Sunday, September 1, 2024

मैं प्यारी भाषा हिन्दी हूँ

मैं प्यारी भाषा हिन्दी हूँ (कविता)
(चोपाई छंद आधारित मुक्तक)

मैं प्यारी  भाषा  हिन्दी हूँ।
   भारत  माता  की  बिंदी  हूँ।
      विदेशी  भाषा  को  भगाने-
         मैं  आज  हिन्द में  जिंदी हूँ।

मुझसे  प्रेरित  भाषा  सारी।
   मैं  सभी भाषियों को प्यारी।
      छंदो- कविताओं में रचकर-
         हो  जाती  हूँ  मैं तो न्यारी।।

मेरे  शब्दों     में  आकर्षण।
   है अर्थ  भरा  मेरा  चितवन।
      सुंदर - प्यारे  मधु  भावों  से -
         है भरा हुआ मेरा कण-कण।

मैं  सब  लोगों को  भाती हूँ।
   मैं  शीघ्र  समझ में आती हूँ।
       जो मुझे  प्यार  से अपनाता-
         मैं  उसकी  ही  हो जाती  हूँ।

जो मुझको तुम अपनाओगे।
   सुख  बहुत सदा ही पाओगे।
      हिन्दी भाषा - भाषी बनकर-
         तुम  देशभक्त   कहलाओगे।

               सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Saturday, August 31, 2024

जय-जय हिन्दी बोलिए

जय-जय हिन्दी बोलिए 

सबसे प्यारी हिन्दी भाषा, हिन्दी में सब बोलिए।
इसके संग किसी भाषा को,पलड़े में मत तोलिए।

सीखिए कोई भी भाषा, सीखना-सीखाना धर्म है,
सबके रंग में अपनी भाषा, हिन्दी के रंग घोलिए।

चुनना हो कोई भाषा तो, हिन्दी को अपनाइए,
इससे न अच्छी कोई भाषा,इधर-उधर मत डोलिए।

सभी भाषा से सरल है,इसे सीखना आसान है,
विशेषता है हिन्दी की,यह राज सारे खोलिए।

राष्ट्रीय भाषा भी बने यह,इसका मान बढ़ाइए,
बहुत विदेशी भाषाओं को,आज तक हम ढो लिए ।

हिन्दी दिवस मनाइए, हिन्दी के गुण गाइए,
देशवासी जाग जाएंँ, नींद गहरी सो   लिए।

संस्कृत की प्यारी बिटिया, बड़ा सलोना रूप है,
हिन्द के माथे की बिंदी,जय-जय हिंदी बोलिए 
       सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Thursday, August 29, 2024

हिन्दी वर्णमाला

                    हिन्दी वर्णमाला 

अल्फाबेट बहुत सीखे हम, सीखें हिंदी वर्ण।
हर वर्ण का मान बड़ा है ,जैसे लगता स्वर्ण।।

मानक वर्ण हिन्दी केभाई,होते हैं पूरे बावन।
कभी-कभी भी आते हैं, नहीं छोड़ते दामन।।

तेरह वर्ण पहले सीखो,जिसको कहते स्वर।
स्वर की मात्राएं सदा,लगती है व्यंजन पर।।

ग्यारह वर्ण स्वर के ऐसे,जिनका पूरा थाह।
इसके दो वर्णों को, कहते हैं आयोग वाह।।

व्यंजन वर्णों के भी हैं,बहुत ही बड़ा समुह।
स्वर से मिल पूरा होते,जब भी खोलो मुँह।।

पाँच वर्णों के होते हैं,यहाँ पर पूरे पाँच वर्ग।
प्रथम वर्ण के नाम पर,कहाते कवर्ग-चवर्ग।।

चार वर्ण कहलाते हैं, जान  लें अंतस्थ वर्ण।
चार वर्ण घर्षण पा, कहलाते हैं ऊष्म वर्ण।।

चार वर्ण कहलाते यहाँ, सुनिए संयुक्त व्यंजन।
दो वर्ण नीचे बिंदु पा,कहाते उत्क्षिप्त व्यंजन ।।

हिन्दी वर्णों के इस समुह,को कहते वर्णमाला।
आसानी से इसे सीखते, हैं बालक और बाला।।

             सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

हिन्दी वर्णमाला

अल्फाबेट बहुत सीखें तुम,सीखो हिन्दी वर्ण।
हर वर्ण का महत्व बहुत है, जैसे धातु स्वर्ण।
ग्यारह वर्ण स्वर के ऐसे, होता महत्व अथाह।
इसके दो वर्णों को हम,कहते हैं आयोगवाह।

Wednesday, August 28, 2024

जन्माष्टमी (मन हरण घनाक्षरी)

जन्माष्टमी (मन हरण घनाक्षरी)

अंधेरी,आधी रात में,
    भादों के बरसात में,
       शुभ दिन जन्माष्टमी,
           नाच  रहे  जन   हैं।

आये कान्हा गोद में,
   झूमों मंगल - मोद में,
        वसुदेव-देवकी का,
              पुलकित  मन  है।

विष्णु के अवतार हैं,
    करते  बेड़ा  पार हैं,
       मथुरा निवासियों का,
              खुश   चितवन  है।

कान्हा सबको तारते,
     संताप  से   उबारते,
         दीन-हीन सेवकों को,
               देते  धन - जन  हैं।

                सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

हिन्दी भाषा जिन्दाबाद (गीत)

हिन्दी भाषा जिंदाबाद 

हिन्दी भाषा बोलो सब मिल,
सदा ही रखना इसे आवाद।
कहो हिन्द के हिन्दी-भाषी,
हिन्दी  भाषा  जिन्दाबाद।।
कहो हिन्द के.............

हिन्दी भाषा बड़ी मनोहर।
गर्व करो इसको अपनाकर।
हिन्दी ने परतंत्रता तोड़ी-
 हुआ हमारा देश आजाद।।
कहो हिन्द के.............

रच हिन्दी में छंद तुम प्यारे।
कथा-कहानी ग्रंथ तू न्यारे।
विदेशी भाषा को अपनाकर-
हिन्दी को मत कर बर्बाद।।
कहो हिन्द के............

कागद हिन्दी से सिंचित हो।
गीत-कविता से गुंजित हो।
क्षेत्रीय भाषाओं में भी तुम-
हिन्दी शब्दों को रखना याद।।
कहो हिन्द के...........

पढ़ो अगर तुम हिन्दी भाषा।
रखो मन में यह अभिलाषा।
हर भाषा के ग्रंथों का होवे-
हिन्दी भाषा में अनुवाद।।

कम न हो हिन्दी की महिमा।
सदा रहे बनी इसकी गरिमा।
हिन्दी से ही है हिन्द हमारा-
मिटाता जो मन के अवसाद।।
कहो हिन्द के..............
           सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, August 25, 2024

कृष्ण भजन


कृष्ण भजन 

सुन लो पुकार मेरी कृष्ण कन्हैया।
पकड़ पतवार, मझधार मेरी नैया।
सुन लो......
भटक रही आज मुझे राह नहीं सूझे।
करो न निराश मुझे आस नहीं दूजे।
दिखा दो तुम राह मुझे वंशी बजैया।
सुन लो .......
दिल की तड़प मेरी कोई न जाने।
समय पर अपने भी होते बेगाने।
मन के क्लेश मिटा रास रचैया।
सुन लो...........
एक विनती प्रभु सुन लो तू मेरी।
पूर्ण कर आज काज,लगाओ न देरी।
मेरी नौका के तुम ही हो खेवैया।
सुन लो......
हाथ जोड़ समृद्धि करती पुकार है।
दूर कर मन में जो आता दुर्विचार है।
हे कृष्ण द्रौपदी के लाज बचैया।
सुन लो......
                सुजाता प्रिय 'समृद्धि'