Saturday, July 24, 2021

गुरु मां



गुरु मां

मां की गोद से उतर हम बच्चे विद्यालय जाते हैं।
मां के रूप में वहां गुरु मां को पाते हैं।

दिन भर गुरु मां हमें, प्यार से हैं सम्हालतीं।
गुरु बन गुण के सांचे में, हमको हैं ढालतीं।
तभी तो घर से बाहर रहकर भी हम ना घबराते हैं।
मां के रूप में वहां .....................
मानवता का पाठ पढ़ाती,दुलार हमें हैं देतीं।
पढ़ा-लिखा, गुणवान बना, संस्कार हमें हैं देतीं।
मार्गदर्शन लक्ष्य पाने का,हम उनसे पाते हैं।
मां के रूप में............. ‌‌
बच्चों पर मां की तरह, प्यार लुटाती हैं।
इसीलिए तो शिक्षिका गुरु मां कहलातीं है।
बच्चे भी आदर करते,और प्यार लुटाते हैं।
मां के रूप में..................
        सुजाता प्रिय समृद्धि

Wednesday, July 21, 2021

बरसात की फुहार में

बरसात की फुहार में (गीतिका छंद)

चल रे साथी हम नहाए, बरसात की फुहार में।
आज तक हम हैं नहाए, इस नदी की धार में।
तन को अपने हम हैं धोते,मन नहीं धोते कभी।
मन को तुम मैला न रखना, बात मानो यह सभी।
मन हमारा साफ हो तो, बात सब प्यारा लगे।
दूर होताी संताप सारा ,जंग हमें न्यारा लगे।
दिल में कोई कपट नहीं हो,जीवन उसी का नाम है।
सबसे तुम मिलाप रखो,यह मेरा पैगाम है।
                 सुजाता प्रिय 'समृद्धि'
                   स्वरचित, मौलिक

करें हम धान की रोपाई



आ सखी शुभ घड़ी आई।
करें हम धान की रोपाई।
खेतबा में झूम-झूम के।

आया नक्षत्र शुभ-शुभ आद्रा।
नभ में छाया था काला बदरा।
किए हम खेत की जोताई।
करें हम धान की रोपाई।
खेतबा में..................

पहली वर्षा में बोया बिचड़ा।
जनम वह मोरी बन निकला।
हरी-हरी खेतों में लहराई।
करें हम धान की रोपाई।
खेतबा में................

झम-झम,झम-झम पानी बरसे।
मनमा हर जन-जन का हरसे।
मन में धरा भी मुस्काई।
करें हम धान की रोपाई।
खेतबा में................
       सुजाता प्रिय 'समृद्धि'
           स्वरचित

Tuesday, July 20, 2021

वो अजनबी ( लघुकथा )



वो अजनबी

रागिनी समय से पूर्व साक्षात्कार के लिए पहुंच गई थी‌। देर ना हो इसलिए भाई ने स्कूटी से पहुंचा दिया था। तीन लोगों के बाद उसका नम्बर आने वाला था।उसने सोचा साक्षात्कार में मांगे गए सारे कागजात एक बार फिर से यथास्थान रख लूं। साथ लाई फाइल को खोला।पर यह क्या? फ़ाइल से सारे कागजात गायब ।उसे पूरी तरह याद है। उसने सारे मूल प्रमाणपत्रों एवं छाया प्रति को इस थैली नुमा फाइल में रखा था। फिर वे गायब कैसे हुए। उसने खाली फाइल को पलटकर देखा। फाइल एक किनारे से फटी थी।उसे समझते देर नहीं लगी कि सारे कागजात इसी ओर से कहीं गिर पड़ा।उसे अपने-आप पर बहुत झुंझलाहट हुई क्यों उसने फटी फाईल की ओर ध्यान नहीं दिया। कहां गिरे होंगे सारे कागजात ? उसके तो प्राण छूटने लगे। 
मिस रागिनी वर्मा ! गार्ड ने उसे पुकारा।
वह रुआंसी हो उसे देखने लगी।
 आपसे कोई मिलने आया है। 
वह बाहर दौड़ पड़ी शायद उसका भाई उसे वापस ले जाने आया। ठीक ही है चली जाएगी।अब यहां उसका काम ही क्या ?
लेकिन जब वह बाहर पहुंची तो एक अजनबी लड़के को साइकिल पकड़े खड़ा देख ठिठक कर बोली क्या है ? 
बहन जी !आपके ये कागजात स्टेशन रोड में गिरे मिले। मैंने देखा इसमें आपका इस संस्थान में आज का साक्षात्कार पत्र भी है सो मैं इसे आप तक पहुंचाने आ गया। रागिनी के मुंह से बोल नहीं फुट रहे थे। 
मिस रागिनी वर्मा !अंदर उसे पुकारा गया ।शायद साक्षात्कार के लिए उसका नम्बर आ गया था। उसने एक कृतज्ञता भरी दृष्टि उस अजनबी पर डाली और साक्षात्कार के लिए चल दी। साक्षात्कार के बाद उसे नौकरी मिली।रोज आंफिस काम करने आने लगी।रोज उसकी निगाहें उस अजनबी को ढूंढती कि एक बार उससे मुलाकात हो जाए। लेकिन वह कहीं नहीं दिखा और रागिनी को आज तक अफसोस है कि उस अजनबी महामानव को कृतज्ञता के रूप में धन्यवाद तक नहीं बोल सकी।
                सुजाता प्रिय 'समृद्धि'
                  स्वरचित, मौलिक

Monday, July 19, 2021

कुंडलियां छंद


विधा-कुण्डलिया छंद

मत कर मानव तू अभिमान।
धरा रह जाएगा यह गुमान।
धन-दौलत का दंभ न करना।
किसी की दौलत मत तू हरना।
मत कर कभी तू झूठी शान ।
भाई रे यह कहना मेरा मान।

अहंकार मत करना तू भाई।
थोड़ी दौलत तूने है कमाई।
किसी को क्या तुम दे पाते हो।
अकड़ क्यूं झूठी दिखलाते हो।
खुद पर अब तू है क्यूं  हैरान।
बहुत है जग में जन धनवान।
            सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, July 18, 2021

हंसने की मनाही है




                  1.
👷‍♂️लड़की के पिता- मेरी बेटी इतनी अच्छी और नेक है कि आपके घर को स्वर्ग बना देगी।

👨‍🔬लड़के के पिता-इसलिए तो मुझे अपने बेटे की शादी आपकी लड़की से नहीं करनी।

👷‍♂️लड़की के पिता-आखिर क्यों  ?

👨‍🔬लड़के के पिता-क्योंकि वह मेरे घर को स्वर्ग बना देगी, और हम सभी स्वर्गवासी हो जाएंगे।😭

                2.
🤷‍♀️भाभी-यहां तो बहुत मच्छर है।
👩‍💼ननद-लेकिन पहले यहां मच्छर नहीं था।
🤷‍♀️भाभी-मैं तो जब से आई हूं तब से यहां ऐसे ही बहुत मच्छर देख रही हूं।
 👩‍💼ननद-वह तो आपके आने पर ही हो गया। उसके पहले नहीं था।
🤷‍♀️भाभी-तो क्या इस घर में इतनी सारी मच्छरदानियां लोग आपलोग से बचने के लिए लाए थे  ?🤣
                 3.
🧑‍🦲भिखारी-दे दाता के नाम तुझको अल्ला रखें।

👨‍🦰दाता-दो रुपए का नोट बढ़ाते हुए, यह लो।

🧑‍🦲भिखारी-भीख मांगने का कटोरा हटाते हुए, ऐ बाबू साहब दो रुपए क्या देते हो? भीखमंगा समझ रखा है क्या ?🤪

                       4.
🧒रघु अपने दोस्त से-क्या बताऊं यार मेरे दादा जी बहुत बलिष्ठ थे। उनके कलेजे का वजन दस किलो ग्राम था।
👦दोस्त-तुम्हारे दादाजी अपना कलेजा रोज तौलते थे क्या?

🧒रघु -वे उसे तौलेंगे क्यों ?

👦दोस्त-फिर तुमलोग को दादाजी के कलेजे का वजन कैसे पता चला ?😍
💐💐💐💐💐💐💐💐💐
          सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Friday, July 16, 2021

महकिया माटी के (मगही भाषा )



कोई भूल न पाबे रेss,महकिया माटी के।
मोर मन भाबे रेss,महकिया माटी के।

सोंधी-सोंधी खुशबू लुटाबे रे माटी।
हमरा के बड़ी मन भावे रे माटी।
मनमा में बसाबूं रेss,महकिया
माटी के।
मोर मन भाबे रेss,.............

सबसे सुनर हमर गांव के माटी।
राज्य के माटी औ देश के माटी।
कहुं न पाबुं रे महकिया माटी के।
मोर मन भाबे रेss,............

खेतबा-पथार में शोभे रे माटी।
अन्न-धन-सोना उगले ये माटी।
खलिहान में भावे रेss,महकिया माटी के
मोर मन भाबे रेss,.............

हमर माटी के है रूप निराली।
बलुआही-चिकनी-गोरी-काली।
सब रंग में भावे रेss, महकिया माटी के।
मोर मन भाबे रेss, ...... .....
      सुजाता प्रिय 'समृद्धि'        
        स्वरचित, मौलिक