Thursday, September 1, 2022

कवि और कविता (मन हरण घनाक्षरी)



कवि और कविता (मनहरण घनाक्षरी)

कविता लिखते हैं कवि,
दिखती है प्यारी छवि,
चमकता जैसे रवि,
सुर-लय-छंद में।

पिरोते भावों के मोती,
दिखा साहित्य की ज्योति,
साहित्य के बीज बोती,
स्वरों के छंद में।

बनाते माला शब्दों के, 
लेखन प्यारे पदों के,
प्यारे औ न्यारे पद्यों के,
कुछ है स्वछंद में।

सजाते कागज की क्यारी,
लिखते कविता प्यारी,
सभी लेखों से न्यारी 
सरल बंध में 
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, August 21, 2022

तोहरा बारम्बार प्रणाम जी (मगही भाषा)



तोहरा बारम्बार प्रणाम जी
        (मगही भाषा)

भारत के स्वतंत्रता सेनानी तोहरा बारम्बार प्रणाम जी।
तोहरे चलते आज भारत के आजाद देश के नाम जी।

जान हथेली पर ले के दुश्मन से तू लड़ गेला।
बांध माथा पर कफन आंदोलन में पड़ गेला।
नै बुझला तू दिन-रात,ना बुझला तू शाम जी
तोहरे चलते आज भारत के आजाद देश के नाम जी।

देशबा लगी जान गवैला,तोहनी बड़ा महान।
तोहर लोहा मानs हकै समूचे हिंदूस्थान ।
तू भारत के हनुमान हा, औ तू ही हा राम जी।
तोहरे चलते आज भारत के आजाद देश के नाम जी।

हे भारत के वीर सुपुत्तर,तोहरा पूजूं देव समान।
भारत के सब जन के मन तोहरा लागी है सम्मान।
तू ही देश लगी कैला, पहलवानी के काम जी।
तोहरे चलते आज भारत के, आजाद देश के नाम जी।
       सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Saturday, August 20, 2022

नशा शराब में होती तो

नशा शराब में होती तो

नशा शराब में होती तो नाचती बोतल ।
ठुमकती शराबियों संग झूमती बोतल।

शराब से भरी रहने पर उसकी हिफाजत है।
खत्म होते ही फेंकी जाती यही हिदायत है।
शराब खत्म होने पर भी घर में होती बोतल।

हो सके तो नशा का भूत मन से निकालो।
होश ना गंवाओ,अपने मन को संभालो।
शराब से भरकर कभी होश न खोती बोतल।

जब बोतल मदिरा से लबालब भरी होती ।
जागती खाली में और खाली में सदा सोती।
भरी में जागती और खाली में सोती बोतल।

फिर,शराबी क्यों झूमते हैं शराब को पीकर।
तड़प -तड़प कर और घुट-घुट जीकर।
खुश हो खिलखिलाती, तड़प कर रोती बोतल।

जिन्हें न फिक्र जीवन की नशा गले लगाते हैं।
नशा कर बीवी बच्चों पर सितम कितना ढाते हैं।
हैवानियत शराब में होती तो इमान खोती बोतल।

नशा मनोरोग है भाई!नशा कर पागल ना बनो।
नशा कर कभी भी निज तन- मन घायल ना करो।
शराब से भरी रहने पर तो घायल होती बोतल।

नशा कर तू कभी अपनी होश ना गवाओ जी।
कभी हाथ ना लगाओगे यह कसम खाओ जी।
बेहोशी शराब में होती तो बेहोश होती बोतल।
               सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Friday, August 19, 2022

जन्माष्टमी (हाइकु)

जन्माष्टमी (हाइकु)

   मंगल गाओ 
आज है शुभ दिन 
  शुक्ल अष्टमी 

  खुशी मनाओ 
कृष्ण जनम लिए 
   है जन्माष्टमी ।

     बाल रुप में 
हरि विष्णु जी लिए 
      हैं अवतार ।

    कर कमलों 
को जोड़कर मेरा 
   है नमस्कार।

    भक्त वत्सल 
हैं यशोदा के लाल 
     कृपा करते।

   भक्त जनों के 
संकट हारी स्वामी 
     दुःख हरते।

 जो चरणों में 
नमन है करता 
 सच्चे मन से।

 उनकी बाधा
हर लेते केशव
 हैं जीवन से।

  जब आतीं है 
बाधाएँं भक्तों पर 
  दौड़े हैं आते।

  पल भर में 
बाधाएंँ हैं हरते
 मन मुस्काते।

सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Thursday, August 18, 2022

यशोदा के लाल



यशोदा के लाल (मनहरण घनाक्षरी)

मोर मुकुट है माथ,सोने का कंगन हाथ,
तन पीताम्बर गाथ,गले बैजन्ती माल।

गोपियों को है बुलात,बांँसुरी रोज बजाता,
मीठी धुन है सुनाता,बैठ कदम डाल।

गैया को है चराता,और माखन चुराता,
खाता और खिलाता,करता है बबाल।

करता है खटपट, लड़ता है झटपट,
बड़ा ही है नटखट,यशोदा तेरा लाल।
         सुजाता प्रिय समृद्धि

बाल श्रीकृष्ण के अलौकिक कार्य

जय माँ शारदे
बाल श्रीकृष्ण के अलौकिक कार्य

 नटखट श्रीकृष्ण बाल रुप से ही लीला रुपी बाल  सुलभ कर्म दिखाने लगे थे।एक बार माता यशोदा ने मिट्टी खाते हुए उन्हें टोका-फिर मिट्टी खायी तूने ?उन्होंने ना में सिर हिलाया। माता ने परीक्षण हेतु कहा -मुँह खोलो। जब श्री कृष्ण ने अपना मुंँह खोला तो उनके मुँह में संपूर्ण ब्रहमांड देखकर माता यशोदा से चकित रह गई ।
जब श्री कृष्ण घुटने और पंजे के बल चलने लगे तो माता यशोदा इस डर से कि वह बाहर ना चला जाए उन्हें डोरी के सहारे ओखली में बाँंध दिया। लेकिन श्री कृष्ण ओखली के साथ खिसकते हुए जंगल जा पहुंचे जहांँ नारद द्वारा शापित दो ऋषि वृक्ष रूप में पास-पास खड़े थे। कृष्ण उन वृक्षों के बीच से घुसकर चले गए तो ओखली दोनों वृक्ष के तने में अटक गई। बालक श्रीकृष्ण ने ओखली इतनी जोर से खींची की दोनों वृक्ष ही उखाड़ गए और दोनों ऋषि शाप मुक्त हो मानव रूप को प्राप्त किए।
एक बार बालक श्रीकृष्ण माता यशोदा से हट कर बैठे -मांँ ! मुझे चंदा दे दो मैं उससे गेंद खेलूंगा। उनके हठ से परेशान यसोदा माँ ने उन्हें बहलाने हेतु थाली में पानी रख उसमें चंद्रमा की परछाई दिखाई और कहा ले चंदा।श्री कृष्ण ने परछाई रूपी चंद्रमा को उठाकर अपने सिर पर धारण कर लिया ।जिसे देख माता यशोदा घबरा गई। 
बालक श्रीकृष्ण पालने में सो रहे थे।तभी कंस द्वारा भेजी गई उसकी मुंँह-बोली बहन पूतना राक्षसी ने उन्हें मारने हेतु यशोदा मां का रूप धारण कर उन्हें उठाकर अपना विश लगा दूध पिलाना शुरू किया । भगवान कृष्ण ने उसके दूध के साथ उसके शरीर के रक्त भी चुस-चुसकर पी गये। इस प्रकार पूतना राक्षसी को अपने प्राण गवांने पड़े।
 श्री कृष्ण बाल-सखा के साथ खेल रहे थे तभी उनका गेंद यमुना नदी में गिर गया।सभी बालक डर गए कि यमुना नदी में कालिया नामक नाग रहता है जिससे आज तक कोई नहीं बच सका।कृष्ण ने अपना गेंद लेने हेतु यमुना नदी में कूद पड़े।नागराज कालिया से भयंकर युद्ध हुआ। उन्होंने उसे नथ कर उसके फण पर बड़ा मनमोहक नृत्य किया।अंत में नागराज ने उनसे शमा याचना की और उनका गेंद वापस किया। सभी बच्चे उनके इस दुस्साहस से खुश हो गए।इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने बाल्य काल से ही अच्छे और अनोखे कार्य किया।सभी मिल बोलिए-बालक श्री कृष्ण की जय।🙏🙏

Wednesday, August 17, 2022

भारत के गाँव



भारत के गाँंव 

जहांँ है होता भाईचारा,ऐसा सुंदर गांँव हमारा।
जहांँ गरीब-बेसहारों को सब मिल देते हैं सहारा।
ऐसा सुंदर गाँंव हमारा.......
साथ साथ निवास सभी के हिल-मिल रहते सब प्राणी।
यहांँ सभी मिल एक कूप से मिलकर भरते हैं पानी। 
सब मिल खाते,सब मिल पीते, ऐसा है गाँंव न्यारा।
ऐसा सुंदर गाँव हमारा.......
सबका होता ताल-तलैया सबका असर और पोखर।
नदियों में सब साथ नहाते बच्चे- बूढ़े खुश होकर।दोभे में होता सबका पानी सबका है इक धारा।
ऐसा सुंदर गाँव हमारा.........
हर घर में गौशाले होते,सबको मिलता है दूध दही।
गोबर से लिपते गलियांँ आँगन, पावन हो जाती है मही।
‌हर गांँव वृंदावन जैसा लगता है सदा उजियारा।
ऐसा सुंदर गाँव हमारा............
खेतों में हरियाली होती,फसलें लहलहाती है। 
वर्षा ऋतु में खेत हमारी दुल्हन सी सज जाती है।
मानव को अन्न धन मिलता,पशुओं को मिलता चारा।
ऐसा सुंदर गाँव हमारा........
          सुजाता प्रिय 'समृद्धि'