धूर्त
रंग
बदलते
गिरगिट के जैसा
मासूमियत चेहरे पर लाकर
मीठा-जहर घोलते बातों मे बहलाकर
दुःख बाटने का अभिनय करते अपना बनकर
दीमक जैसा खोखला करते, रहना सदा सम्हलकर
बात
मेरी
गाँठ
बांँधो
देतै हैं
पीर घनेरी
सुजाता प्रिय समृद्धि
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