Sunday, September 8, 2024

अन्याय

जमाने में आज देखो,हो रहा अन्याय है ।
जो पीड़ित हैं उन्हें, मिल न पाता न्याय है ।
जमाने में आज देखो........
बांध पट्टी आंखों पर न्याय की देवी खड़ी है।
तुलिका लिए हाथ में विवस मुद्रा में अड़ी है।
पलड़ा जिधर झुके,उनके ही हक में न्याय है ।
जमाने में आज देखो........
अन्यायी लोग सदा ही,न्याय की रट हैं लगाते।
अन्याय को न छोड़ते,अर्थ न्याय का समझ न पाते।
अन्याय करते जाते हैं कहते हैं यही तो न्याय है।
जमाने में आज देखो..........
न्याय क्या मिलेगा,बिगड़ी यहांँ की है प्रणाली। 
जनता को भटकाती है,न्याय यह वेदनावाली।
फाँसी पर लटकाना ही,नहीं यहांँ पर न्याय है।
जमाने में आज देखो............
           सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Thursday, September 5, 2024

वायु (कविता)

वायु 

न ही रूप है  न  रंग है।
   न आकार है  न अंग है ।
      पर हवा हमारे जीवन में-
       रहता सदा सदा ही संग है।

पांच महाभूतो में एक है।
   उपयोग इसके अनेक हैं।
      हर जगह काम आता है-
         कार्य  इसके अनेक हैं।

हवा  हमारा  जीवन है।
   इससे हमारा तन मन है 
       इसके बिन चूल्हे में भी-
          जल न  पाता इंधन है ।

आओ इसे बचाएं हम।
   धरा पर वृक्ष लगाए हम।
       सांस  संवारन वायु को -
          मिलके स्वच्छ बनाएँ हम।

इसके दम पर जीते हम।
   हर पल हैं वायु पीते हम।
      अगर हमें न मिलता वायु-
         रह जाते सदा ही रीते हम।

                 सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

शिक्षक (दोहे )

शिक्षक 

शिक्षक देते हैं सदा, विद्या- बुद्धि व ज्ञान।
शिक्षक से हम सीखते,साहित्य, औ-विज्ञान।।

लक्ष्य - प्राप्ति के लिए, बतलाते हैं राह।
जीवन में शिक्षक बिना,मिलता कभी न थाह।।

हम माटी की लोय हैं, शिक्षक हैं कुम्हार।
गढ़ते हमको चाक पर, देते  हैं आकार।।

शिक्षा की दें भावना,करते  हैं गुणवान।
गुरु के गुण अपनाइए,बनिए गुण की खान।।

ज्ञान की दीप को जला, देते गुरु सद्ज्ञान।
राह दिखाते ज्ञान की, शिक्षक की पहचान।।
              सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Tuesday, September 3, 2024

गणेश (दोहे)

गणेश (दोहे)

सब देवों के देव हैं, पूजो प्रथम गणेश।
माता गौरी भगवती, पिता देवा महेश।।

हाथी जैसे कान हैं, लम्बोदर पर सूढ़।
कर इनकी आराधना,होते ज्ञानी मूढ़।।

सभी बुधवार को करें,इनकी पूजा आप।
गण गणपत्यै बोलकर, करिए मन से जाप।।

लड्डू-मोदक जानिए,इनका प्यारा भोग।
नित उठ भोग लगाइए,सुख से रहिए लोग।।

मूषका पर सबार हो,घुमते तीनों लोक।
भक्त जन पर दया करें, हरते सारे शोक।।

हाथ जोड़ जो मांगिए, देते देवाशीष।
पूर्ण कर मनोकामना,देते हैं आशीष।।

विघ्न हर्ता गणेशजी,हरते उर संताप।
हरते सबकी दीनता,हरते सबके पाप।।
          सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, September 1, 2024

मैं प्यारी भाषा हिन्दी हूँ

मैं प्यारी भाषा हिन्दी हूँ (कविता)
(चोपाई छंद आधारित मुक्तक)

मैं प्यारी  भाषा  हिन्दी हूँ।
   भारत  माता  की  बिंदी  हूँ।
      विदेशी  भाषा  को  भगाने-
         मैं  आज  हिन्द में  जिंदी हूँ।

मुझसे  प्रेरित  भाषा  सारी।
   मैं  सभी भाषियों को प्यारी।
      छंदो- कविताओं में रचकर-
         हो  जाती  हूँ  मैं तो न्यारी।।

मेरे  शब्दों     में  आकर्षण।
   है अर्थ  भरा  मेरा  चितवन।
      सुंदर - प्यारे  मधु  भावों  से -
         है भरा हुआ मेरा कण-कण।

मैं  सब  लोगों को  भाती हूँ।
   मैं  शीघ्र  समझ में आती हूँ।
       जो मुझे  प्यार  से अपनाता-
         मैं  उसकी  ही  हो जाती  हूँ।

जो मुझको तुम अपनाओगे।
   सुख  बहुत सदा ही पाओगे।
      हिन्दी भाषा - भाषी बनकर-
         तुम  देशभक्त   कहलाओगे।

               सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Saturday, August 31, 2024

जय-जय हिन्दी बोलिए

जय-जय हिन्दी बोलिए 

सबसे प्यारी हिन्दी भाषा, हिन्दी में सब बोलिए।
इसके संग किसी भाषा को,पलड़े में मत तोलिए।

सीखिए कोई भी भाषा, सीखना-सीखाना धर्म है,
सबके रंग में अपनी भाषा, हिन्दी के रंग घोलिए।

चुनना हो कोई भाषा तो, हिन्दी को अपनाइए,
इससे न अच्छी कोई भाषा,इधर-उधर मत डोलिए।

सभी भाषा से सरल है,इसे सीखना आसान है,
विशेषता है हिन्दी की,यह राज सारे खोलिए।

राष्ट्रीय भाषा भी बने यह,इसका मान बढ़ाइए,
बहुत विदेशी भाषाओं को,आज तक हम ढो लिए ।

हिन्दी दिवस मनाइए, हिन्दी के गुण गाइए,
देशवासी जाग जाएंँ, नींद गहरी सो   लिए।

संस्कृत की प्यारी बिटिया, बड़ा सलोना रूप है,
हिन्द के माथे की बिंदी,जय-जय हिंदी बोलिए 
       सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Thursday, August 29, 2024

हिन्दी वर्णमाला

                    हिन्दी वर्णमाला 

अल्फाबेट बहुत सीखे हम, सीखें हिंदी वर्ण।
हर वर्ण का मान बड़ा है ,जैसे लगता स्वर्ण।।

मानक वर्ण हिन्दी केभाई,होते हैं पूरे बावन।
कभी-कभी भी आते हैं, नहीं छोड़ते दामन।।

तेरह वर्ण पहले सीखो,जिसको कहते स्वर।
स्वर की मात्राएं सदा,लगती है व्यंजन पर।।

ग्यारह वर्ण स्वर के ऐसे,जिनका पूरा थाह।
इसके दो वर्णों को, कहते हैं आयोग वाह।।

व्यंजन वर्णों के भी हैं,बहुत ही बड़ा समुह।
स्वर से मिल पूरा होते,जब भी खोलो मुँह।।

पाँच वर्णों के होते हैं,यहाँ पर पूरे पाँच वर्ग।
प्रथम वर्ण के नाम पर,कहाते कवर्ग-चवर्ग।।

चार वर्ण कहलाते हैं, जान  लें अंतस्थ वर्ण।
चार वर्ण घर्षण पा, कहलाते हैं ऊष्म वर्ण।।

चार वर्ण कहलाते यहाँ, सुनिए संयुक्त व्यंजन।
दो वर्ण नीचे बिंदु पा,कहाते उत्क्षिप्त व्यंजन ।।

हिन्दी वर्णों के इस समुह,को कहते वर्णमाला।
आसानी से इसे सीखते, हैं बालक और बाला।।

             सुजाता प्रिय 'समृद्धि'