Friday, August 29, 2025

मां जगदम्बे गीत

आस धरी अईली दुअरिया केबङिया खोला हे मैया।
केबङिया खोला हे मैया,तनी एने फेरा नजरिया,
केबङिया खोला हे मैया.....
गंगाजल स्नान करन को,भरी-भरी लैलूं गगरिया,
केबङिया......
सेनुर-टिकुली,बाली-लहठी,लैली लाली चुनरिया,
केबङिया.............
बेली-चमेली,उङहुल कलिया, तोड़ी-तोडी लैलूं डलिया
केबङिया..........
गङी-छुहाङा, दाखिल मुनक्का,भरी-भरी लैलूं थरिया
केबङिया..........
धूप-दीप-कर्पूर जलाऊं,सभे मिली सांझ के बेरिया, 
केबङिया,..............
मैया अइहा हमर दुअरिया,अपराध से बाढ़ूं डगरिया,
केबङिया...............
मैया अपन भक्त  समझ के,मन से दिया आशीषिया 
केबङिया.............

सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Monday, August 25, 2025

मैया शेरोंवाली

मैया शेरावाली मुझको तेरा प्यार चाहिए ।
प्यार चाहिए मांँ दुलार चाहिए ।
मैया शेरावाली .............
कब से खड़ी हूंँ द्वार तुम्हारे,नयन उठा कर देखो।
हाथ में लाई खाली झोली,हूंँ खड़ी फैला कर देखो।
भर दो झोली मेरी आशीष हजार चाहिए ।
मैया शेरावाली..........
 ले मनोरथ मन में खड़ी हूंँ, माँ कामना पुरी कर दो।
 काज हमारा आज के दिन माँ,है बड़ी जरूरी कर दो।
 सारे दुखड़े हरो माँ,मुझे बाहर चाहिए ।
मैया शेरावाली .........
          सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

जय मां अंम्बे

अम्बे मेरा जहां में,बस आपका सहारा।
तेरे बिना है माता ,दिखता नहीं किनारा।।
मेरा काम आज अटका,उसे पूर्ण कर   दो माता।
मेरी बिगङी तुम बना दो,हे पहाङों वाली माता।
जीवन  मेरा संवारो,देकर  मुझे सहारा।
अम्बे मेरा जहां में..............
मां मुझको आज थामों,मैं लङखङा रही हूं।
जो पथ सुगम था मेरा, उसको भूला रही हूं।
सत्पथ मुझे दिखाओ,मैं दास हूं तुम्हारा.
अम्बे मेरा...........
मां देखो  मेरी कश्ती,मझधार में खङी  है।
सब राह भूल बैठी, तुफान में अङी है।
पतवार बहकी जाती,बङी तेज जल की धारा.
अम्बे मेरा .........

       सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Tuesday, August 19, 2025

मेरी मटकी से

कान्हा माखन न चुरा मेरी मटकी से।
मटकी से छीके लटकी से।
कान्हा माखन न  .....
कह दूंगी यशोदा मैया से जाकर,
तू तो बडा है माखन  चोर। 
छीके से उतारकर माखन ,
खाया मेरी मटकी फोड़।
दधी खाया तूने छोटी लुटकी से।
कान्हा माखन न ..........
तूमने भी खाया बलराम को खिलाया,
बाल सखा संग राधा को खिलाया,
किया तुमने लड़ाई  मेरी छुटकी से।
कान्हा माखन न...........
ताली बजाकर बाल सखा संग, 
हमें चिढ़ाकर गाया गीत। 
कहा-तूमने मुझको है हराया,
तेरे साथियों की हो गई  जीत।
तूने ताल मिलाया दे दे चुटकी से।
कान्हा माखन न .............
              सुजाता प्रिय  'समृद्धि'

मधुमास मनोहर

आया सखी मधुमास मनोहर 
फूलों से सज गया बाग-फुलवारी,
पेड़ सजा है पलाश-गुलमोहर ।
कोयल गाती पंचम सुर में,
भँवरे छेड़े तान मनोहर ।
नहीं सुहाता बिस्तर रजाई,
अंग नहीं दुशाला और दोहर।
गाते सभी मिल फाग के गाने।
ऐसे लगे सब गा रहे सोहर।
        सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

पावन मधुमास

लेकर संग में खुशियां खास।
आया है पावन मधुमास।
आया है........ 
दिशा-दशा वासंती छाई।
बागों में कलियां मुस्काई।
झूम-झूम नव कोमल पत्ते,
हर्षित हो करता परिहास।
आया है............
फूल खिले हैं फुलवारी में।
गमलों और छोटी क्यारी में।
बागों में छाई है हरियाली,
वन उपवन खिल गया पलास।
आया है..............
भौंरा गाये, कोयलिया कूके।
बुझे दिलों में जीवन फूंके।
उड़ी तितलियांं उसकी चिड़िया,
सबके मन को आया रास।
आया है..................
सब जीवों का मन हर्षित है।
सरस-सलिल जीवन पुलकित है।
पवन के कोमल झोंके ले आया,
खुशहाली का देने आस।
आया है...................
रंग-रंगीला आया फाग।
छेड़ जोशीला सुंदर राग।
जन-जीवन को देने आया,
सौगातों की झोली पास।
आया है........
आने वाला है नववर्ष।
सबके मन में भरने हर्ष।
संग में आँचल भरकर लाया,
उत्साह, उमंग और उल्लास।
आया है................
          सुजाता प्रिय 'समृद्धि'


श्रीराम जन्म

जन्म लिए रघुराई सखी री दशरथ भवन में।
अंगना में बाजे बधाई सखी री दशरथ भवन में।
कौन मांँ के राम,कौन माँ भरत,कोन मातु के लखन -शत्रुधन भाई सखी री दशरथ भवन में।
कौशिल्या माँ के राम कैकेई मां के भरत,
सुमित्रा मां के लखन -शत्रुधन भाई सखी री-
दशरथ भवन में ।
के रे लुटावे अनधन सोनमा,
केरे लुकास हाथ कंगना सखी री,
दशरथ भवन में..........