जय माँ शारदे🙏🙏जन्मदिन का उपहार गुलाबी फ्राक में सजी संवरी शिखा परियों की शहजादी लग रही थी।पूरा हॉल चमकिले झालरों और रंगीन बल्बों से जगमग कर रहा था।पूरा हॉल मेहमानों से भरा पड़ा था।छोटी-छोटी कुर्सियों पर उसके दोस्त बैठे हैं। बधाई हो बधाई की धुन पर कुछ पैर थिरक रहे थे।शिखा की निगाह बार-बार मुख्य द्वार की ओर उठती और निराश हो इधर-उधर भटक...... टेबल पर केक रखाते ही दादी ने कहा -"जल्दी से केक काटो शिखा सभी मेहमान आ गए! "सभी कहाँ आये दादी माँ! अभी मेरी सहेली सुरुचि.........."मै आ गई! तभी साधारण फ्राक पहनी एक छोटी लड़की ने हॉल में आते हुए कहा।और अपने लाये थैले से एक मिट्टी का गुल्लक निकालकर उसकी ओर बढाते हुए कहा- हैपी बर्थ डे शिखा।"शिखा का चेहरा चमक उठा।"यह तो तुमने बहुत बढिया गिफ्ट दिया। इसमें मैं आज मिले सारे पेसे रखूंगी। ""और इसमें सारे गिफ्ट ""अच्छा यह भी मेरा है।?"हाँ मेरी माँ ने खास तुम्हारे लिए बनाया है।"शिखा ने हंसते हुए कहा-"आज सबसे बढिया गिफ्ट तुम्हारा ही है।क्योंकि तुमने और आंटी ने इन्हें अपने हाथों से बनाया है।"फिर शिखा ने केक काटे और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा हॉल ....... सुजाता प्रिय समृद्धि
एक
बड़ा ही
वजनी पत्थर,
रखा है सीने के ऊपर
पूछो न मुझसे ऐ दोस्तों
कसकें दबीं हुईं हैं
कितनी सारी
इस सिला
तले
सुजाता प्रिय
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