नटखट मोहन-श्याम
बड़ा नटखट मोहन-श्याम सखी
बड़ा नटखट......
तंग करता आठो याम सखी।
बड़ा नटखट.......
जब पनघट पर मैं जाती हूँ,
मेरे पीछे-पीछे आता है।
झकझोर मेरी मटकी को,
सारे जल को गिराता है।
मटकी लेता थाम सखी
तंग करता........
जब जाती हूँ मैं फुलवारी,
मेरे पीछे-पीछे आता है।
बेली-चमेली की कलियाँ,
तोङ मुझ पर गिराता है।
हर दिन उसका काम सखी,
तंग करता.................
बैठ कदम की डाली पर,
वह वंशी मधुर बजाता है।
बंशी की धुन में राधे-राधे,
कहकर वह मुझे बुलाता है।
करता है मुझे बदनाम सखी
तंग करता....................
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