Monday, December 30, 2024

गुरु जी तुम्हारे चरणों में

गुरु जी तुम्हारे चरणों में 

हम शीश नवाते हैं निश दिन गुरु जी तुम्हारे चरणों में। 
विश्वास है मन में मिलेगा सदा, आशीष तुम्हारे चरणों में।। 
हम शीश झुकाते हैं............... 
यह देश हमारा धन्य हुआ। 
जिसमें तेरा है जन्म हुआ। 
हमें मिलती रहे तेरी दिव्य प्रभा, 
गुरु जी तुम्हारे चरणों में। 
हम शीश झुकाते हैं................ 
विश्व में भारत की शान बनी। 
तुझसे संघ की पहचान बनी। 
हम सब भी सदा बुद्धिमान बने। 
गुरुजी जी तुम्हारे चरणों में। 
हम शीश झुकाते हैं................ 
उन हिन्दुओं को संगठित किये। 
थे धर्म से जो विचलित हुए। 
हम आएं हैं प्रेरित हुए। 
गुरु जी तुम्हारे चरणों में। 
हम शीश झुकाते हैं............... 

 सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

हम बच्चे हैं

हम बच्चे हैं

आप बडे़ हम बच्चे हैं। 
दाँत हमारे कच्चे हैं। 
मन में कोई खोट नहीं, 
हमसब कितने अच्छे हैं। 

भला- बुरा का ज्ञान सीखते, 
मन से भेद मिटाते हैं। 
ऊँच-नीच और जात-पात को, 
कभी न मन में लाते हैं। 
सबको माने एक समान, 
हम सब दिल के सच्चे हैं। 

हाथ जोड़कर, शीश नवाकर, 
नमन आपको करते हैं। 
आप हमें आशीष दीजिए, 
हम-सब आगे बढ़ते हैं। 
कल के कर्णधार बनें हम, 
अभी अक्ल के कच्चे हैं। 

सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, December 29, 2024

बिन पानी सब सून

बिन पानी सब सून

जल संकट आ गया सखी री! घट रहा धरा पर पानी। 
जी भर इसे बर्बाद किये हम, करते आये मनमानी। 
बाल्टी भर पानी से रूमाल धोते, पांच बाल्टी से चादर। 
नल खोल जल खूब बहाये, इसका किया निरादर। 
अलग- अलग बर्तन में खाते, बहुत हाथ धोते थे। 
पानी आया है देख मगन हो, नल चला सोते थे। 
आज देख कुएं सुख रहें हैं, घटे जलाशय के स्तर। 
हैण्डपम्प भी जल विहिन हैं, तालाबों की हालत बदतर। 
नदियाँ बन गयीं सकते नाले, झील बने चारागाह। 
झरनों ने अपने दम तोड़, हाहाकार मचा है राह। 
नहरों का नाम- निशान मिटा है, मिट गया डोभा- पोखर। 
बैल बकरियाँ प्यासे घूमते, दिखता नहीं है आहर। 
जल हीन धरा सिसक रही है, धूल- धुसरित है गंगा। 
चित्कार कर रही मही, जल के कारण होता दंगा। 
मन में चिंतन कर देख सखी री! बिन पानी सब सुन। 
पानी बिन न अन्न उपजेंगे, खिलेंगे नहीं प्रसून। 
पानी का बचत करना ही इस समस्या का हल है। 
जल संचय हम करते जाए, यदि जीना हमें कल है। 
आओ यह संकल्प करें,बचत करना है पानी का। 
बस थोड़ा कंजूसी कर लो,जरुरत नहीं दानी का। 
हम न काटेंगे पेड़ों को, खूब सिरे पेड़ लगाएं। 
जल का स्रोत यही है,बहनों!समझें और समझाएँ। 
          सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Friday, December 27, 2024

छोटा भाई

छोटा भाई
मैं तो राजा राम बनूंंगा, 
            लक्ष्मण होगा छोटा भाई। 
सुख और दुख में साथ-साथ, 
          होंगे भरत शत्रुघ्न से भाई। 
विद्यालय की छोटी कक्षा में, 
              जितने भैया करें पढ़ाई। 
उन सभी से प्यार करूँगा, 
              क्योंकि वे हैं छोटे भाई। 
खेल के मैदान में भी, 
           नहीं करूँगा कभी लड़ाई। 
हम पर भारत गर्व करेगा, 
            जग में होगी खूब बढ़ाई। 
               सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Wednesday, December 25, 2024

कोयल काली

कोयल काली

भूरी-काली पंखों वाली। 
मधुवन की कोयल मतवाली। 
कू-कू करती फिरती आली। 
बोली इसकी बड़ी निराली। 
मन की वेदना हरने वाली। 
फुदक-फुदक कर डाली -डाली। 
फूलों जैसी खुश दिल वाली। 
लगती कितनी भोली - भाली। 
       सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

मैं

मैं            मैं 
             तुम्हें 
           कभी भी 
         बुलंदियों पर 
      चढ़ने  से रोक तो
         नहीं पाता हूंँ
          किन्तु  मुझे 
            सदा यह 
            भय लगा 
             रहता है 
             कि कहीं 
           ऊँची उड़ान 
             भरने हेतु 
            तुम्हारे पर न
        निकल  जाए और 
    तुम मुझे छोड़कर मुझसे 
दूर और बहुत दूर न उड़ जाओ
       सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

नन्हें वीर हम

नन्हें वीर हम

हम भारत के बाल वीर हैं भारत माँ की शान हैं। 
भारत के आखों का तारा,भारत की संतान हैं। 
नन्हें वीर हम! भोले वीर हम! 

भारत अपनी जन्म भूमि है, माँ का मान बढा़एंँगे। 
भारत अपनी पुण्य भूमि है इसका पूण्य बढ़ाएँगे। 
इसकी मिट्टी के कण-कण में हम सोना उपजाएँगे। 
मेहनत और ताकत के बल पर, इसका अलख जगाएँगे। 
हम भारत की नूतन आशा, भारत की पहचान हैं। 
भारत के आँखों का .....................
नन्हें वीर हम! भोले वीर हम! 
भेदभाव का भरम मिटाकर,सत् का ज्योत जलाएंगे। 
धरती पर सबके सपनों का सुंदर नगर बसाएँगे। 
सबको अपने गले लगाकर, जीवन धन्य बनाएंगे। 
एक प्रेम का नाता अपने जीवन में अपनाएँगे। 
मिल-जुल कर हम रहें निरंतर,भारत के अभिमान हैं।
भारत के आँखों का तारा............... 
नन्हें वीर हम!भोले वीर हम। 

सुजाता प्रिय 'समृद्धि'