दादाजी खटिया बुन रहे हैं , नीम पेड़ के नीचे।
दादी माँ सहयोग में,रस्सियों को पकड़कर खींचे।
मंझली बूआ बैठ चरखे से , सूत कात रही है।
पाँव पर रख फूफाजी की चिट्ठी बाँच रही है।
बड़ी दीदी कुएँ से खींचकर,पानी भरती जाती।
छोटी दीदी घड़े उठाकर,आँगन में है पहुँचाती।
सँबरी गैया आकर घड़े से, पी रही है पानी।
पिताजी जा रहे हैं देने , बैलों को गुड़धानी।
कुत्ते को देखो भूख लगी है,झाँक रहा है खपड़ी।
बछड़ा लिए आस खड़ा है,मिलेगी रोटी की पपड़ी।
अम्मा ने आकर खबर सुनाई,भोजन है तैयार।
चलें साथ बैठकर खालें, हिल-मिल पूरा परिवार।
गाँव में यह परिवार हमारा, सदा रहते खुशहाल।
सब मिल सब काम करते किसी को नहीं मलाल।
सुजाता प्रिय,राँची
स्वरचित,मौलिक