Wednesday, September 6, 2023

जनम लिये नन्दलाल ( श्रीकृष्ण जन्माष्टमी)

जनम लिये नन्दलाल बधाई भारत को।
नन्द के लाल, यशोदा के लालन,
मदन-मुरारी गोपाल बधाई भारत को।
जनम लिये नन्दलाल........
कंश-असूर को मार गिराए।
ध्रुव-प्रहलाद के प्राण बचाए।
बनकर रक्षापाल बधाई भारत को।
जनम लिये नन्दलाल.........
मुरली धुन पर राग सुनाये।
व्रजवासिन को आन रिझाये।
छेड़े सुर-लय-ताल बधाई भारत को।
जनम लिये नन्दलाल..............
गौ को चराकर वन-उपवन में।
भर दी जन-जन के वे मन में।
गो पालन की चाल, बधाई भारत को।
जनम लिये नन्दलाल.....
द्रौपदी की लाज बचाए।
हाथ उठाकर चीर बढ़ाए।
सभा में किये कमाल, बधाई भारत को।
जनम लिये......
अंगुली पर गिरि को उठाए।
व्रजवासियों को प्रलय से बचाए।
छत्र हम गिरी को सम्हाल बधाई भारत को
जनम लिये नन्दलाल.......
अर्जुन के सारथी बन कर।
गीता का उपदेश सुनाकर।
तोड़े माया जाल, बधाई भारत को।
जनम लिये नन्दलाल............
जो जन मन से आज बुलाते।
किसी रूप में दौड़े हैं आते।
हरते हैं दुःख-काल, बधाई भारत को।
जनम लिये नन्दलाल,...........
        सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Tuesday, September 5, 2023

शिक्षक (दोहे )

शिक्षक देते हैं सदा, विद्या- बुद्धि व ज्ञान।
शिक्षक से हम सीखते,साहित्य, औ-विज्ञान।।

लक्ष्य-प्राप्ति के लिए, बतलाते हैं राह।
शिक्षक बिना जीवन में, मिलता कभी न थाह।।

हम माटी की लोय हैं,शिक्षक हैं कुम्हार।
गढ़ते हमको चाक पर,देते हैं आकार।।

शिक्षा की प्रसाद खिला,करते हैं गुणवान।
शिक्षकों के गुण अपना,बनता गुण की खान।।

ज्ञान की दीप को जला, देते हैं सद्ज्ञान।
राह दिखाना ज्ञान का, शिक्षक की पहचान।।
              सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

शिक्षा से हम प्यार करते हैं (कविता)

शिक्षा से हम प्यार करते हैं

हम शिक्षक हैं, शिक्षा से हम प्यार करते हैं।
नयी पीढ़ी में,शिक्षा का विस्तार करते हैं।
.. 
साक्षरता अभियान चला, निरक्षरता को भगाते हैं।
विद्या है अनमोल रतन, सबको पाठ पढ़ाते हैं।
पूर्ण-साक्षरता के सपने हम साकार करते हैं।

शिक्षा की ज्योत जला,सबको राह दिखाते हैं।
निराशों को आस दिला,मन विश्वास जगाते हैं।
दिखा सफलता के पथ का, विस्तार करते हैं।

शिष्यों में छुपी प्रतिभा की पहचान करते हैं।
नये सिरे फिर उनमें नव-निर्माण करते हैं।
बढ़ा मनोबल हम उनमें निखार करते हैं।

शिक्षा की सेवा करने ,हर पल कदम बढ़ाते हैं।
ज्ञान किसी को देने में,तनिक नहीं घबराते हैं।
जीवन की हर चुनौतियांँ स्वीकार करते हैं।

     सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, September 3, 2023

होनहार विद्यार्थी



      होनहार विद्यार्थी 

मन शरीर स्वस्थ रहें,
           सात्विक भोजन करते हैं।
स्वान निद्रा में सोते हैं,
             सुबह जाग कर पढ़ते हैं।
बगुले जैसा ध्यान लगाकर,
                 स्वाध्याय वे करते हैं।
जब-तक पाठ याद ना होता,
                  काक चेष्टा करते हैं।
बुरे- विचार मन में ना आए,
               अच्छी संगति करते हैं।
सबसे सीखते,सबको सिखाते,
                 ज्ञान अर्जन करते हैं।
घर में पाठ समझ न आता,
      विद्यालय की राह पकड़ते हैं।

         सुजाता प्रिय समृद्धि

प्रेम नगर का झूला रे

प्रेम नगर का झूला रे।

काहे की डांडी ?काहे की डोरी?
काहे का लटका झूला रे ?
प्यार की डांडी। प्रेम की डोरी।
प्रीत का लटका झूला रे।

कौन झूले को कस कर बांध्यो?
किसका बंधन खुला रे ?
विनम्र झूले को कस कर बांध्यो,
उद्दंड का बंधन खुला रे।

कौन झूले पेंग बढ़ाकर ?
कौन मद में फूला रे ?
संस्कारी झूले पेंग बढ़ाकर,
अहंकारी मद में फूला रे।

कौन झूले चाक-चौबंद हो ?
कौन सुध-बुध भूला रे ?
स्वार्थी झूले चाक-चौबंद हो,
नि:स्वार्थी सुध-बुध भूला रे।

कौन झूले को यत्न से राख्यो ?
कौन पड़ायौ धूला रे ?
समझदार झूले को यत्न से राख्यो।
नासमझ पड़ायौ धूला रे।

छलिया मन में कपट रख झूले,
मन में राखे शूला रे।
कहे 'समृद्धि' निष्कपट हो झूलो,
हृदय न राखों हुला रे।

सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Friday, September 1, 2023

हम साथ-साथ रहें

हम साथ-साथ रहें ( मुक्तक)

भगवान आपके चरणों में झुका हमारा माथ है।
   हमारे सिर पर भी वर हेतु उठा आपका हाथ है।
       हे भगवान ! आपको हमारा  बारम्बार प्रणाम -
         आपका ही वरदान से आज हम सब साथ-साथ हैं।

हम सभी हैं साथ-साथ,हम साथ-साथ ही रहें।
   साथ-साथ रह दुनिया की अच्छाइयांँ गहें।
      हम साथ-साथ खाएंँ-पीएंँ , साथ ही जीयें-
         और साथ-साथ मिल सब सुख-दुख को सहें।

एकता का संदेश लेकर साथ आगे बढ़े।
   जीवन के सुगम राहों को हम मिलकर गढ़े।
      ज़मीं पर सफलता की बनाकर हम सीढ़ियाँं-
         आसमां तक हमसब साथ मिलकर ही चढ़ें।

भगवान! आपसे हमको,बस है इतनी आस।
  कठिनाइयाँ हमारे जीवन में,कभी न आए पास।
      विषमता को सुलझाएँ बस यही विनती है हमारी-
         मुश्किल का तम जब भी घिरे लाएँ नया उजास।

सच्चाई की डगर पर स्वामी सदा चलते जाएँ।
   हिम्मत से काम लेकर नित आगे बढ़ते जाएँ।
      सामना करें हर मुश्किल का इतना दें वरदान-
         विषम परिस्थितियों में हमरा मन नहीं घबराए।
      सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

भारत का संदेश

भारत का संदेश 

भारत अपना देश,जिसका प्यारा यह संदेश,
                                 आगे बढ़ते जाओ।
 लेकर मन में विश्वास,कर सफलता की आस,
                                 रास्ता गढ़ते जाओ।

 भारत प्यारा,देश हमारा , यहाँं के हम हैं बासी।
सुख-वैभव की चाह नहीं है,रक्षा के अभिलाषी।
पहनकर सैनिक का वेश, बचा लो अपना देश,
                              दुश्मन से लड़ते जाओ।

इसकी वायु में सांँस लेकर, ही तो हम जीते हैं।
इसका खाते अन्न-फल,हम इसका पानी पीते हैं।
प्यारा यह उपहार,इससे मिलता है हयको प्यार,
                                 प्यार तो करते जाओ।

इस धरती की रक्षा करना, है धर्म हमारा भाई।
इसकी ममता के आँंचल में,हम लेते हैं अंगड़ाई।
कर लो इससे प्यार,हमारा यह सुंदर है संसार।
                                     ऊपर चढ़ते जाओ।

जीवन धन्य होगा कर,इस पर प्राण निछावर।
इसका मस्तक ऊंँचा कर दें, हिमालय के बराबर।
हम सब मिलकर साथ,नवाते जाओ अपना माथ,
                                 नमन सब करते जाओ।

 सुजाता प्रिय समृद्धि