Friday, October 20, 2023

स्कंदमाता (मतगयंद सवैया)

पंचम रूप स्कंदमाता (मतगयंद सवैया)
२११ २११ २११ २११ २११ २११ २११ २२

आज लगे धरती यह सुंदर होबत है जग में जगराता।
पंचम रूप धरी जननी जग में कहते इनको जगमाता।
मात रची तुम सृष्टि सजाकर जीव सभी जनको यह भाता।
नाम जपे जग में सब लोग यहां कहते इनको जय माता।
            सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Wednesday, October 18, 2023

जय माँ कूष्माण्डा (चौपाई

जय माँ कूष्माण्डा (चौपाई)

जय जय जय कुष्मांडा माता।
चतुर्थ रूप यह तेरा भाता।।

हाथ में धनुष-बाण विराजे।
कमण्डल कलश व कमल साजे।।

करती हो तुम सिंह सवारी।
महिमा तेरी है अति न्यारी।।

फल मेवे का भोग लगाऊँ।
भजन-कीर्तन-आरती गाऊँ।।

 मनोकामना पूर्ण करें तू।
सबकी झोली मातु भरे तू।।

सब पर माया करने वाली।
सबकी झोली भरने वाली।।

शरणागत की सुरक्षा करती।
सारे दुखड़े तुम  माँ हरती।।

जो जन तेरे पग में आता।
मनचाहा फल तुझसे पाता।।

           सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Tuesday, October 17, 2023

माँ चंद्रघंटा

माँ चंद्रघंटा

माँ चंद्रघंटा
धर शांति का रूप
करती रक्षा।

अनुशासन
न्याय कर भक्तों को 
देती सुरक्षा।

स्वर्णिम रूप
चढ़ सिंह वाहन
तुम घूमती

धारण कर
लाल वस्त्र भक्तों को
देती सुमति

तीसरा नेत्र
कपाल के बीच में
है विराजता

समदृष्टि से
देख जीवों को लिए 
प्रेम साजता

अपने आठ
हाथों में आठ वस्तु
रखती मात

दो हाथों से तू
भक्त जनों को देती
हो आशीर्वाद 

सर्वोच्च सुख
संतति शांति और 
देती हो ज्ञान ।

संतुष्ट करती 
धन-संपत्ति,समृद्धि
कर प्रदान 

सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Monday, October 16, 2023

हे ब्रह्मचारिणी माता (दोहे)

हे माता ब्रह्मचारिणी, जोडूं अपने हाथ।
मैया सभी झुका रहे, चरणों में अब माथ।
 
सब भक्तों को भा रहा,तेरा सुंदर रूप।
ममता की तुम हो धनी, दिव्य तेरा स्वरूप।।

हाथ कमण्डलु शोभता, मुखड़े पर है तेज।
स्वेत वासना अम्बिके, रही आशीष भेज।।

ब्रह्माण्ड में विराजती, दया भाव ले साथ।
दुखी जनों के पास जा,सिर पर रखती हाथ।।

लिखें माता की महिमा, प्राचीन साधु-संत।
सर्वव्यापी माता का, नहीं है आदि-अंत।।

      सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, October 15, 2023

जय माँ शैलपुत्री ( पिरामिड)

जय माँ शैलपुत्री
हे 
माता
प्रथम
शैलपुत्री
तेरी महिमा
है अपरम्पार
देखो जरा निहार 
भक्त खड़े हैं द्वार 
झुका कर शीश
हाथों को जोड़
नमस्कार
करने
आये
हैं।
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Saturday, October 14, 2023

नजरिया (विजया घनाक्षरी)

विजया घनाक्षरी ८,८,८,८ (३२ वर्णी घनाक्षरी)

नजरिया

समय - समय  पर,
  जगह - जगह  पर,
    ज़माने में है लोगों की
       बदलती   नजरिया।

निज  बारी  में अलग,
   दूजा  बारी  में अलग,
      परिस्थितियांँ देख है,
          सम्हलती  नजरिया।

किसी की साकारात्मक,
   किसी की नाकारात्मक,
      किसी की विचारात्मक,
          है  पलती  नजरिया।

बात हो कोई पक्ष में,
   या हो कभी  विपक्ष में,
       फैसले  समकक्ष  में,
           न  टलती  नजरिया।

     सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Thursday, October 12, 2023

मेरा दोष (लघुकथा)

मेरा दोष (लघुकथा)
घर वालों की उपेक्षा और फटकार सुन नंदनी का मन लहू-लुहान हो उठता। मन की वेदना अंखियों में छलकने लगती। जिसे छिपाने के प्रयास में नजरें शुन्य की ओर फेरना पड़ता। परन्तु उस शुन्य के बीच भी कई प्रश्न चिन्ह उभर उठते। आखिर मेरे बात- विचार, व्यवहार में क्या त्रुटियांँ रह गयी ? जिसके कारण सभी मुझसे रूष्ट रहते हैं ? मेरे लिए सभी लोग के चेहरे पर असंतुष्टि के भाव दिखते हैं ? 
उसने मन-ही-मन अपने सारे क्रिया-कलापों, कर्तव्यों, बोली -व्यवहारों पर गहनता से विचार किया । नहीं उसने अपनी बोली-व्यवहारों में कोई कमी नहीं रहने दी।
फिर वह उन क्षणों का अध्ययन करने लगी जिस क्षण में लोग उसपर नाराज होते हैं। प्रथम क्षण वह था जब लोग उसे सुंदर अथवा शालीन कह देते। दूसरा- समझदार और बुद्धिमान कहते, इमानदार और व्यवहार-कुशल कह देते। आकर्षक व्यक्तित्व की धनी कहते। ईश्वर प्रदत्त इन्हीं गुणों तथा कुछ अपने सुविचारों, सद्व्यवहारों के कारण भले लोगों के बीच उसकी लोकप्रियता और प्रसिद्धि के कारण कुछ लोग, विशेष कर परिजनों की आँखों की किरकिरी बनी हुई थी। ईर्ष्या की भावना से ग्रस्त हो वे सभी उसका अपमान, अवहेलना और तिरस्कार करते हैं।आज उसकी अच्छाईयांँ ही उसके दुःख का कारण बन गयी ,जिसे वह चाहकर भी दूर नहीं कर सकती।
      सुजाता प्रिय 'समृद्धि'