Thursday, December 2, 2021

राम बारात आगमन


बारात आगमन। बोल (नमामीश मीशान निर्वाण  रूपम)

जनकपुरी में बारात आई। देवगणों ने दुंदुभी बजाई।।
पुत्र-विवाह की लेकर मनोरथ।आये अयोध्या के राजा दशरथ।।
तीन अनुज संग आये रघुराई।दो सांवरे और दो गोरे भाई।।
देवों के देव गणेश पधारे। ब्रह्मा-विष्णु महेश पधारे ‌।।
गुरु विश्वामित्र,वशिष्ठ जी आये। ऋषि-मुनि संत विशिष्ट भी आये।।
अनेक महीपति सुरपति आये। पुरोहित, मित्र, अधिपति आये।।
आए सभासद,नगरपुरवासी। सहस्त्र सेवक दास और दासी।।
मोती-माणिक्य से सजे गज प्यारे।सात घोड़ों से सजे रथ सारे।।
रंग-बिरंगी बाती जली है।चौमुख दीपों की पाती सजी है।।
हंस-मयूर की नाच मनोहर।झूम रहे नागरी खुश हो कर।।
आतिशबाजियां और आसमान तारे।फूटे पटाखे सुंदर नजारे।।
बाजत पन्नव, झांझर प्यारे।शंख,निशान और ढोल-नगाड़े़।।
दसो दिशा में ध्वज लहराए।भगवा पताके गगन फहराए।।
सभी हैं प्रफुल्लित, सुहानी है बेला। जनकपुर सजा है लगी जैसे मेला।।
राम बारात दल-बल सहित शोभा अपरम्पार,
 मानुष पशु-पक्षी गण जीव सभी आनंद भए।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Wednesday, December 1, 2021

जवानी गलतियों का नाम है (गज़ल )_

हो गयी कुछ भूल,जवानी गलतियों का नाम है।
दिवानी होती है जवानी, इसलिए बदनाम है।

दिल लगा बैठे सनम से,यह मेरी एक भूल है,
इतनी गलती के लिए हम,हो गये बदनाम हैं।

समझ न पाये प्रेम को वे,दे न पाये अहमियत,
उनकी नज़रों में मुहब्बत,आशिकी का जाम है।

अजी जीगर के दर्द को अब,कौन समझेगा यहां,
जवानी में जिस किसी ने,पीया नहीं यह जाम है।

शिकवा-गिला अब जिंदगी में, करना नहीं मंजूर है,
जवानी की देखो यहां पर,आ रही अब शाम है।

मत फफोले को कुरेदो, जख्म हरे हो जाएंगे,
भूल को अब भी सुधारों, बुजुर्गों का पैगाम है।

दुखती रग को मत टटोलो,नब्ज़ अपने देख लो,
तुमने भी खाये थे ठोकर, होता यही अंजाम है।
               सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

मां को चिट्ठी

पुजनियां मां
       सादर चरणस्पर्श
            
           मां ! आशीर्वाद एवं शिक्षाओं से भरी तुम्हारी चिट्ठी मिली। तुम्हारी और पापा की तबियत अच्छी है यह जानकर काफी खुशी हुई।सभी भतीजे-भतीजियां अच्छे से पढ़ाई कर रहे हैं। यह तो और भी अच्छी बात है। मां तुमने लिखा है कि तुम्हारी एक  भाभी मायका गयी और एक की तबीयत खराब है इसलिए सेवा-सुश्रुषा में कमी आ गयी। यइस बात से यही पता चलता है कि उनके रहने और स्वस्थ्य रहने पर तुम्हारी खूब सेवा होती है।यह तो कितनी अच्छी बात है मां! लेकिन मां !मैं देखती हूं तुम्हें नास्ते- खाना देने में उनलोग से पल भर भी देर होती है तो तुम नाराज़ हो जाती हो। मां मैं यही कहूंगी कि उनलोग का भी जीवन है ,मन है । कभी- कभी देर सवेर होती ही है।तन -मन है । कभी- कभी आलस्य भी होता है।इसके लिए नाराज नहीं हुआ करो मां।जिस प्रकार हम बेटियों की गलतियां नजर अंदाज करती हो उसी तरह उन्हें भी माफ किया करो। मां जब मैं तुम्हें अपनी सासु मां के बारे में कुछ बोलती हूं तो तुम समझाती हो कि वह भी मेरी तरह तुम्हारी मां हैं।उनकी बातों का बुरा नहीं मानो और उनका ख्याल रखो।सदा सुखी रहोगी।
उसी प्रकार मैं भी कहती हूं मां!कि तुम्हारी बहुऐं भी हमारी तरह तुम्हारी बेटियां हैं। उनसे नाराजगी छोड़कर उन्हें माफ किया करो मां ! मन को सुख एवं संतुष्टि मिलेगी।
       पापा को प्रणाम एवं भाइयों भाभियों तथा भतीजे-भतीजियों को ढेर सारा आशीर्वाद।
              तुम्हारी बेटी, सुजाता

Tuesday, November 30, 2021

पिता (हाईकू )



पिता

पिता हमारे
जनक हैं हमको
उनसे प्यार।

परिश्रम से
वे हमें पालते हैं
देते दुलार।

पिता से होता
सुखी हमारा यह
है परिवार।

पिताजी होते
हम बच्चों के सदा
ही हैं आधार।

हर संकट
मेरे दूर भगाते
हैं ललकार।

बरगद की
घनी छांव बनते
हाथ पसार।

अबोध बच्चे
को ठोक-पीटकर
देते आकार।

सुख देने को
हरदम रहते
हैं वे तैयार।

सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Friday, November 26, 2021

झूमर ( मगही भाषा )

झूमर ( मगही भाषा )

पिया हमरा के ले गेल बजरिया जी।
                         बजरिया जी।
मांग टीका गढ़ैलकै हजरिया जी।

टीकबा पहीन हमें गेलियै बजरिया।
सब छोरन के अटके नजरिया जी। नज़रिया जी।
उनका देखके मारबै लतड़िया जी।

टीकबा पहीन हमें गेलियै अंगनमा।
मोर देवर जी मारे नजरिया जी।
                        नजरिया जी।
उनका ठेलके भेजबै अटरिया जी।

टीकबा पहीन हमें गेलियै दुअरिया।
ननदोई जी मारे नजरिया जी।
                      नजरिया जी।
उनका ननदी संग चढैबै पहड़िया जी।

टीका पहीन हमें गेलियै सेजरिया।
मोर सैंया के अटके नजरिया जी।
                          नजरिया जी।
उनका संग लगाएव यारिया जी।
               सुजाता प्रिय 'समृद्धि'
                 स्वरचित, मौलिक

Monday, November 15, 2021

आप ही को वोट देंगे ,वार्तालाप ( व्यंग्य)

आप ही को वोट देंगे 
वार्तालाप ( व्यंग्य )

अरे,अरे राजमहल चाचा ! प्रणाम जी प्रणाम ! आइए बैठिए।चाय, काफी,ठंढई के साथ कौन-कौन मिठाई मंगवाए ? साथे में हांट- डांग, एग रोल और मुर्ग मुसल्लम तो खैबै करिएगा। गांव के रोड जैसन टुटल पुड़िया तो खाय में कोय हरजा नै है।थोड़े-थोड़े देर में लाके देले जाएंगे।
अरे हां रे बब्बनमा ! उ तो हमें एने  से जा रहे थे।सोचे जरा भतीजा से मिलले जायं।
अरे हां चाचा ! उ हम भुलाइए गये कि चुनाव चल रहा।आपका तो पहिये छाप न है काका ?
आउर का तुम तो जानबे करता है सारा विकास तो पहिये में है।
हां चाचा पांच साल के विकास देख कर हमलोग जितना अघाएं हैं कि दुसर छाप के बटन के दबाबे ले अंगुली पहुंचिए नै सकता है। सारा कस्बा के लोग आप ही को वोट देगा। कारण कि चुनाव जीतने से पहले से भी ज्यादा आप चुनाव जीतने पर रोज विकास के आश्वासन देते हैं। सड़क पुलिया के निर्माण करने के लिए कहे थे।सो आज तक कह रहे। स्वास्थ्य केंद्र खोलने कहे थे, आज तक कह रहे हैं। आंगनबाड़ी और विद्यालय भवन निर्माण करवाने बोले थे, आज तक कह रहे हैं। तालाब-पोखर की सफाई का काम हर साल कहते हैं।सबको बिजली-पानी की व्यवस्था  दिलाने की बात आज तक करते हैं। पंचायत भवन निर्माण कार्य का शुभारंभ करने के लिए हर पंचायत में करते हैं।कोय काम नै छुटा हुआ जिसको करवाने से आप मुंह मोड़ते हैं।तब कहिए आपको छोड़कर वोट आखिर किसके झोली में जाएगा ?
हां बेटा ! ई काम हम कभी नै करते हैं।दूसर पंचायत में सड़क  बनबाया लोग ,पांच साल लगते-लगते सब टूट गया। पंचायत और विद्यालय भवन खड़ा हो गया लेकिन छत आज तक नहीं बना। साफ-सफाई के काम कहियो होता है कहियो नै होता है।एको काम कहो तो कि शुरुआत करके पूरा भी किया।
ओह चाचा ! उ बात तो हम खुदे कह रहे हैं कि उससे अच्छा तो आप हैं कि सबको बहला-फुसलाकर रखें हैं।झुठ-मूठ के दिखावा तो नहीं किए ‌ कहीं बेकार के पैसा तो नहीं बहाए। इसलिए तो आप वोट के पूरा अधिकारी हैं।आपके अतिरिक्त एक भी वोट किसी को पड़ना नहीं चाहिए।हम खुद भी आपको वोट देंगे और आपके कार्यों को याद दिलाकर सबको उत्साहित भी करेंगे।इस बार उहो आश्वासन के जरुरत नहीं है । हम सब अपने मन से आपको वोट देंगे।बाकी तनी पनियों पीके जाते तो अच्छा लगता।वोटबा तो आपको देबे करेंगें।
           सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

मां शारदे

मां शारदे ! मां शारदे!
अज्ञानता से उबार दे।
मां शारदे................
तेरे शरण में हम हैं आयें,
लेकर बहुत विश्वास मां।
तेरे चरण में सिर नवायें,
रखकर हृदय में इस मां।
मेरी मूढ़ता को दूर कर दे,
मन-ज्ञान को तू निखार दे।
मां शारदे!...................
दिल में विराजे तू सदा,
 मन में बसा तेरा रूप है।
हर भाव में,हर बात में,
हर वाणी तेरा स्वरूप है।
मन-वचन को स्वच्छ रखूं,
सुंदर सदा तू विचार दे।
मां शारदे!...................
तेरे धवल वसन-स्वरूप-सा,
अंत:करण मेरा रहे।
हर जीव के खातिर हृदय में,
इंसाफ का डेरा रहे।
हर पुण्य कर्मों को करें हम,
तुम इसे विस्तार दे।
मां शारदे!....................
        सुजाता प्रिय 'समृद्धि'