Wednesday, June 17, 2026

चलिए मुस्कुराते हैं

चलिए मुस्कुराते हैं (जलहरण घणाक्षरी)
सातवा ओर आठवाँ वर्ण गुरू

चलिए मुस्कुराते हैं। 
गीत गुनगुनाते हैं।
सभी प्यारी सखियों को 
पास हम बुलाते हैं। 

हँसते औ हँसाते हैं।
सुनते औ सुनाते हैं।
रोजमर्रे की बात को,
सखियों को बताते हैं।

घूमते व घूमाते हैं। 
दिल को बहलाते हैं 
ठेले के निकट चल-
आ चटपटा खाते हैं ।

रूठे को भी मनाते हैं ।
दिल में भी  बसाते हैं ।
आस- पास  बैठकर,
प्रीत हम  बढाते  हैं ।

सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Tuesday, June 16, 2026

मन का मैल

मन में  मैल भरा है तेरे
लोभ-मोह है तुझको घेरे
दुखी-विकल तू सान्झ -सबेरे

झूठ, छल औ कलुष मिटाकर,
मन-मंदिर को कर ले साफ।
निर्मल मन का दीप जलाकर,
दूर करो उर के संताप। 
कर तुम मन से दूर अन्धेरे।
मन में.........................

जैसी करनी,वैसी भरनी,
इस जग का है सत्य अटल।
बुरे कर्म का सदा बुरा फल,
आज नहीं तो होता कल।
काहे जग से मुखड़ा फेरे
मन में................


Sunday, June 14, 2026

मदारी (बाल गीत)

मदारी (बाल  गीत  )

अगङम-बगङम बम्बे बोल।जोर-जोर  से बाजे ढोल।।
झूमोन् नाचो घूमो गोल।भारत माता की जय बोल।।
अगङम......
एक मदरी आया,साथ में भालू लाया।
डमरू खूब बजाया,भालू को नचाया।
नाच भालू नाच,नाच-नाच रे नाच। 
दाग दुदादु दुल्लू-दुल्लू,करता ठक-ठक-ठक भालू।
झाग झुझालु झुल्लु-झुल्लू,नाचेन् हम सब और भालू।
नाच भालू नाच, नाच-नाच रे नाच। 

अगङम-बगङम बम्बे बोल, जोर जोर...........
झूमो-नाचो घूमो गोल भारत..............

एक बंदरिया आई,छम-छम नाच दिखाई। 
घूंघट में शरमाई, मंद-मंद मुसकाई।
बंदर ने मारा डण्डा, बिगड गया सारा फण्डा।
गई बंदरिया रूठ,रोई फूट-फूट 2
बंदर ने अपने पकड़ कान,बंदरिया क्यूँ जाती जल्दी मान। 
तब बंदर ने जोङे हाथ, गुस्ताखी मेरी कर दो माफ।
चल बंदरिया चल, साथ मेरे घर चल।
अगङम-बगडम बम्बे बोल...........
                सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Saturday, June 13, 2026

श्रीकृष्ण के आठ प्रतीक

श्रीकृष्ण के प्रतीक 

मोर  मुकुट माथ है ।
  वंशी भी तेरे हाथ है।।
      गौ  चराते  वन-घुम।
         माखन चुराते  तुम।।
            सुदर्शन  चक्र  रख।
               हाथ पंचजन्य शंख।।
                  गले  वैजयंती माल।
                   गीता सुनाते कमाल।।

                        सुजाता प्रिय 'समृद्धि'