मन रह-रह भटकत मधुवन में
मन रह-रह भटकत मधुवन में।
मोहन के चंचल- चितवन मेें।
मन रह-रह................
बैठ कदम पर वंशी बजाबे।
मधुर-मधुर धुन छेड़ सुनाबे।
मारे हिलोर मम तन-मन में ।
मन रह-रह.............
नंदन वन में धेनु चराबे।
लकुटी उठाकर पीछे धाबे।
छोटे पावों की भटकन में।
मन रह-रह................
यमूना किनारे नाग नचाबे।
नाग नाथ कर वस मे लाबे।
फन चढ थिरकत छण-छण में।
मन रह-रह ..................
गोपिन के संग रास रचाबे।
सहस्र रूप धर सबको भावे।
रूप -अनूप है कण-कण में ।
मन रह-रह..........
सुजाता प्रिय समृद्धि
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