Sunday, July 19, 2026

मेरे शिवजी का रूप है निराला

मेरे शिवजी का रूप है निराला

मेरे शिवजी का रूप है निराला।
फिर भी भोला हैं जग रखवाला।

सब देव के सिर में सोने का मुकुट,
मेरे  शिव जी  का जटा  चंदावाला
फिर भी भोला हैं.................

सब देव के गले में सोना के हार,
मेरे शिवजी को है साँप के माला।
फिर भी भोला हैं...................

सब देवन के अंग में साल -दुशाला,
मेरे शिवजी को है बाघ की छाला।
फिर भी भोला हैं....................

सब देव खाते हैं फल-मेवा, मिठाई,
मेरे शिव खाते हैं भांग का गोला।

सब देव पीते अमृत और सोमरस,
मेरे शिव पीते हैं विष का प्याला।
फिर भी भोला हैं.....................

सब देव बजाते मृदंग-शंख-वीणा,
मेरे शिव-शंकरजी हैं डमरू वाला।
फिर भी भोला हैं.....................
       
सब देवों की हाथी-घोड़ा सवारी,
मेरे शिव-शंकर तो है बैल वाला।
फिर भी भोला हैं.....................

सब देव को है महल कोठा-अटारी,
मेरे शिवजी को मैड़ैया न ताला।
फिर भी भोला हैं.....................

सब देव करते हैं स्वर्ग में विचरण,
मेरे शिवजी घुमते जग में मतवाला।
फिर भी भोला हैं......................
           सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

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