सुनो जी साँवरिया
गर्मी के मारे मैं परेशान होकर,
।
सज-धज होठ लिपस्टिक पोतकर,
जब घूमने आयी बजरिया।
सुनो जी..................
सज-धज कर जब घूमने आई।
थैला और बटुआ हाथ में लाई।
लेकिन लेने को भूली छतरिया।
सुनो जी..................
झम-झम,झमाझम पानी बरसे।
गड़-गड़,गड़-गड़ बादल गरजे।
मुझे सूझे न कोई डगरिया।
सुनो जी............
चुनरी भी भींगी,चोली भी भींगी।
केश के लट संग चोटी भी भींगी।
और संग में भींगी अचरिया।
सुनो जी................
चेहरा के सारा श्रृंगार को धोया।
होठ के सारी लाली भी धोया।
अंखिया के धोया कजरिया।
सुनो जी.................
सुजाता प्रिय समृद्धि
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