Wednesday, December 18, 2024

महादेव के बारह नाम

ऊँ महादेव के बारह नाम -

                           सोमनाथ 
                        मल्लिकार्जुन 
                  महाकालेश्वर ओंकारेश्वर
             वैद्यनाथ                 भीमाशंकर 
              रामेश्वर                  नागेश्वर
            विश्वनाथ                  त्र्यम्बकेश्वर 
          केदारनाथ                  घृष्णेश्वर

तू डाल-डाल मैं पात-पात

तू डाल-डाल मैं पात-पात

नन्ही गिलहरी चुन्नु के से। 🏡
रोटी का एक टुकड़ा लायी। 🍕
बैठ डाल पर नन्हें दाँतों से, 
कुतर-कुतर कर थोड़ा खायी। 

बंदर🐒 मामा कहीं से आकर, 
छीन लिया उससे वह रोटी। 🍞
रोटी मुझको दे दो मामा, 
गिलहरी बोली रोती-रोती। 

ले जा आकर अपनी रोटी🍞
बड़े प्यार से बोला बंदर🐵
उछल-उछल कर भाग रहा था, 
इस डाली से उस डाली पर। 

नहीं पकड़ जब सकी गिलहरी, 
थक-हार चुप बैठ गयी। 
🐒बंदर से बदला लेने की, 
होंगी एक तरकीब नयी। 

एक दिन बंदर मामा भी, 
मिठाई🍮 लाकर खा रहा था। 
मजेदार😋 मिठाई हाथ✋ लगी है। 
सोंच मन में इठला रहा था। 

घात लगाए बैठी गिलहरी ने, 
झट से झपट लिया मिठाई🍬
दोनों आंखों को मटकाकर, 
जीभ दिखाकर उसे चिढ़ाई।

दे दे मुझे मिठाई तू मेरी 🙉
बंदर ने उसको पुचकारा। 
ले सकते तो ले जा आकर, 
गिलहरी ने उसको ललकारा। 

डाल- डाल पर दौड़-दौड़ कर, 
पकड़ने उसको जाता बंदर🐒
पहुँच न पाता, बैठे पाता, 
गिलहरी को चेतन पत्तों पर। 

गिलहरी रानी बोली हंसकर,
सुनो-सुनो👂 ऐ नटखट बंदर🐵
डाल-डाल तू दौड़ लगाते, 
और मैं दौडू़  पत्ते- पत्ते पर। 

सुजाता प्रिय समृद्धि

Monday, December 16, 2024

दिन बीता जाए रे


दिन बीता जाए रे

दिन बीता जाए रे ! दिन बीता जाए। 
तम घिरता जाए रे! तम घिरता जाए। 

दिन भर चलकर सूरज लौटा, फैल रहा है अंधेरा। 
खग कलरव कर उड़ते जाते,खोज रहे हैं बसेरा। 
तुम भी अपने घर को पहुंचो, मधु रजनी का बेरा। 
मन का दीप जलाओ, सुख से रैन बिताओ। 
जीवन को रंगी बनाओ, जो मन भाये रे !
दिन बीता जाए !
वस्ती-वस्ती घूम- घूम कर, देख ले दुनिया सारी। 
दुनिया की है चाल निराली, कुछ तीखी कुछ प्यारी। 
दोनों को जब ग्रहण करो तो, हो जाएगी न्यारी। 
दिल में सफाई लाओ, जीवन में सच्चाई लाओ। 
मन में अच्छाई लाओ,इससे जग जीता जाए रे। 
जग जीता जाए। 
दिन बीता जाए रे 

सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Saturday, December 14, 2024

रंग-बिरंगे फूल हैं हम

रंग-बिरंगे फूल हैं हम

भारत मांँ की फुलवारी के, रंग-बिरंगे फूल हैं हम। 
वैर द्वेष हम कभी न करते, रहते सबसे मिल-जुल हम। 

नाम हमारा हिन्दू- मुस्लिम, जैना बुद्ध, सिख ईसाई। 
आपस में हम कभी न लड़ते, रहते मिल भाई- भाई। 

सुगंध फैलाते दिशा-दिशा,शोभित कर क्यारी- क्यारी। 
महकाएँगें माँ का आँचल, यह धरती प्राणों से प्यारी। 

देश हमारा चमन बिहंसता,हम बच्चे इसके माली। 
सींचेंगे हम क्यारी- क्यारी, महकाएँगें डाली-डाली। 

दमकेगा यह देश हमारा, नव प्रसून मुस्काएँगे। 
करके तन-मन-प्राण निछावर, सुंदर स्वर्ग बसाएँगे। 

      सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Friday, December 13, 2024

सच्चाई तेरा हथियार

सच्चाई तेरा हथियार

कहते थे गाँधीजी बारम्बार। 
    सादा जीवन, ऊँच्च विचार। 
         अहिंसा ही जीवन का सार। 
              कर इसको मन से स्वीकार। 

मिथ्या ही  है बस तेरी हार। 
    सच्चाई ही है तेरा हथियार। 
        तुझपर जन्मभूमि का भार। 
            कभी न जाना हिम्मत हार।

सहन  करो  मत अत्याचार। 
    स्वतंत्रता  तेरा है अधिकार। 
        यही है जीवन  का  आधार।             
            भारत माँ से तू करना प्यार। 

                  सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

बापू को नमन

बापू को नमन

जन्मदिवस है दो अक्टूबर। 
    जन्मस्थान  था  पोरबन्दर। 
         पुतली  वाई  इनकी माता। 
            करमचंद  गाँधी  थे  पिता। 

देश -सेवा  का  व्रत लिया। 
    आजादी  का   यज्ञ किया। 
        करो  या मरो इनका नारा। 
            जिससे जागा भारत सारा। 

सत्य-अहिंसा का ले हथियार। 
    मिटाए अँग्रेजों का अत्याचार। 
        दिलाई  भारत  को आजादी। 
            नमन  बापू  महात्मा  गॉंधी। 

                   सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

माता रानी से विनती

माता रानी की विनती 

करुँ नमन मैं बारंबार,कष्ट से दो मांँ उबार।
भँवर में नैना मेरी,कर दे माँ उस पार।।
निश दिन करुँ पुकार,हृदय से करुँ गुहार,
भंवर में नैया मेरी......
जीवन नैया तुम ही खेवैया,
अब तो पार करो हे मैया,
सारे जगत की तुम रखबैया,
तुझ बिन कोई नहीं खेबैया।
मुझ पर भी कर उपकार ।
दुनियाँ मेरी दे संवार,
भंवर में नैया मेरी......
बिगड़ी मेरी बना दो हे माता !
हे जग-जननी हे जगमाता।
द्वार तुम्हारे जो भी है आता।
पूर्ण मनोरथ सब सुख पाता।
आई हूंँ मैं तेरे द्वार, 
मुझको भी दे अपना प्यार ।
भंवर में नैया मेरी......
मांँ मैं तेरे चरणों की दासी।
आज मिटा दो सभी उदासी।
तेरी दया की मैं अभिलाषी।
तेरी कृपा की हूँ प्रत्याशी।
कर रही मैं पुकार,मेरी भी सुनो गुहार।
भँवर में नैया मेरी.......
आई हूँ मैं तेरे द्वार.......
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'