Tuesday, August 11, 2026

हरी-हरी चूड़ियाँ

हरी-हरी चूड़ियाँ 

हाथों में शोभ रही हरी-हरी चूड़ियाँ। 
गोरी कलाई पर भरी-भरी चूड़ियाँ।
लगती है सावन की हरियाली-सी।


जब-जब चूड़ियाँ खन-खन खनकती।
गोरी की पायलिया झन-झन झनकती।
सुर लग रही है बड़ी मतवाली-सी।


माँग में सिन्दूर और होठों पर लाली।
माथे पर बिन्दी ओर कानों में बाली।
कमर लचकाती फूल की डाली-सी।

          सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

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