122,122,122,12
महाकाल तेरा ठिकाना कहाँ।
मुझे भी बुला लो जहाँ हो वहाँ।।
लगा भाल चंदन लगाऊँ तुझे।
खिला भांग गोला मनाऊँ तुझे।
करूँ आरती मैं कपूर जला।
मिटा दो घनेरा टालो बला
अभी पास आई सुनो हे प्रभो।
सभी कष्ट हर लो सुनो हे प्रभो।।
तुझे मैं सुनाऊँ सभी दास्ताँ।
दुखों से पङा है अभी वास्ता।।
झुका सिर चरण में नमन मैं करूँ।
उठा हाथ दोनों विनय मैं करूँ।।
पधारो हमारे हृदय में अभी।
सभी कष्ट हर लो हमारे अभी।।
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