Wednesday, September 10, 2025

माँ अम्बे गीत (राग काफी )

तेरे द्वार खड़ी हूँ मैया।२
लेकर आस कड़ी हूँ मैया।
तेरे द्वार........
मेरा दुःख तुम दूर करो माँ।
आकर मेरे कष्ट हरो माँ।
तेरे चरण पड़ी हूँ मैया।
लेकर आस..........
तेरे द्वार.................
हे जगदम्बे मुझको उबारो।
नैया मेरी पार उतारो।
भँवर बीच डरी हूँ मैया।
लेकर आस......
तेरे द्वार............
तुम बिन कोई राह न सूझे।
पंथ सभी लगते अनबूझे।
जो मैं राह धरी हूँ मैया।
लेकर आस......
तेरे द्वार............
हे जगजननी मातु भवानी।
तुम -सा कोई नहीं है दानी।
दान से झोली भरी हूँ मैया।
लेकर आस...........
तेरे द्वार........

तेरी चुनरी माँ

तेरी चुनरी मांँ! कि आय हाय तेरी चुनरी माँ।

 तेरी चुनरी लाल मैया,तेरे अंग में शोभे।
तेरी चोली हरी मैया,उसके संग में शोभे।
चमक उसमें शोभे रे,शोभे रे,शोभे,
लगा गोटा मांँ !कि आय हाय लगा गोटा मांँ।
तेरी चुनरी माँ....
तेरे मांग में सिंदूर और टीका शोभे।
तेरे माथे में मैया, तेरी बिंदिया शोभे।
नासिका में शोभे रे,शोभे रे,शोभे
तेरी नथिया माँ! कि आय-हाय तेरा नथिया माँ.....
तेरी चुनरी माँ
तेरे दोनों कानों में, स्वर्ण झुमका शोभे।
तेरे दोनों हाथों में,खनक कंगना शोभे।
तेरे गले में शोभे रे,शोभे रे शोभे बड़ा माला मां
कि आय-हाय...........
तेरे दोनों पांवों में,तेरा पायल शोभे।
तेरे पायल की घूंघरू,रुनुक झुन-झुन बोले
संग उसके बोले रे बाजे रे बोले रे बोले तेरी बिछुआ माँ
कि आय हाय तेरी बिछुआ मां
तेरी चुनरी मांँ

अम्बे गीत (तुम हो कहाँ)

ढूंढ रही तुझे कब से मैं मैया !
तुम हो कहांँ तुम हो कहांँ ।
आकर दर्शन दे दो हे मैया,
तुमहो कहांँ...........
मैं हूंँ मैया दासी तुम्हारी ।
तेरे दरश को फिरूँ मारी-मारी । 
एक झलक दिखला हे मैया 
तुमहो कहांँ.............
 हे मांँ अंबे दया करो अब।
आकर संकट मेरा हरो सब।
दुष्ट जनों से बचा लो हे मैया,
तुम हो कहांँ...............
कलुष मिटा दे मेरे मन से ।
कष्ट हटा दो अब जीवन से।
सच्ची राह दिखा मुझे मैया !
तुम हो कहांँ.............
आलोकित कर मेरा जीवन।
निर्मल मनको हो निरोग रहे मन,
अन्न-धन-जन का वर दो हे मैया!
तुम हो कहांँ

Tuesday, September 9, 2025

माँ दुर्गा जगतारिणी (धनुष वर्णाकार पिरामिड)

माँ 
दुर्गा 
आईं हैं 
आज मेरे 
आँगन देखो 
चरणों में माँ के
सब शीश नवाओ
मंगल आरती गाओ
माँ से सब माँग लो
शुभ आशीर्वाद 
हम सबको 
रख माँ
सुख 
से
माँ
अम्बे 
सबको 
सुख देती 
सुख करनी 
संकट हरनी
हैं माता जगदम्बे 
हेकष्ट निवारिणि 
दुख उबारिणी 
जगतारिणी 
भक्तों को माँ
आज तू
वर
दो।



महाबली हनुमान (हरि गीतिका छंद)

महाबली हनुमान का नित ध्यान सब मिल कीजिए।
 उनके चरणों में शीश रख आशीष भी कुछ लीजिए।।
निज भक्त के संताप को पल में मिटाते हैं प्रभु ।
दुख वेदना हर कर हृदय में सुख-चैन लाते हैं प्रभु।।
माँ अंजनी के पुत्र हैं बल बुद्धि ज्ञान अपार है।
पवन पिता से हैं बली महिमा अपरंपार है।।
शरण इनके जो भी जाता हर लेते उसकी कूमती।
ज्ञान-बुद्धि-विवेक देते भर देते उनमें सुमति।।
श्री राम के दरबार में हैं दूत बनकर राजते ।
निजी कृति से दरवार में मन कर शोभते।
राम की सेवा करते सब लोग के मन मोहिते।
             सुजाता प्रिय समृद्धि 

सरस्वती वंदना (माँ शारदे)

सरस्वती वंदना 
मां शारदे मां शरदे मां शारदे  अज्ञानता से उबार दे।
तेरे शरण में हम हैं आए,लेकर बहुत विश्वास माँ। 
तेरे चरणों में हम सिर नवाएँ, रखकर हृदय में आस माँ।
मेरी मूढ़ता को दूर कर दो, ज्ञान को तू निखार दे।
माँ शारदे......
दिल में विराजे तू सदा, मन में सदा तेरा रूप है।
हर भाव में हर बात में, वाणी में तेरा स्वरूप है।
मन-वचन को मैं स्वच्छ रखूं सुंदर सदा तू विचार दो 
माँ शारदे.......
तेरे धवल वसन और हार जैसा अंत:करण मेरा रहे।
हर जीव की खातिर हृदय में, इंसाफ का डेरा रहे।
हर पूण्य कर्मों को करें हम,इसमें सदा विस्तार दे।
माँ शारदे मां शारदे.....
मेरे जिगरी में माँ सरस्वती,मन में यही है कामना।
पर भ्रष्ट हो जब मन मेरा तब तुम ही मुझको थामना।
कभी भूल से कोई भूल हो तो,से माँ! उसे तू सुधार लें।
माँ शारदे मां शारदे 🙏🙏🙏🙏🙏

माता रानी से विनती (मैया इंसाफ करो)

मैया इंसाफ करो ! मेरी ग़लती माफ करो।
मेरी ग़लती माफ करो,सब मेरा श्राप हरो।
हे माँ अम्बे!जय जगदम्बे,जय जगजननी माता।
हे काली कल्याणी माता, दुःख हरनी सुख दाता।
तू मेरा पाप हरो। मेरी ग़लती........
भूल-चूक मेरी से माता! मन से तुम विसराओ।
मैं दुखियारी,शरण तिहारी, मुझको गले लगाओ।
दिल अपना साफ करो, मेरी ग़लती..........
मेरे मन के कुविचारों को,पर में दूर भगाओ।
सुविचारों और सुकृतियो से,मन मेरा भर जाओ।
मेरा मन संताप हरो,मेरी ग़लती................
कभी किसी से द्वेष नहीं हो,ऐसा हो मन मेरा।
प्रेम और सद्भावना आकर मन में डाले डेरा।
इतना तो आप करो। मेरी ग़लती.....

         सुजाता प्रिय समृद्धि