Saturday, October 22, 2022

धन के देव कृपा करना

धन के देव कुबेर कृपा करना।
दुःख-दारिद्र सभी संकट हरना।
अपनी जरूरतों को पूरी करें,
मेरी झोली में इतना धन भरना।
बड़े से बड़े काम करना हो तो,
नहीं पड़े मुझको कभी डरना।
छोटी-सी विनती लेकर आई हूंँ,
इसे तू अपने अंतस में धरना।
जरुरत पर धन देने में से दव,
ना झिझकना ना ही मुकरना।

         सुजाता प्रिय समृद्धि

Friday, October 21, 2022

माटी का दीया

माटी का दीया

माटी की गुथाई करते समय फिसलकर गिर जाने के कारण पिताजी के हाथ में चोट लग गयी और पिताजी चाक चलाने में असमर्थ हो गये।नेहा ने अपने भाई बहनों को अपनी एक योजना बताई। नक्काशी दार सांँचों में तो दीये बनाये जा सकते हैं।सभी भाई-बहनों ने मिलकर ढेर सारे दीये, खिलौने और मूर्तियांँ बनाये। उन्हें पकाकर रंग-रोगन कर सजाया और बाजार में बेचने बैठे।खिलौने और मूर्तियांँ तो जल्द ही बिक गये, लेकिन दीये........।जब बाजार में चीन-निर्मित बिजली से जलने वाले सुंदर दीपों की लड़ियांँ उपलब्ध है तो भला इन माटी के दीयों को कौन पूछता है ? तेल-बाती डालकर जलाओ और जरा-सी हवा तेज चली कि बुझ गया।भला इन झंझटों में कौन पड़े।
     संध्या अपने परम यौवन प्राप्त कर चुकी थी। अंधकार ने अपना साम्राज्य स्थापित करना प्रारंभ कर दिया। फूल-रंगोलियों से सभी लोग अपने घर सजाकर  दीये जलाने और पूजन की तैयारी में लग गये। नेहा भाई बहनों को बाजार की दुकान में छोड़कर घर आ गयी। क्योंकि मांँ बीमार और पिता लाचार थे।घर में भी पूजन करना और दीये जलाने हैं।अचानक बिजली आई और जोरदार धमाके के साथ गुल हो गई।पूरा मुहल्ला अंधकार के आगोश में समा गया।यह विद्युत-ट्रासफर्मर जलने की आवाज थी। सभी जानते थे कि इस इलाके में नये ट्रांसफर लगने में पंद्रह-बीस दिनों से कम नहीं लगते। पास-पड़ोस के लोग नेहा के घर दीये लेने दौड़ पड़े कहीं सारे दीये बिक ना जायें। विद्युत के बिना तो चीन के दीये नहीं जगमगाएंगे। नेहा के घर और बाजार के सारे दीए बिक चुके थे।वह अपने माता-पिता और भाई बहनों के साथ अपने घर में लक्ष्मी जी की पूजा कर माटी के दीये जलाने और खुशियांँ मनाने में लगी थी।यह उन्हीं की कृपा थी कि उसके बनाए सारे खिलौने और दीये बिक गए।वह जोर से बोल उठी लक्ष्मी माता की जय।
               सुजाता प्रिय 'समृद्धि'
                 स्वरचित, मौलिक

Tuesday, October 18, 2022

कार्तिक मास की महिमा

कार्तिक मास की महिमा

पावन मास कार्तिक का शुभ-आगमन पर सभी के मन में हर्षोल्लास भर उठा है।शरद की शीतलता लिए कोमल वायू के झोंके चित को शांति प्रदान कर रहा है।इस मास का नाम शंकर-पार्वती के पुत्र कार्तिकेय एवं कृतिका नक्षत्र के नाम पर पड़ा।हम सभी जानते हैं कि मनभावन कार्तिक मास का हमारे जीवन में विशेष महत्व रहा है।पाचन शक्ति को बढ़ाने वाला यह मास सबको भाता है।वर्षा ऋतु के अंत के साथ बरसाती बीमारियों का भी अंत होने लगता है।सूर्य की किरणों की कोमलता सबके मन को भाता है।इस माह में प्रातः-स्नान का बड़ा वैज्ञानिक महत्व है।धान,मकई मड़ुआ गुड़ जैसे स्वास्थ्य-बर्धक फसलों का आगमन घर में होने लगता है।इस माह में अनेक उत्तम व्रत एवं त्योहार मनाए जाते हैं। यों कहें कार्तिक मास त्योहारों का ही महीना है। धनतेरस, दीपावली , गोवर्धन पूजा भाई-दूज,दवात पूजा, चार दिवसीय छठ पूजा, गोपाष्टमी, देवोत्थान एकादशी , तुलसी विवाह इत्यादि अनेक उत्तम व्रत एवं त्योहार इसी महीने में मनाया जाता है।इस प्रकार कार्तिक महीने का हमारे जीवन में बड़ा ही महत्व है।यूँ कहें कार्तिक मास की महिमा अपरम्पार है।
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, October 16, 2022

आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया

आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया

आमदनी है पाँच सौ,खर्चा करो हजार।
सोचो तेरे जेब की,कितना होगा भार।।

सदा पड़ोसी-दोस्त से,लेना होगा कर्ज।
कर्ज लेने वाले तुम,सदा रहोगे मर्ज।।

कुछ भी लेने के लिए,जाओगे बाजार।
नगद नदारद होयगा,लेना पड़ा उधार।।

अपनी जेब की जिसको,तनिक नहीं हो भान।
समय पड़े तो लोग से,लेना पड़ता दान।।

दिखावे हेतु जो सदा,बनते लोग अमीर।
उनका कहीं-ना-कहीं,लुटता सदा ज़मीर।।

धरा से पांव छोड़कर,उड़ते हैं आकाश।
मुसीबत लगती आ गले,खतरे आते पास।।

अपनी बड़ाई के लिए,करो न ऊंँची बात।
सब लोगों को ज्ञात है,क्या तेरी औकात।।

सुजाता प्रिय समृद्धि

वचन पालन


वचन पालन 
पिता ने बिटिया का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा -"बेटी ऐशु! मेरे बाद घर की पूरी जिम्मेदारी तुम्हारी है। मैंने यह घर सिर्फ तुम्हारे लिए बनवाया है।जीवन में कभी भी मेरा घर,अपनी कलम और पुस्तक का साथ मत छोड़ना।मेरे बाद ये तुम्हारा सहारा बनेगा।
वचन देते समय बारह वर्षीय बेटी यह पता नहीं था कि एक दिन बाद ही उसकी अनपढ़ मांँ और तीन छोटी बहनों की जिम्मेदारी उसके कोमल कंधे पर छोड़कर पिताजी सदा के लिए चले जाएँगे।बस एक ईश्वर,एक आराध्य और आधार के रूप में सदा उसके साथ रहेंगे।अब जीवन के छिनते आसमान रुपी पिता के साथ वैभव पूर्ण जीवन यापन करने वाली नन्हीं परी को जीवन आभाव भूख, गरीबी लाचारी में बीतने लगा।उसके कंधे पर चार लोगों की जिम्मेदारियां थी।वह कड़ी मेहनत करने लगी। पढ़ाई के पाठों को प्रत्येक पंक्ति और शब्द कंठस्थ करने लगी।इस प्रकार अपनी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पुरस्कृत होती गयी। पिता के घर में रह उनकी यादों में ‌मन में उत्पन्न भावों और विचारों को कोई सुनने वाला था बस उसके कागज कलम।मन के उफानों से उत्पन्न शब्दों के चमकीले मोतियों को पंक्तियों के धागों में पिरोकर काव्य-मालिका गूंथती और पिता के आशीर्वाद स्वरूप पुरस्कार प्राप्त करती।कवि सम्मेलनों में प्रतिभागिता, ओर महान् कवियों के सानिध्य एवं आशीर्वाद ने काफी प्रेरित किया। विद्यालय में प्रधानाचार्या और बैंक मैनेजर के रूप में कार्य रूपी तप करते हुए जननी तथा सहोदराओं की शिक्षा -दीक्षा और पाणिग्रहण संस्कार के  यज्ञ कर पिता को दिए गए वचन को पूरी सत्य एवं निष्ठा के साथ कर पूर्णाहुति दी।
              सुजाता प्रिय समृद्धि

Saturday, October 15, 2022

शिव पार्वती (चौपाई)

शिव पार्वती ( चौपाई )

बैठीे शिव-संग पार्वती माँ। 
हरती सबकी मूढ़ मती मांँ।।
हाथ जोड़कर भक्त खड़े हैं ।
नतमस्तक ले आस खड़े हैं।।
हे शिव-शंकर हे बम भोला।
आज आइए मेरे टोला।।
जग प्राणी के कष्ट मिटाने।
जग से सब संताप हटाने।। 
त्राहिमाम करता जग सारा।
चहुं ओर फैला अँंधियारा।।
हर-हर-हर भोले त्रिपुरारी।
सब संकट तुम हरो हमारी।।
दया करो तुम हे नागेश्वर।
हे शिव-शंकर, हे परमेश्वर।।
आती जग में विपदा भारी।
त्रस्त है जिससे दुनिया सारी।।
पीकर तूने विष का प्याला।
सारे जग का बन रखवाला।।
आज नाथ तू हमें बचा लो।
सारे दुख को दूर भगा दो।।
जमा करो अपराध हमारा।
भूल-चूक जो भी हो सारा।।
शिव भोले कि सुनो भवानी।
सारे जग की तुम हो रानी।
सुनो -सुनो हे शैल-किशोरी।
तुम तो मन की हो अति भोरी।। 
चल भक्तों की सुध-बुध लेने। 
सुख व समृद्धि उनको देने।। 
यह जग है मेरी ही माया।
हमने रची जीव की काया।। 
हमें इनकी है रक्षा करना।
इनके सब कष्टों को हरना।।

 सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Wednesday, October 12, 2022

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (देव घनाक्षरी)


 
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

राज-दुलारी बेटियांँ,
  पिता को प्यारी बेटियांँ,
     माता को प्यारी बेटियांँ,
          चलती मटक-मटक।

घर-आँगन की शोभा,
  मायका की होती शोभा,
      ससुराल की भी शोभा,
           चलती छमक-छमक।

बेटी लक्ष्मी सरस्वती, 
  शक्ति माया व पार्वती,
       दुर्गा काली भगवती,
         मत तू इसको झटक।

बेटियों को बचाइए,
    मन से ना दुराइए,
        इसे खूब पढ़ाइए,
         जनम लेते ना पटक।

         सुजाता प्रिय समृद्धि