सावन महीना (कजरी)
हरि बोलो ! सावन महीना पावन, मनमा हरसे हरि बोलो।
हरि बोलो ! रिमझिम रिमझिम,रिमझिम मेघा बरसे हरि बोलो।
गड़-गड़, गड़ -गड़ बोले बदरिया।
चम-चम,चम-चम चमके बिजुरिया।हो रामा,
हरि बोलो !अजब आवाज आबे, अम्बर से हरि बोलो।
हरि बोलो!सावन महीना...........
वर्षा की देखो है बुंदे ये न्यारी।
लगती है यह हर जन को प्यारी।हो रामा,
हरि बोलो ! कड़क -कड़क कर,बदरा गरजे हरि बोलो।
हरि बोलो!सावन महीना .........
धरती पर छायी है हरियाली।
हरी- भरी है पेड़ों की डाली।हो रामा।
हरि बोलो ! खेतों की क्यारी में, पौधे लरजे हरि बोलो।
हरि बोलो !सावन महीना...........
आ री सखियाँ हम झूला झूलें ।
पेंग बढ़ाकर नभ को छू लें हो रामा।
हरि बोलो बालम का मन तरसे,
मनमा हरसे हरि बोलो
हरि बोलो !सावन महीना.......
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सुजाता प्रिय समृद्धि
सुन्दर कजरी
ReplyDeleteहार्दिक धन्यवाद
Deleteसुंदर
ReplyDeleteनमन
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