परिवार की परिभाषा
परिवार की परिभाषा आज,
बदलती नजर आ रही है।
दो,चार लोगों की गिनतियों में,
सिमटती नजर आ रही है।
हम दो- हमारे दो को ही,
परिवार माना जाता है।
अन्य सभी रिस्तों को अब,
बेकार माना जाता है।
दादा- दादी,नाना- माना को,
पहचानते तक नहीं बच्चे।
चाचा- बुआ,मामा-मौसी को,
जानते तक नहीं बच्चे।
वैसे तो सभी रिस्तेदार ,
अब सबको होते नहीं हैं।
जिनको ईश्वर ने है दिया ,
वे रिस्ते अब ढोते नहीं हैं।
आधुनिकता व नगरीकरण ने,
सृजित किया एकल परिवार।
कयोंकि संयुक्त रूप से रहना,
आज लोगों को नहीं स्वीकार।
सुजाता प्रिय