Tuesday, September 8, 2026

मन रह-रह भटकत मधुवन में

मन रह-रह भटकत मधुवन में 

मन रह-रह भटकत मधुवन में। 
मोहन  के  चंचल- चितवन  मेें। 
मन रह-रह................
बैठ  कदम  पर  वंशी  बजाबे।
मधुर-मधुर  धुन  छेड़   सुनाबे।
मारे  हिलोर मम   तन-मन  में ।
मन रह-रह.............
नंदन   वन   में    धेनु    चराबे।
लकुटी  उठाकर  पीछे     धाबे।
छोटे  पावों     की  भटकन  में। 
मन रह-रह................
यमूना    किनारे   नाग   नचाबे।
नाग  नाथ  कर  वस  मे   लाबे।
फन चढ  थिरकत छण-छण में। 
मन रह-रह ..................
गोपिन   के  संग   रास   रचाबे।
सहस्र  रूप  धर  सबको  भावे।
रूप -अनूप  है   कण-कण  में ।
मन रह-रह..........
          सुजाता प्रिय समृद्धि


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