Wednesday, September 29, 2021

घर का जोगी



घर का जोगी

होली का त्योहार निकट है। सभी घरों में जोर-शोर से तैयारियां चल रही है। कपड़ों एवं रंग-गुलाल के साथ-साथ पकवानों एवं लजीज व्यंजनों की भी सूची बन रही है।
रंजना ने अपनी सहेलियों से मालपुआ की बात छेड़ी।
रजनी ने कहा-पुआ तो हम सभी घरों में खाते हैं।पर, समृद्धि भाभी जैसा लजीज और खास्ता पुआ किसी का नहीं होता।
रंजना की भाभी ने कहा-अपना-अपना हूनर है, वरना मेवे मलाई तो सभी डालते हैं। किन्तु क्या चीज कितनी मात्रा में डालना है यह सभी को अंदाज नहीं होता।
रंजना ने कहा-चलो हमलोग समृद्धि भाभी से ही पूछ लें।
फिर क्या था, सभी चल पड़ी समृद्धि भाभी के घर।संयोग से समृद्धि भाभी घर में अकेली थी। उन्होंने सबका बड़े प्यार से स्वागत किया।
उनकी व्यवहार कुशलता की तारीफ सभी ने किया। फिर मिलने आने का मकसद भी बता दिया।
समृद्धि भाभी ने माल पुए को खास्ता करने के गुर्र सभी को दिल खोलकर बताया।
होली के दिन सभी संध्या को रंग-गुलाल ले एक-दूसरे के घर चल पड़े। बहुत ही सुंदर संयोग था जब समृद्धि भाभी रंजना के घर पहुंची तो उसकी सहेलियां भी वहां मौजूद थीं। सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाया।
रंजना की भाभी ने गरम-गरम माल पुआ लाकर सभी को परोसा।
समृद्धि भाभी की सासु मां ने उन्हें फटकारते हुए कहा-लो खाओ पुआ।देखो कितना बढ़िया बना है।यह तो बढ़िया पुआ बना ही नहीं पाती है।
समृद्धि भाभी की ननद ने छुटते ही कहा-मैं तो पहले ही बोली थी कि रंजना या उसकी भाभी से पुछकर बनाइएगा। लेकिन इन्हें पूछने में अपमान लगता है।अरे! सीखने में कैसा संकोच ?
दूसरी ननद ने हां -में-हां मिलाते हुए कहा-ऐसे लोग कभी सीख नहीं पाते।
सासु मां ने हाथ नचाते हुए कहा-क्या करोगी ?सबके किस्मत अच्छे नहीं होते। मैं तो तरस कर ही रह गयी कि मेरे घर कोई अच्छा व्यंजन बने।
रश्मि कहना चाहती कि हमलोग ने तो इन्हीं से सीखा पुआ बनाना। लेकिन रंजना ने उसे चुप रहने का इशारा किया।वह नहीं चाहती थी कि समृद्धि भाभी को और भी खरी-खोटी सुनाना पड़े।
रंजना की सभी सहेलियां समृद्धि भाभी का उदास और रुआंसा चेहरा देख सोंच रही थी-
सारे मुहल्ले में समृद्धि भाभी सर्व गुण संपन्न और निपुण हैं। लेकिन घर के लोग उसे फुहड़ और बेबकूफ समझते हैं।इसे ही कहते हैं -घर का जोगी जोगड़ा आन गांव के सिद्ध।
             सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

No comments:

Post a Comment