Thursday, June 30, 2022

दृश्य सुहावन

दृश्य सुहावन

फूलों की क्यारी
हैं सुंदर-सुंदर
लगती प्यारी।

रगं-बिरंगी
हैं कलियांँ मुस्काई
मन को भाई।

तितली आई
औ फूल-फूल पर 
हैं मड़राई।

भौंरे हैं गाते,
सुंदर तान वह
 हमें सुनाते।

कोयल कूके
बुझ रहे मन में,
जीवन फूंके।

दाना चुगने
चिड़िया है चहकी
आई बहकी।

तोता औ मैना 
आम पेड़ पर है 
चहक कर।

पपीहा कूंजे
तीतर बटेर की
बोली गूंजे।

मोर झूमते
पर को फैला कर
नाच दिखाते।

है सुहावन
ये दृश्य बगिया की
मनभावन।

सुजाता प्रिय समृद्धि
  स्वरचित, मौलिक

Wednesday, June 29, 2022

वर्षा में भीगलै चुनरिया



वर्षा में भींगलै चुनरिया (मगही भाषा)

अब झमर-झमर बरसे बदरिया।
हमर बरसा में भींगलै चुनरिया।

टप-टप,टप-टप बरसे रे पानी।
हर-हर हर-हर,हरसै रे पानी 
हम घूमे ले अइलियै बजरिया।
बरसा में..................
झम-झम,झम-झम पनिया बरसे।
गड़-गड़,गड़-गड़ बदरिया गरजे।
हमरा सूझे ना तनी  डगरिया।
बरसा में.................
सज-धज के हमें घूमे ले अइलियै।
थैला और बटुआ में हथबा लैलियै।
लेकिन लेबे ले भुलैलियै छतरिया।
बरसा में..................
चुनरी भी भींगलै,चोली भी भींगलै।
केश के लट संग चोटी भी भींगलै।
और संग में भींगलै अचरिया।
बरखा में.................
मुहमां के किरिम-पौडर धोबैलै।
ठोरबा के भी लिपिस्टिक धोबैलै।
हमर अखिया के धोबैलै कजरिया।
बरसा में.................
    सुजाता प्रिय समृद्धि

मायका का प्यार

मायका का प्यार 

बचपन की जुड़ी हैं यादें,
बचपन का जुड़ा है प्यार।
भूले नहीं भूलता है मन,
मायका का प्यारा संसार।

अम्मा के आँचल की छैयां,
बाबा की बाहों का झूला।
खुली हवा में बचपन जागा,
वातावरण था खुला -खुला।
कैसा आनंद से भरा था,
वहांँ का अपना घर-द्वार।
भूले नहीं भूलता है मन,
मायका का प्यारा संसार।

दादी के कहानी-किस्से,
दादा का सीख-सीखावन।
चाचा का लाया खिलौना,
चाची के गीत लुभावन।
बुआ का छुप-छुपकर देना,
वह प्यार भरा उपहार।
भूले नहीं भूलता है मन,
मायका का प्यारा संसार।

रंग-बिरंगे फूलों की क्यारी,
वह अमियां की छाया।
सखियों संग घूमना-फिरना,
खेल -खिलौनों की माया।
झगड़ों के संग याद आता है,
भैया -दीदी का दुलार।
भूले नहीं भूलता है मन,
मायका का प्यारा संसार।

होली-दिवाली, बड़ी निराली,
वह प्यार भरा दशहरा।
मकरसंक्रांति, रक्षा बंधन,
लगता था बड़ा सुनहरा।
याद सदा सताता मुझको,
सदा ही सारा त्योहार।
भूले नहीं भूलता है मन,
मायका का प्यारा संसार।
        सुजाता प्रिय समृद्धि

Tuesday, June 28, 2022

गोरी का शृंगार

गोरी का शृंगार

होठों पर लाली, कानों में बाली।
पहनकर चली गोरिया मतवाली।।

कानों में झुमका,लगाकर ठुमका।
सनम जाना है आज मुझे दुमका।।

अंखियों में कजरा,जूड़े में गजरा।
खूब समझती तेरी बातों का माजरा।।

पांवों का पायल, किया मन घायल।
रुनझुन संगीत का हुआ मन कायल।।

हाथ कंगन बाला,गले में माला।
बिंदिया सजाकर चली वृजवाला।।
       सुजाता प्रिय समृद्धि

Monday, June 27, 2022

दादी नानी की कहानियांँ



दादी नानी की कहानियांँ

अच्छी-अच्छी बात बताती,
दादी -नानी की कहानियाँ।
कभी हंँसाती कभी रुलाती,
दादी- नानी की कहानियांँ।

खूब हँसा मनोरंजन करती।
हमारे मन का संशय हरती।
घुलमिल रहना हमें सिखाती,
दादी -नानी की कहानियांँ।

भले- बुरे का है ज्ञान कराती।
झूठ-सच का परिणाम बताती।
बुरी राह से हमेशा हमें बचाती,
दादी - नानी की कहानियांँ।

पुरातन युग की बात बताती।
युग-युग का इतिहास सुनाती।
सुखी साम्राज्य का भान करती,
दादी -नानी की कहानियांँ।

भलाई करने को प्रेरित करती।
हम सभी को सम्मिलित करती।
संग रहना खेलना हमें सिखाती,
दादी -नानी की कहानियांँ।
    सुजाता प्रिय समृद्धि

मंजिल



मंजिल

जो करते हैं मेहनत-हिम्मत उन्हें ही मंजिल मिलती है।
उनके जीवन-बगिया में सफलता की कलियां खिलती है।

मंजिल की चाहत है मन में,सत्पथ पर चलते जाओ।
विघ्नों और बाधाओं से, तनिक नहीं तुम घबराओ।
विघ्नों से लड़नेवालों के संग सदा सफलता चलती है।
जो करते हैं मेहनत..........

जो मन को दृढ़ बनाकर,पग-पग आगे बढ़ते हैं।
हिम्मत कर अपने कदमों से, सीढ़ी -सीढ़ी चढ़ते हैं।
मंजिल का मार्ग प्रशस्त हो जाता,सच्ची राह निकलती है।
जो करते हैं मेहनत...........

जो मन में निश्चय कर बैठे, मंजिल मुझको पाना है।
चाहे पथ जितना दुर्गम हो, आगे कदम बढ़ाना है।
अड़चन की चट्टान भी पथ में, दृढ़ ऊष्मा से पिघलती है।
जो करते हैं मेहनत..........
                  सुजाता प्रिय समृद्धि

Sunday, June 26, 2022

विजया घनाक्षरी

विजया घनाक्षरी

गणपति को नमन, कार्तिक जी को नमन,
माँ पार्वती को नमन,गौरीपति को नमन,

हरि विष्णु को नमन,माता लक्ष्मी को नमन,
सरस्वती को नमन, चक्र-ब्रह्म को नमन।

रामचंद्र को नमन,सीता माता को नमन,
लखनजी को नमन,हनुमान को नमन।

बालकृष्ण को नमन,राधा प्यारी को नमन,
गोप-गोपी को नमन, भक्त जन को नमन।

    सुजाता प्रिय समृद्धि