वक्त को साथी बना सीख लो
वक्त को साथी बनाना सीख लो।
साथ उसका तुम निभाना सीख लो।
वक्त के संग चलना तुमको है सदा-
कदम उससे तुम मिलाना सीख लो।
राह अपना तुम बनाना सीख लो।
पैर उसपर तुम बढ़ाना सीख लो।
राहों के कंटक अगर पग में गड़े-
पुष्प उसपर तुम बिछाना सीख लो।
वक्त को तुम आजमाना सीख लो।
भरोसे मन को भी दिलाना सीख लो।
वक्त ने जो जख्म तुझको हैं दिए -
मरहम उसपर तुम लगाना सीख लो।
मन को भी तुम समझाना सीखो लो।
सबके दिल में तुम समाना सीख लो।
कोई तुमको देखता नही,फिकर न करो-
खुद को खुद पर तुम रिझाना सीख लो।
तुम भी करना कुछ बहाना सीख लो।
रूठों हुए को तुम मनाना सीख लो।
कोई जलता है अगर तुम्हें देखकर-
दिल उसका भी तुम जलाना सीखो लो।
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'
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