Monday, January 26, 2026

दो ही छन्द

दो ही  छन्द 
15,11 पर यति 
मेरे मन की य़ह कामना,पूर्ण करो  भगवान। 
जो लगती अच्छी भावना,उनका रख दो मान।।
हम सब बालक नादान हैं, समझ न पाते बात। 
भाई-बंधु और मeet से, लड़ते हैं दिन-रात।।
छल व कपट जो सदा करे,उसपर कर विश्वास। 
अपने लोगों को दूर कर, बनते उनके दास। ।
मेरे दिल में शुभ प्रेम का,भर दो नव प्रकाश। ।
निश्छल प्रेम दो मुझे, लेकर आई आस।।
हम दिनों के तुम नाथ हो, हरो हमारी पीर। 
आए जो संकट की घड़ी, मन में रखूँ धीर। ।
आपके चरण में हम प्रभो,झुका रहे हैं माथ।
अब जीवन आप smvariye ,दुःख हर दीनानाथ। ।

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