हरि बोलो! वंशी के धुन में सबको रिझाबे हरी बोलो।
हरी बोलो .....
यमुना किनारे कदम की गछिया,
हरि बोलो गाछ पर चढ़कर डाली नवाबे हरि बोलो ।
हरि बोलो ......
सब सखियन मिली वसन उतारे,
हरि बोलो यमुना के जल में संग नहाबे हरि बोलो
हरि बोलो .......
देख गोपन की स्नान की रीति,
हरि बोलो धीरे से जाकर कान्हा वसन चुराबें हरि बोलो ।
हरि बोलो ...
सब सखियां मिली अरज करत हैं,
हरि बोलो कान्हां से विनय कर वसना मांगे हरि बोलो।
हरि बोलो....
कृष्ण जी बोले वसन मत खोलो,
हरि बोलो जल में वरुण के वास बताए हरि बोलो।
हरि बोलो......
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर सोमवार 23 मार्च 2026 को लिंक की गयी है....
ReplyDeletehttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
!
मेरी रचना को पांच लिंक पर प्रकाशित करne हेतु सादर धन्यवाद
Deleteसुंदर
ReplyDeleteहार्दिक धन्यवाद भाई
Deleteजय श्री कृष्ण
ReplyDeleteजय श्रीकृष्ण
Deleteसुंदर प्रस्तुति
ReplyDeleteजय हो
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