Sunday, May 17, 2026

मैं

मैं                   मैं 
                  स्त्री हूँ 
             तो क्या हुआ 
        मेरा कोई वजूद नहीं 
    मेरे मन में कोई इच्छा नहीं 
  चुप रहती हूँ ! पर गूंगी  नहीं हूँ 
    यह तो मेरा  एक तरीका है 
      माहौल शान्त रखने का 
       नहीं चाहती हूँ विषाद 
        इसीलिए उदासी पर 
    परदा डाल मुस्करा देती हूँ 
दिल के अन्दर कितनी भावनाएँ 
 हिलोरे लेती हैं तूफ़ान की तरह 
   पर उसे बेरहमी से दवाकर
        शान्त कराती देती हूँ
  
         सुजाता प्रिय 'समृद्घि'

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