मां का आंचल
जिससे हम पाते शीतल छाया।
जिसमें बसती है ममता माया।
जो ढककर रखती मेरी काया।
जिसका सुगंध है मन को भाया।
वह मेरी मां का आंचल है।
जिसमें हर फूलों की महक है।
जिसमें चांद तारे-सी चमक है।
पायल की घुंघरू-सी छनक है।
हाथों की कंगने की खनक है।
वह मेरी मां का आंचल है।
जो हमको प्यार से सहलाता।
हवा में उड़ कर मन बहलाता
अंक में भरकर है हमें झुलाता।
हर पल है जो हमको लुभाता।
वह मेरी मां का आंचल है।
जो पंखा बन देता वायु झोंके।
धूल-गंदगी सब पड़ने से रोके।
मेरी आंसुओं को हरदम पोंछे।
मुत्र -पसीने को खुद में सोखे।
वह मेरी मां का आंचल है।
निंदिया आयी,आंखें झपकी।
जो देता जो प्यार की थपकी।
छोर- छोर उड़ आती लपकी।
हर कोने से है ममता टपकी।
वह मेरी मां का आंचल है।
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'
स्वरचित, मौलिक