Saturday, January 25, 2020

भारत माता गीत

नित्य नवाते भारत माँ,हम शीश तुम्हारे चरणों में।
माँ शीश तुम्हारे चरणों में।।
नित्य सेवा करके पाते हैं,आशीष तुम्हारे चरणों में ।
आशीष तुम्हारे चरणों में।।

हिमालय तेरा मुकुट बना।
गंगा-यमुना तेरी माला।
पायल बनकर झंकार रहा,है हिंद तुम्हारे चरणों में।
माँ हिंद तुम्हारे चरणों में।

जब तक सूरज और चाँद रहे।
जब तक गंगा की धार रहे।
धरती पर तेरी शान रहे, रहे जीत तुम्हारे चरणों में।
रहे जीत तुम्हारे चरणों में।

तू विश्व विजेता बन जाये।
फिर विश्व गुरू- बनकर छाये।
और विश्व शिरोमणि कहलाये,रहे प्रीत तुम्हारे चरणों में,
रहे प्रीत तुम्हारे चरणों में।
              सुजाता प्रिय

Friday, January 24, 2020

माचिस की छोटी तीली हूँ

माचिस की छोटी ती्ली हूँ,
लती और जलाती हूँ।
तम हर लेना काम है मेरा,
सबको यही सिखलाती हूँ।

रात अँधेरे में मैं जलती,
अँधेरा को दूर भगाती हूँ।
लालटेन मोमबत्तियाँ जला,
घर रोशन कर जाती हूँ।

रसोई घर में जाकर जलती,
चुल्हे में आग सुलगाती हूँ।
स्वादिष्ट भोजन बनबाकर,
सबकी भूख मिटाती हूँ।

मंदिर-मंदिर में जलकर,
धूप - कपूर जलाती हूँ।
दीपक-आरती में अपनी,
भूमिका सदा निभाती हूँ।

कुम्भकार के आवे में जल,
मिट्टी-पात्र पकबाती हूँ।
कारखाने में जलकर,
उपयोगी सामान बनबाती हूँ।

लोहर-सोनार घर जलकर,
भट्ठी मैं फुकबाती हूँ।
विभिन्न वस्तुएँ और गहने,
सबके लिए गढ़बाती हूँ।

कितना गिनाऊँ छोटी होकर ,
काम बड़े कर जाती हूँ।
पुरातन काल से छोटे-बड़े,
सबको सदा ही भाती हूँ।
                सुजाता प्रिय

Wednesday, January 22, 2020

मुझमें तुझमें है फर्क यही

मैं भूल न पाती हूँ तुझको,
तुम याद कभी ना करते हो।
मैं दूर नहीं होती तुझसे ,
तुम पास आने से डरते हो।

तुम राजा अकड़ विचारों के,
मैं कोमल दिल की रानी हूँ।
तुम शान और गुमान लिए,
मैं केवल स्वाभिमानी हूँ

मैं सुंदर फूल हूँ बगिया में,
तुम भौंरा बन मड़राते हो।
रसपान मेरा कर लेने को,
तुम बेध मुझे उड़ जाते हो।

तुम बन ऊँचे आकाश खड़े,
मैं सहनशील इक धरती हूँ।
तुम क्रोधित हो गरजते हो,
मैं सबकी पीड़ा हरती हूँ।

मैं कल-कल बहती नदिया हूँ,
तुम ऊँचे पर्वत से झरते हो।
मैं शांत- चित इक झील बनी,
तुम समंदर बन उमड़ते हो।

अपने जीवन की नदिया में,
मैं पार लगाती नैया हूँ ।
तुम यदा-कदा पतवार पकड़,
कहते हो मैं खेबैया हूँ।

गर फर्क हमारा मिट जाए,
दिल का प्रसून कुछ खिल जाए,
तब लक्ष्य हमारा पूरा हो,
फिर मंजिल अपनी मिल जाए।
                   सुजाता प्रिय

Saturday, January 18, 2020

मानवता के दीप जला दें

मानवता के दीप जला दें,
हम ऐसा इंसान बनें।
चहुँ दिशा में ध्वज लहराएँ,
ऐसा कीर्तिवान बनें।

हम सम्यक दुःख बाँट सकें।
हम सम्यक सुख बाँट सकें।
हर प्राणि को खुश कर जाएँ
हम ऐसा गुणवान बनें।।चहु......

हम पर सब विश्वास करें।
हम भी सबसे आस करें।
ऐसा हो एहसास दिलों में,
हम पर ही इमान बने।।चहु......

भूखे को इक रोटी दे दें।
और प्यासे को पानी दें।
जरुरतमंदों को बाँट सकें कुछ,
हम ऐसा धनवान बनें।।चहु......
             सुजाता प्रिय

Friday, January 17, 2020

ज्ञान पिपासा

जिसके मन में ज्ञान पिपासा।
ज्ञान की जिसे है अभिलाषा।

ज्ञानामृत उसके घर बरसेगा।
ज्ञान पान कर मन हरषेगा।

घट ज्ञान का कभी न भरता।
ज्ञान को ना कोई भी हरता।

जग सूना है बिना ज्ञान के।
घटता है यह बिना दान के।

उतना बाँटो जितना पाओ।
देने में कभी ना सकुचाओ।

अगर ज्ञान की प्यास तुझे है।
ज्ञानी बनने की आस तुझे है।

अज्ञानी को तुम बाँटो ज्ञान।
पाओगे तुम जग में सम्मान।
               सुजाता प्रिय

Tuesday, January 14, 2020

मेरा नाम पतंग है

ना पंछी हूँ ना तितली हूँ,
मैं आसमान में उड़ती हूँ।
दूर - दूर तक  घूमती हूँ,
जब चाहूँ वापस मुड़ती हूँ।

ना विमान हूँ ना तुफान हूँ,
फिर भी भागी फिरती हूँ।
ना पंख हैं ना पाँव है,
जब चाहूँ उठती-गिरती हूँ।

ना हड्डी ना पसली मेरी,
ना मांस-खून ना चमड़ी है।
ना हाथ-मुँह है,ना पेट है,
मोल मेरा बस दमड़ी है।

अन्न-जल कुछ ना चाहिए,
ना खाती ना पीती हूँ।
ना सांस लेती,उछ्वास लेती,
हैरत है कैसे जीती हूँ।

ना कोयला , ना पेट्रोल चाहिए,
ना बिजली से चलती हूँ ।
ना भाप, ना गैस चाहिए,
निराधार मैं पलती हूँ।

उड़ूँ मचलकर, जैसे नभचर,
नन्हीं नटखट, करती छटपट।
रंग-विरंगी, मन- मतंगी,
हटपट-झटपट भागूँ सरपट।

देश-विदेश में पहचान मेरा,
जन-जन मेरे संग हैं।
मन में सबके भरूँ उमंग,
मेरा नाम पतंग है।
    सुजाता प्रिय

Saturday, January 11, 2020

बोली की चोट

बोली ऐसी बोलिए लगे न दिल पर चोट।
घाव घनेरी ना करे,रहे न दिल में खोट।

बोली से न मारिए,कभी किसी को शूल।
जब मुख को खोलिए झड़ता जाए फूल।

बोली तो पत्थर बनकर,चोट करे भरपूर।
बोली से ही दिल टूटता, होकर चकनाचूर।

चोट सदा तूम बेचते, बोली में क्यों ढाल।
बोली सुनकर जन के, मन में रहे मलाल।

टूटे दिल के टुकड़े को, सके न कोई जोड़।
जोड़ सके तो जोड़ ले, उसमें रहेगा जोड़।

बोली की एक चाशनी,सबके मन को भाय।
दिल के छाले को भरे ,बोली मरहम लगाय।

विनती है कर जोड़कर,मीठी बोली बोल।
सुनकर कड़वी ना लगे ,मन में ले तू तोल।
                          सुजाता प्रिय