Tuesday, September 27, 2022

जय मैया चंद्रघंटा

जय मैया चंद्रघंटा

भैया चंद्रघंटा का रूप,तेरी महिमा अगम अनूप।
चाहे रंक धनी या भूप,सबको भाए तेरा रूप।
मैया चंद्रघंटा..........
पक्षिप्रवर गरूड़ पर आरूढ़ जग में विचरण करती।
उग्र कोप और रौद्र रूप में सबका चिंतन करती।
अपने भक्तों के अनुरूप,सबको भाये तेरा रूप।
मैया चंद्रघंटा.............
त्रिशूल गदा तुम हाथ में लेकर सबकी रक्षा करती।
जल में ठंडक,आग में गर्मी,तुम ही माता भरती।
विभिन्न रुप में शक्तिरूप,सबको भाये तेरा रूप।
मैया चंद्रघंटा..........
मुझ पर भी तुम दया करो मां,मैं भी तेरी बिटिया।
कभी तो मेरी सुध- बुध लेने, आओ मेरी कुटिया। 
तुम हो ममता का स्वरुप,सबको भाये तेरा रूप।
मैया चंद्रघंटा .................
            सुजाता प्रिय 'समृद्धि'
                    स्वरचित

द्वितीय माता ब्रह्मचारिणी (हाइकु)

माँ ब्रह्मचारिणी (हाइकु)

   ब्रह्मचारिणी 
माँं धारण करती 
   नथ-कुण्डल।

    कर कमलों
में अक्ष माला और
   है कमण्डल।

   वेद-पुराण 
उपनिषद  और 
 सभी ग्रंथों में।

   माँं की महिमा 
का विवरण लिखा 
   सब संतों ने।

 शक्ति-सृष्टि की 
मूल नाड़ी-चेतना 
   सर्वव्यापी है।

  दुर्गा माता की 
उपासना प्राचीन 
  व अनादि है।

   महाशक्ति मांँ
परमात्मा रूप में 
  अति सुशीला।

   विभिन्न रुप 
धर कर हैं करती 
  विविध लीला।

 मांँ आदिशक्ति 
परम  महाशक्ति 
  हैं दया शक्ति।

  ब्रह्म रूप में 
विचरण  करती 
 हैं माया शक्ति।

सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Monday, September 26, 2022

मैया शैलपुत्री (मगही भाषा)

मैया शैलपुत्री (मगही भाषा)

हे शैलपुत्री मैयाजी तोहर महिमा अपरम्पार।
भक्तन के भीड़ देखा मैया,लगल है तोहर द्वार।

आधा चंदा के माथा पर तू धारण कैली मैया।
भोला बाबा ऐसन वृषभ सवारी तू कैली मैया।
शूल धारिणी मैया तोहर रूप के सभे निहार।
भक्तन के भीड़ देखा.............
अखिल व्रह्माण्ड के उत्पन्न तू ही कैली मैया।
चराचर जगत के पालन करे वाली तू ही मैया।
आदि शक्ति दुर्गा मैया, रूप में बड़ी निखार।
भक्तन के भीड़ देखा............
लक्ष्मी-सरस्वती,राधा-सीता,सब है तोहर रूप।
महामाया-माया, प्रकृति विद्या-अविद्या,आदि-अनूप।
जगदीश्वरी, महेश्वरी, परमेश्वरी नाम तिहार।
भक्तन के भीड़ देखा..........
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, September 25, 2022

बेटियांँ (दोहे)


बेटियाँ (दोहे )

बेटियों से दुर्भावना, क्यों करते हैं लोग।
जन्म लेते ही बेटियांँ,लगती कोईर्रट रोग।

बेटी रखती मान है, दोनों कुल-परिवार।
जग वालों को बेटियांँ, फिर लगती क्यूँ भार।

बेटियांँ भी होती है,मात-पिता का अंश।
फिर बेटी को देखकर, क्यों है मारे दंश।।

क्यों बेटी को देखकर, चुभता मन में शूल।
बेटी तो परिवार की, होती कोमल फ़ूल।।

बेटी लक्ष्मी -शारदा, दुर्गा की अवतार।
पढ़-लिख देखो बेटियांँ,कर रहीं रोजगार।।

बेटियाँ भी होती हैं,अपनी ही संतान।
उसको भी हमने जना, दिया  न कोई दान।।

पढ़ा लिखा काबिल बना,दो इसको सम्मान।
बिटिया हमको है दिया, ईश्वर ने वरदान ।।

बेटियों के विवाह में,लेते लोग दहेज।
बेटी पा न खुश रहते,रखते नहीं सहेज।।

बेटी को ना मानिए,कभी मही पर भार।
बेटी से घर शोभता, शोभित है संसार।।

बेटियों से होते हैं,जीवन का कल्याण।
कल की जननी है सुता,तू बात हमारी मान।।
               सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Thursday, September 22, 2022

शांति की राह

शांति की राह

आशा का दीप जलाना है,
मानवता का पाठ पढ़ाना है।
जन को जन से मिल्लत हेतु,
शांति की राह बनाना है।

हम रहें आपस में मिल कर,
ना झगडे़ और फसाद करें।
झूठी अकड़ दिखाने को,
ना अपना धन बर्बाद करें।
जो अज्ञानी और बुजदिल हैं,
उन सबको यह समझाना है।
जन को जन से............
हम शांति से विचार करें,
हर प्राणी का अधिकार यहांँ।
हम करें नहीं अधिकार हनन,
हमें करना है उपकार यहाँ।
वे जन होते हैं महान बहुत,
जिन्होंने यह प्रण ठाना है।
जन को जन से..........
आपस के सारे झगड़े को,
हमको करना है निपटारा।
हम मिलकर ऐसा न्याय करें,
रहे ना कोई जन बेचारा।
हर मानव का सम्मान रहे,
हमें समता को अपनाना है।
जन को जन से..........

सजाता प्रिय 'समृद्धि'

Wednesday, September 21, 2022

शिकायत



विषय -     शिकायत

किससे करूँ शिकायत,
             क्यूँ कर करूँ शिकायत।
शिकायत नहीं है करना, 
                मिलती रही हिदायत।

शिकायत तुझे है जिससे,
                वह कर्म ना करो तुम।
खुद को सुधारने का,
              यह मर्म चित धरो तुम।
शिकायत किसी की करना, 
              है आदत बुरी निहायत।
शिकायत नहीं है करना,
                मिलती रही हिदायत।

शिकायतों के कारण,
               जन ! जन से दूर होते।
अपनी बनाई गरिमा, 
              इज्ज़त भी आप खोते।
शिकायत अपनी सुन जन,
                करते  नहीं  रियायत।
शिकायत नहीं है करना, 
                मिलती रही हिदायत।

               सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Monday, September 19, 2022

इंद्रधनुष

इंद्रधनुष

इंद्रधनुष है छाया,
    मन में उमंग लाया,
       सबका मन लुभाया,
              देख रहे लोग हैं।

सात रंग हैं इसके,
    लोग दीवाने जिसके,
       थोड़ी देर में खिसके,
              ये कैसा संयोग है।

जीवन में हुलास है,
     मन में यही आस है,
          जीवन रंग पास है,
              मिटे शोक-रोग है।

जीवन में सात रंग,
     चल रहा संग-संग,
         भर जाएगा उमंग,
               सुंदर ये भोग है।

          सुजाता प्रिय समृद्धि