अपने मन में प्यार पालकर देखो।
एक नजर मुझपर डालकर दैखो।
माना, मैं कोई हूर की परी ना हूँ,
अपने रूप को खंगालकर देखो।
बहकावे में कतराओ ना मुझसे,
दिल में मुझको संभालकर देखो।
मैं बुरी लगती हूँ महफिल में तुझे,
दिल में मेरा अक्श डालकर देखो।
क्यूँ इतराते हो खुद पर मीत मेरे,
मन में जरा यह सवाल कर देखो।
तुझसे मेरी बस यही गुजारिश है,
मेरे साथ खुद को ढाल कर देखो।
नजरिया बदल ले जरा नजरों की ,
'प्रिय' तुम यह कमाल कर देखो।
सुजाता प्रिय'समृद्धि'
स्वरचित मौलिक