Monday, August 8, 2022

अंतिम संदेश ( लघुकथा)

अंतिम संदेश
बच्चन मोची अपनी लुगाई कजरी के साथ बस्ती के घर-घर घूम रहा था ।लोग उन्हें देखकर कह रहे थे जो बच्चनमा कभी किसी के आगे हाथ नहीं पसारा,आज बेचारे को घर-घर जाकर मांगना पड़ रहा है ।किसी ने भुनभुनाते हुए कहा -जब सारी कमाई खत्म हो गयी।तब माँगने चला।यही बात पहले मानता तो कुछ हाथ में होता। जब डॉक्टर ने कैंसर का संदेह कह बड़े अस्पताल में जांँच कराने कहा था, तभी टोले के लोगों ने चंदा उगाही कर पैसे इकट्ठे करने को कहा- तो नहीं माना। कहा-ढोल- नगाड़े और जूते की दुकान बेच दूंगा लेकिन माँगूंगा नहीं ।अरे कर्जा-उधारी और सूद पर कुछ दिन के लिए पैसे लेना कोई गुनाह थोड़े ही होता है ।अब सब धन स्वाहा हो गया तब मांगने आया है। चलो कुछ तो इकट्ठा कर हम लोग दिलबा दें उसकी इलाज खातिर।  लेकिन जब वे वहाँ पहुंचे तो देखा वहाँं का नजारा ही कुछ और है। कजरी बच्चन के मुँह के घाव सभी को दिखाकर सभी से गिड़गिड़ाते हुए विनती कर रही है - हे बाबू-भैया !आप लोग को मैं हाथ जोड़ती हूँ,पाँव पड़ती हूंँ। आप लोग खैनी,गुटका,तिरंगा आदि खाना छोड़ दें ।आप अपने बच्चन -भाई का हाल तो देख ही रहे हैं इनके मसूड़े में कितना बड़ा घाव हो गया है।डॉक्टर ने कहा है- यह खैनी- गुटका खाने के कारण हुआ है ।खैनी में मिले चूने मसूड़े और गालों की चमड़ी को गलाकर उसमें सड़न पैदा करते हैं ।फिर धीरे-धीरे इतना विकराल और विभत्स रूप ले लेता है।इस विकराल घाव को ही "कैंसर"के नाम से जाना जाता है।यह घाव घातक ही नहीं, जानलेवा है। इसके होने पर शायद ही कोई बच पाता है। इसकी इलाज में सारा धन-दौलत खत्म हो गया।इनकी तो जान जाएगी ही, बच्चों का जीना भी भारी हो जाएगा।अब ये 'कुछ दिनों के मेहमान है' इतना कह वह सुबक-सुबक कर रोने लगी। सभी लोग उसकी मदद के लिए रुपए-अनाज इत्यादि देने आते,तो बच्चन हाथ जोड़कर विनती भरे लहजे में सबसे कहता हमें कोई मदद नहीं चाहिए। मैं आप सभी की सलामती के लिए दुआ करता हूंँ बस इतनी दया हमपर करिये कि अब आपलोग  पान-बीड़ी, खैनी -गुटका ना खाइए । किसी प्रकार नशा ना करिए। क्योंकि 'नशा नाश का घर है।'इससे जान-माल सब नष्ट हो जाता है।इस तरह वे रोज  गाँव के नुक्कड़ पर तथा अन्य गांँव जाकर लोगों को जागरूक करने हेतु अपने ज़ख्म दिखाता और अपना यह अंतिम संदेश दुहराता।फिर एक दिन अपनी पत्नी और चार बच्चों को अनाथ छोड़.......................
         सुजाता प्रिय समृद्धि

Saturday, August 6, 2022

पार्वती का श्रृंगार

पार्वती ने किया सिंगार, भोला मुग्ध हुए।

मांग में भरकर भखरा सिंदूर,
बिंदिया चमकदार भोला मुग्ध हुए।
पार्वती ने किया शृंगार ........
कान में पहनी मोती का झुमका,
गले नौलक्खा हार ,भोला मुग्ध हुए।
पार्वती ने किया शृंगार..........
हाथ में पहनी जड़ाऊ कंगन,
शंखा -पोला डाल भोला मुग्ध हुए।
पार्वती ने किया शृंगार.......... 
पांव में पहनी पांजेब-बिछिया,
 जिसकी मधुर झंकार भोला मुग्ध हुए
पार्वती ने किया शृंगार.......
अंग में पहनी लाली चुनरिया,
चोली चमकदार भोला मुग्ध हुए।
पार्वती ने किया शृंगार.......
बाल में से शोभे बेली- चमेली,
 अद्भुत गजरे-हार भोला मुग्ध हुए।
पार्वती ने किया शृंगार...........

 सुजाता प्रिय समृद्धि

Friday, August 5, 2022

जीवन के रंग अनोखे

जीवन के रंग अनोखे

         जीवन के रंग अनोखे,
        कुछ हल्के,कुछ चोखे।

कभी उजाला धूम मचाए,
         कभी अंधियारा है छाये।
कभी विभिन्न रंगों में रंग कर,
               जीवन रंगीन बनाये।
 रंगीनियों के मोहजाल में,
          फँस खाये सौ-सौ धोखे।

         जीवन के रंग अनोखे 

कभी पहेली बन उलझाता,
      कभी सीधी-सी राह दिखाता।
कभी टूटते अंतर्मन में ,
          आस की बूंदें है टपकाता। 
कभी विचलित होते मन में,
             लाता उल्लास के झोंकें।

      जीवन के रंग अनोखे।

उम्मीदों के महल बना कर, 
          उसमें रहना हमें सिखाता।
विश्वास के दरवाजे पर,
            हौसले से मिलन कराता।
रंग बिरंगी कोठरियों के,
                    खोल यहांँ झरोखे।

       जीवन के रंग अनोखे।

सुजाता प्रिय समृद्धि

Thursday, August 4, 2022

बाबा बम भोले

देवों के देव महान, बाबा बम भोले।
करते हैं कल्याण, बाबा बम भोले।

मस्तक चंदन-भस्म लगाए,
खाते भंग को छान,बाबा बम भोले।

जटा में गंगा,बाल पर चंदा,
रखते विराजमान,बाबा बम भोले।

नाग की माला,बाघ की छाला,
पहनकर करते शान, बाबा बम भोले।

हाथ में त्रिशूल,डमरू शोभे,
कमण्डल में है धान,बाबा बम भोले।

सदा ही करते बैल सवारी,
इनकी है पहचान,बाबा बम भोले।

कैलाश गिरी पर रहने वाले,
फिरते सदा मशान,बाबा बम भोले।

बाबा हैं भोले भंडारी,
कर ले इनका ध्यान, बाबा बम भोले।

ब्रह्मा-विष्णु, कार्तिक-गणपति,
सब करते सम्मान, बाबा बम भोले।

शिवशंकर हैं औघड़ दानी,
देते हैं वरदान, बाबा बम भोले।
         
        सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Wednesday, August 3, 2022

काश! मैंने कह दिया होता



काश मैंने कह दिया होता

सामने कुर्सी पर दो महिलाएंँ साथ-साथ बैठी थीं। रमेश बाबू दोनों को बारी-बारी से देख रहे थे। दोनों में कितना अंतर है । एक सुंदर, शांत, समझदार, सहनशील,शालीन, मृदुभाषी ।ना कोई नाज नखरे ना कोई शान- घमंड ।दूसरी दिखने में साधारण अशांत,उदंड,बाचाल,नासमझ, नखरेबाज और घमंडी। पहली महिला उसके दोस्त की पत्नी और दूसरी उनकी स्वयं की पत्नी। वे यादों के भंँवर में गोते लगाने लगे। जब उनकी नौकरी लगी थी, पहली महिला के परिजन उनके घर उनसे विवाह का प्रस्ताव लेकर आए थे। उनके घर वालों को लड़की तो भाई लेकिन दान-दहेज ? ना -ना -ना !हम कोई फ़क़ीर घर में बेटे की शादी नहीं करेंगे ।इतने कम में हम क्यों बेटे का विवाह करें ?कोई मेरा बेटा भागा तो नहीं जा रहा ।साइत अच्छा कहें या किस्मत खराब। अगले महीने ही दूसरा परिवार आया और मुँह- मांगी दहेज देने को तैयार हो गया। अब ढेर किस बात की ? सभी ने तुरंत हामी भर् दी।खुशखबरी रमेश बाबू के कानों तक भी पहुंची। संयोग से वे दोनों लड़कियों को जानते थे ।दोनों उनके ही कॉलेज में पढ़ती थी दोनों ही अपने-अपने गुण-दोषों के कारण चर्चित थीं। वे दोनों की तुलना करने लगे ।जमीन- आसमान का अंतर । पहली दुःख-पीड़ा में भी मुस्कुराने वाली। दूसरी घमंड से बरसने-गरजने वाली ।जी में आया -अपने परिवार को कह दें कम दहेज भी लाती है तो पहली लड़की से ही हमारा विवाह करें ।लेकिन कहे तो कैसे ? कहीं इसका कुछ दूसरा अर्थ ना निकल जाए कि साथ में पढ़ती थी .................... फिर  पैसे कम देंगे तो शादी का सारा खर्च कैसे चलेगा ? लोग सरस्वती और शक्ति से ज्यादा महत्व तो लक्ष्मी को ही देते हैं । सो रमेश बाबू के साथ भी ऐसा ही हुआ। आखिर वे उन धनाढ्य की बेटी के साथ बंध गए ।कुछ ही दिनों में पता चला पहली लड़की की शादी उसके बचपन के मित्र लखन से हुई ।दहेज कम देने के कारण प्राइवेट में काम करने वाला लड़का अजीत से उसकी शादी हो गई।
आज उनकी शादी के 25वीं वर्षगांठ है ।मोहल्ले में रहने के कारण अजीत और उसकी पत्नी  भावना भी आमंत्रण पर पधारे। उनकी पत्नी रजनी भावन को जानती थी । इसलिए दोनों साथ -साथ बैठकर बातें करने लगीं। रमेश जी भावना को देख सोच रहे थे । काश मैंने कह दिया होता ,उस दिन अपने परिवार से कि मुझे भावना ही पसंद है ।लोग बातें बनाते, पैसे कम मिलते,लेकिन जीवन तो सुखमय होता। भावना मुहल्ले की सबसे अच्छी और समझदार बहू कहलाती है।और रजनी उफ़ sssss मेरे साथ -साथ मेरे घर वालों और बच्चों के नाक में भी.......................
              सुजाता प्रिय समृद्धि

Tuesday, August 2, 2022

नागपंचमी (हाइकु)



 नागपंचमी (हाइकु)

    नागपंचमी
है आज चलें हम
   पूजा करने।

    नागदेवता
विराजमान देखो
    दुःख हरने

   मंदिर में जा
नागदेवता को हैं
   शीश नवाएँ

    नागदेवता
से हम सब मिल
  आशीष पाएँ

  नागदेवता
हम मानव पर
  देते हैं प्यार

    सुखी रखते
अपने आशीष से
   सारा संसार 

  हम आपको
बारंबार प्रणाम 
   कर रहे हैं

   आप हमारे
जगत के दुखड़े
    हर रहे हैं 
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

नागपंचमी (सायली छंद )

आज 
नागपंचमी है 
चलें हम सब
 नागदेव के 
पास।

नाग 
देवता हैं 
सबके दुख हरते
रखो यह 
विश्वास।

देखो 
नागदेव के 
मंदिर  में  है 
भीड़ लगी 
खूब।

पूजन 
करने आए 
हैं सब लोग 
है मची 
धूम।

दूध 
और लावे 
का सब लोग 
लगा रहे 
भोग।

भजन 
और आरती 
गा रहे मिलकर 
देखो सब 
लोग।

सभी
जन है
शीष झूका कर
आशीष हैं
लेते।

नागदेव
प्रसन्न होकर
यहाँ सबको आज 
वरदान हैं
देते।

सुखी
रहे परिवार
गाँव-गिरांव के
अब सारे
लोग।

हे
नाग देव
आप हर लिजिए
सबके सारे
रोग।
 सुजाता प्रिय समृद्धि