Monday, May 25, 2026

अपमान (रोला छंद )

अपमान (रोला छंद)

मत कर तू अपमान,किसी का सुन ले भाई।
कर सबका सम्मान, इसी  में   है  चतुराई।।

जिनका हो अपमान, सदा मन उनका रोता।
दिल ही नहीं दिमाग, सदा है आहत होता।।

अपमान जहाँ हो जाय,दुःख है आता मन पर।
उनके दिल की हाय,अहो लगती जीवन भर।।

हरदम रखना ध्यान, न अपमान किसी का हो।
न सम्मान  का दान, कभी  भी फीका हो।।

थोड़ा  कर  लो  मान, मन प्रफुल्लित होगा।
तेरा भी तो आज , चित  प्रसन्नचित्त  होगा।

जो करता है मान, वही  होता  है  राजा।
वही  सभा  में  बैठ, बनता है महाराजा।।

मन्थन कर लो मीत,कहाँ मन आहत होता।
फिर उसका मन जीत,हिया मर्माहत होता।

हरदम रखो ध्यान, कभी यहाँ  दिल न  टूटे।
इतना भी लो जान,किसी का हक ना लूटे।

            सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

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