Wednesday, September 9, 2026

हम दो हमारे दो

हम दो हमारे दो

आज अर्चना का मन बड़ा बेचैन....।उसकी माँ की तवियत ज्यादा खराब है। मोहन को छुट्टी नहीं।वह अकेली चली जाती।लेकिन,दोनों बच्चों की परीक्षा ....। उन्हें वह ले भी नहीं जा सकती और छोड़  भी नहीं ....।
मोहन अकेले उन्हें सम्हाल नहीं सकते।
किसके पास उन्हें छोड़कर .......।पिछली बार जब वह खुद बीमार पड़ी थी तो मोहन ने पड़ोस में उन्हें छोड़ दिया था।उन्होंने उन्हें ठीक से खिलाया-पिलाया।किन्तु उनके बच्चों ने उन्हें जाने कैसी-कैसी गंदी हरक्कतें , शैतानियाँ एवं गालियाँ .........।इसीलिए जब मोहन का एक्सीडेण्ट हुआ तो उन्हें घर में ही एक कमरे में बंद कर चली गई ।लेकिन जब वापिस आई तो देखी उतनी देर में उन्होंने कितने सारे सामान तोड़-फोड़ डाले।शरीर में कितनी जगह चोटें लगा ली।आपस में लड़कर एक-दूजे का शारीरिक नुकसान भी....।
     काश!कोई घर में उन्हें देख-भाल करने वाला .....।
पर कोई देख-भाल करने वाला होता कैसे ? 
उसकी अंतरात्मा ने उससे पूछते हुए याद दिलाया। तुम तो किसी को अपने साथ रहने नहीं देती।अभी भी घर से आते वक्त मोहन साथ में अपनी माँ को लाना चाहता था तो तुमने उसेे मना करते हुए कहा था हमारे घर में बस हम दो और..........। कभी भी माँ-पिताजी या कोई परिवार का सदस्य आ गया तुम्हारी तवियत बिगड़ जाती है ,या खाना बनाना भूल जाती हो।पिछली बार पिताजी आए थे तो उन्हें बार-बार मैगी खाने दे देती थी।जबकि तुम्हें पता है कि उन्हें मैंगी नहीं पसंंद।
     "लेकिन उनके रहने पर मुझे अतिरिक्त जिम्मेदारियाँ निभानी पड़ती है।फिर बच्चे उनसे चिपके रहते हैं और समय पर पढ़ाई -लिखाई नहीं कर पाते।"उसने अपने आप से.......।
तो फिर तुम्हारी मदद कोई कैसे कर सकता है ? 
एकल परिवार में रहोगी, तो बच्चों को संयुक्त परिवार की सुरक्षा कैसे .......... ?
              सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

No comments:

Post a Comment