लोभ-मोह है तुझको घेरे
दुखी-विकल तू सान्झ -सबेरे
झूठ, छल औ कलुष मिटाकर,
मन-मंदिर को कर ले साफ।
निर्मल मन का दीप जलाकर,
दूर करो उर के संताप।
कर तुम मन से दूर अन्धेरे।
मन में.........................
जैसी करनी,वैसी भरनी,
इस जग का है सत्य अटल।
बुरे कर्म का सदा बुरा फल,
आज नहीं तो होता कल।
काहे जग से मुखड़ा फेरे
मन में................
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