो२,जीवन यह किस काम का।
नाम जपो श्रीराम का .........
नर रूप को धारण करके,भक्तों का उद्धार किये।
धनुष बाण चलाकर प्रभुजी,दुष्टों का संहार किये।
राम नाम का मनका गुथकर२,नाम जपो श्रीराम का।
नाम जपो श्रीराम का............
अपने दिनचर्या में भाई,राम नाम का पाठ करो।
रात शयन करने से पहले,राम नाम को याद करो।
राम नाम प्रभाती बन्धु२,राम भजन है शाम का।
नाम जपो श्रीराम का..........
राम को ही आदर्श बनाकर,जीवन का सब काज करो।
राम के जैसे पुरुषोत्तम बन, असहायों का कष्ट हरो।
राम बिना यह व्यर्थ तनु है२,बस अस्थि और चाम का।
नाम जपो श्रीराम का............
     सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Thursday, January 11, 2024

निर्मल मन (दोहा )

दोहा 

ईर्ष्या-द्वेष-क्रोध का,करते जाओ त्याग।
असंतोष व लालच का,सदा कर परित्याग।।

दुख का कारण यह सभी,मन से इसको छोड़।
अगर सामने यह दिखे,इससे मुखड़ा मोड़।।

निरोग काया हो जहाँ,सुंदर शील- स्वभाव।
सभी प्राणियों के लिए,मन में हो समभाव।।

बस वाणी की मधुरता,मन को लेती जीत।
मन को दे यह सुख सदा,आपस में हो प्रीत।

मानव मानवता सदा, करना अंगीकार।
माया कभी न त्यागना, रखना उच्च विचार।।

सबका करते जो भला,पाते सुख की छाँव।
बुराई करने जो कभी, कहीं न पाते ठांव।

तन को निरोग चाहते,मन को रखिए स्वस्थ।
तन तो होता है सदा, निर्मल मन से स्वस्थ।।
        सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Wednesday, January 10, 2024

नववर्ष (सवैया)



नववर्ष (सवैया छंद)

आगत का सब स्वागत ले कर,
         आज सभी खुश होकर भाई।
मान अभी अपने मन में सब,
           बीत गया अब ले अंगड़ाई।
वर्ष नवीन अभी फिर सुंदर,
           वर्ष यही अब हो सुखदायी।
ईश मना सब शीश झुकाकर,
           मांँग सभी मन से वर भाई।

मास बिता कर जो तुम बारह,
             आगत वर्ष रखें पग प्यारे।
कर्म करो सब नेक तभी यह,
               वर्ष हमार रहे सब न्यारे।
नेक करो जब काम सभी तब,
              साथ रहे सुर पांव पसारे।
कर्म सभी चित में रखते तब,
           ही खुश हैं भगवान हमारे।।
      सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, January 7, 2024

स्वीकार (लघुकथा)

स्वीकार (लघुकथा)

आने वाले शाम को सलाम..
जाने वाले शाम को सलाम..
    के धुन पर परिवार के सभी लोग झूम रहे थे।तभी बहू ने पेट पकड़ते हुए अपने कमरे की ओर कदम बढ़ाया।सभी के पांव थम गये।
बहू के चेहरे पर पीड़ा के भाव देख लक्ष्मी देवी को समझते देर नहीं लगी कि नववर्ष में परिवार के नये सदस्य का शुभागमन होने वाला है।समय पूर्ण हो चुका है। खुशी के मारे उसके कमरे की ओर चल पड़ी।हाल जान तुरंत एंबुलेंस बुलाने का आदेश दिया और नर्सिंग होम जाने की तैयारी करने लगी।
अस्पताल में बहू को जैसे ही प्रसुति-कक्ष में ले जाया गया, उन्होंने अपने हाथ जोड़त कर ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा -"अबकी बहू के गोद में बेटा दे दो,तो बड़ी कृपा होगी।
बहुत आस लगाए बैठी हूँ।पोती के साथ खेलने वाला एक भाई आ जाए यही कामना है।"
केशव जी ने आगे बढ़कर कहा-"पहले तुम बहू को सम्हालो राघव की माँ ! भगवान का भेजा हुआ जो आ रहा है उसे हृदय से स्वागत और स्वीकार करो।पोता-पोती सब बराबर है।हमारी पोती को भाई हो या बहन, उसके साथ खेलने वाला तो होगा ही।"
   उसी समय नवजात शिशु के रोने की आवाज सुनाई दी।नर्स ने आते हुए कहा -"आज एक जनवरी को एक बजकर एक मिनट में मुन्नी की बहन नन्हीं आई है।"
मुन्नी तो कुछ समझ नहीं पायी। परिवार के सभी लोग फिर से एक बार खुशी से झूम उठे।
            सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Thursday, January 4, 2024

तमाचा (लघुकथा)

तमाचा (लघुकथा)

कार्यालय जाने के लिए जैसे ही रणधीर ने मेन रोड में अपनी बाइक घुमाई सामने से आती महिला ने पूछा-"यहाँ पर रंगोली होटल किधर है ?"
"यहाँ से थोड़ा आगे है।"कहते हुए वह बढ़ गया ।
लेकिन आगे बढ़ते ही वह रुक गया। पीछे मुड़कर देखा। महिला पैदल ही बढ़ी आ रही थी।निकट आते ही उसने महिला से कहा -चलिए मैडम! मैं आपको छोड़ दूंँगा,उधर ही जा रहा हूंँ।" 
 महिला खुश होती हुई बाइक की पिछली सीट पर बैठ गयी।
उस सुंदर महिला को अपने साथ बैठा देख रणधीर के मन का शैतान जाग उठा।वह बार-बार बाइक को झटके दे रहा था जिसके कारण महिला के अंग उसकी पीठ से स्पर्श करता और उसे क्षणिक सुख की अनुभूति होती।
कुछ ही मिनटों में तेज झटके के साथ बाइक रोकते हुए कहा -"लिजिए मैडम आप पहुंच गई रंगोली होटल।" लेकिन इस बार के झटके में उसे वह स्पर्श -सुख की प्राप्ति नहीं हुई क्योंकि महिला ने अपना पर्स उसके और अपने मध्य कर लिया था। महिला हौले-से बाइक से उतर गयी।उसने एक बार सुंदरी के मनोभावों को पढ़ने हेतु उसके सुंदर मुखड़े पर नजरें टिका दी। महिला चेहरे पर कृतज्ञता के भाव लिए भोलेपन से बोली-"बहुत-बहुत धन्यवाद भैया ! आपने मुझे पहुंचा दिया।आज आटो-स्ट्राइक होने से मुझे पैदल ही आना पड़ता,और मेरी ऑफिस की जरूरी मीटिंग में मैं लेट हो जाती।"
उसके चेहरे के निर्मल भाव एवं अपने लिए '
भाई' का संबोधन सुन वह अपनी कुत्सित मानसिकता और क्षुद्र व्यवहार पर पाश्चाताप से गड़ा जा रहा था। उससे नजरें चुराता हुआ बाइक आगे बढ़ा दी ।
        सुजाता प्रिय 'समृद्धि'