Wednesday, June 17, 2026

चलिए मुस्कुराते हैं

चलिए मुस्कुराते हैं (जलहरण घणाक्षरी)
सातवा ओर आठवाँ वर्ण गुरू

चलिए मुस्कुराते हैं। 
गीत गुनगुनाते हैं।
सभी प्यारी सखियों को 
पास हम बुलाते हैं। 

हँसते औ हँसाते हैं।
सुनते औ सुनाते हैं।
रोजमर्रे की बात को,
सखियों को बताते हैं।

घूमते व घूमाते हैं। 
दिल को बहलाते हैं 
ठेले के निकट चल-
आ चटपटा खाते हैं ।

रूठे को भी मनाते हैं ।
दिल में भी  बसाते हैं ।
आस- पास  बैठकर,
प्रीत हम  बढाते  हैं ।

सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

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