Friday, September 18, 2020

दर्द देकर हँसाया गया ( गज़ल )

हर जगह मुझको ही आजमाया गया।
दर्द दे - देकर है सदा ही हँसाया गया।

सोंचती रही कि है ईश्वर की यही मर्जी,
जितना सहती गई उतना सताया गया।

वश तो गैरों पर कभी भी चलता है नहीं,
सदा अपनों के द्वारा मुझे रुलाया गया।

दिखाऊँ किसे दिल पर पड़े फफोलों को,
धीमी आँच पर जिसको है जलाया गया।

अश्क आँखों से छलक जाए ना कहीं,
मीठे शब्दों से दिल को बहलाया गया।

उफ न कह दे होंठ कहीं गैरों के निकट,
मरहम मधुर वाणियों का लगाया गया।
       सुजाता प्रिय 'समृद्धि'
        मौलिक ( स्वरचित )

15 comments:

  1. बहुत-बहुत धन्यबाद सखी।मेरी रचना को भावों के चंदन चर्चा अंक में करने के लिए।सादर

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  2. सुन्दर प्रस्तुति

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    1. बहुत-बहुत धन्यबाद भाई।

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  3. बहुत सुन्दर सृजन सुजाता जी .

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    1. सादर धन्यबाद एवं आभार सखी।

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  4. उम्दा, मर्मस्पर्शी सखी
    धीमी आँच पर जिसको है जलाया गया।
    उफ्फ!!

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    1. बहुत-बहुत धन्यबाद सखी

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  5. बहुत-बहुत धन्यबाद सखी

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  6. बहुत सटीक एवं मार्मिक...
    उत्कृष्ट सृजन।

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  7. हार्दिक आभार सखी

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