Tuesday, November 8, 2022

दहेज ना चाही (भोजपुरी भाषा)



दहेज ना चाही (भोजपुरी भाषा)

कैलन दहेज समाज में तबाही।
बेटा बियाह में दहेज ना चाही।

जब हम बेटी के बियाह कईनी।
दहेज जुटाबे में की दिन बितैनी।
लोग परिवार से कईनी उगाही।
बेटा बियाह में दहेज ना चाही।

बेटी के बाप के खून नै चूसब।
उनका से तनी धन नहीं झूसब।
बनाइब न उनका कर्जा के राही।
बेटा बियाह में दहेज ना चाही।

करब ना बियाह में कोनो दिखावा। 
अमीर बने के हम झूठा भुलावा।
देबे जो समधी तो करब मनाही।
बेटा बियाह में दहेज ना चाही।

सादगी से बेटा के बियाह रचाइब।
लक्ष्मी बहुरिया के घर में ढुकाइब।
माने में उनका ना करब कोताही।
बेटा बियाह में दहेज ना चाही।
            सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Friday, November 4, 2022

सरस्वती वंदना (मगही भाषा )



सरस्वती वंदना ( मगही भाषा )

वीणा बाजे रे, सरस्वती माय के द्वार में।
मनमा नाचे रे, उहे वीणा के झंकार में।

रोज मैया के ध्यान लगैबै,चरनियां में सिर नवा के।
मैया हमरा देथिन आशीष,अपने दुनु हथ उठा के।
हमर आस पुरैहा मैया,विद्या-बुद्धि वरदान दे।
जीवनमा संवरे रे, मैया के दुलार में।
वीणा बाजे ये,................

मैया रानी,तू हा वरदानी,हमरा तू वरदान दा।
हम मुरख-अज्ञानी मैया,हमरा सच्चा ज्ञान दा।
विद्या दायिनी मैया मोरी,इहे हमर अरमान है।
झूम-झूमके नाचूँ रे, मैया तोहर प्यार में
वीणा बाजे रे,.....................

सरस्वती मैया,होबा सहैया,पढ़ें लिखे के बेर में।
आखर एक समझ न आबे,गीत-कवित के ढेर में।
जड़मति हमर हर ला मैया,जग में थोड़ा मान दा,
विनती गाऊँ रे, मैया के अलार में।
वीणा बाजे रे.............
           सुजाता प्रिय समृद्धि

Thursday, November 3, 2022

गरीब का बुढ़ापा



    गरीब का बुढ़ापा

मुट्ठी भर दाने है खाना।
उसको मुझे है पकाना।
चुल्हे इसी से है जलाना।
उसके लिए ईंधन लाना।

पापी पेट का सवाल है।
अब जीना यहाँ मुहाल है।
ठंड से बुरा अब हाल है।
किसी को नहीं मलाल है।

लाठी बुढ़ापे का सहारा है।
ठंड में आग ही हमारा है।
इसके सिवा नहीं चारा है।
लाठी और आग सहारा है।

बुढ़ी हूँ किस्मत की मारी ।
लकड़ियाँ बिनना लाचारी।
हूँ बस दुःख की अधिकारी।
ढोती पीठ पर बोझा भारी।

पल सुबह का, या शाम का।
समय न मिलता विश्राम का।
नहीं लेनेकभी नाम राम का।
जपना मन में हरि-नाम का।
        सुजाता प्रिय समृद्धि

Wednesday, November 2, 2022

गणेश वंदना (विजया घनाक्षरी )



     गणेश वंदना 

गणपति गणेश जी, 
   पिताजी हैं महेश जी,
        माता जी हैं दुर्गेश्वरी,
              कर जोड़ है नमन।

भाल पर सिंदूर है,
     हाथ कमल फूल है,
           मूष पर बैठ कर, 
               करते जग गमन।

मुख में है एक दाँंत,
     और शोभे चार हाथ,
           सेवक झुकाए माथ,
               रोग को करें शमन।

बालकों को हैं तारते,
        दुख से हैं उबारते,
            बुद्धि बल निखारते,
                    सँवारते हैं चमन।
            सुजाता प्रिय समृद्धि

Sunday, October 30, 2022

छठ गीत ( मगही भाषा)

छठ गीत (मगही भाषा)

       
सूप लेके वरती नदिया खड़ी है।
भोर पहर के शुभ-शुभ घड़ी है।
उगहू सूरुज देवा अरगा के बेर।
आज उगे में तू काहे कइला देर।

बटिया भेटैलइ निरधन गे वरती।
ओकरा देबे लगलूं धन गे वरती।
बटिया भेटैलइ अंधरा गे वरती।
ओकरा देबेे लगलूं नैना गे वरती।

ओकरे में होलै उगते हमरा देर।
होई गैले आबे में अरगा के बेर।
मांगू -मांगू वरती जे फल मांगू।
देबै सबकुछ तोही आज मांगू।

तोरे दिहल सूरुज धन-संपतिया।
एक हमें मांगियो देवा संततिया। 
मंगिया के सेनुर अचल रहे देवा।
जिनगी भर करब तोर सूरुज सेवा।
         सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Monday, October 24, 2022

पति पत्नी

पति-पत्नी

आपस में विश्वास बनाकर।
एक-दूजे का साथ निभाकर।।
जीवन पथ पर बढ़ते जाते।
अंत-काल तक साथ निभाते।।

कभी-कभी तकरार भी होता।
पर आपस में प्यार भी होता।।
जो आती सुख-दुख की बारी।
दोनों ही बन जाते अधिकारी।।

माता-पिता की सेवा हैं करते ।
परिजनों के संताप-दुःख हरते।।
पाल-पोसकर बच्चों को पढ़ाते।
माता-पिता का कर्तव्य निभाते।।

प्यार के रंग में रंगती है जोड़ी।
लड़ाई-खिचाई भी होती थोड़ी।। 
पत्नी सयानी और पति सयाना।
दोनों मिल कर हैं एक समाना।।

        सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Sunday, October 23, 2022

गोवर्धन पूजा

गोवर्धन पूजा

किए इंद्र अतिवृष्टि,
   मझधार पड़ी सृष्टि,
    है आपकी कृपा दृष्टि,
         कृपा अब कीजिए ।

रक्षा हेतु दीनानाथ,
    गोवर्धन लिए हाथ,
     नवाऊँ आपको माथ,
           आशीर्वाद दीजिए।

 केशव कृष्ण मुरारी,
    गोवर्धन गिरधारी,
       सबके संकट हारी,
         कृपा अब कीजिए।

करते आपकी पूजा,
  आप सब नहीं दूजा,
     करते सदा ही रक्षा,
        धन-धान्य दीजिए।

 सुजाता प्रिय समृद्धि