Friday, August 5, 2022

जीवन के रंग अनोखे

जीवन के रंग अनोखे

         जीवन के रंग अनोखे,
        कुछ हल्के,कुछ चोखे।

कभी उजाला धूम मचाए,
         कभी अंधियारा है छाये।
कभी विभिन्न रंगों में रंग कर,
               जीवन रंगीन बनाये।
 रंगीनियों के मोहजाल में,
          फँस खाये सौ-सौ धोखे।

         जीवन के रंग अनोखे 

कभी पहेली बन उलझाता,
      कभी सीधी-सी राह दिखाता।
कभी टूटते अंतर्मन में ,
          आस की बूंदें है टपकाता। 
कभी विचलित होते मन में,
             लाता उल्लास के झोंकें।

      जीवन के रंग अनोखे।

उम्मीदों के महल बना कर, 
          उसमें रहना हमें सिखाता।
विश्वास के दरवाजे पर,
            हौसले से मिलन कराता।
रंग बिरंगी कोठरियों के,
                    खोल यहांँ झरोखे।

       जीवन के रंग अनोखे।

सुजाता प्रिय समृद्धि

Thursday, August 4, 2022

बाबा बम भोले

देवों के देव महान, बाबा बम भोले।
करते हैं कल्याण, बाबा बम भोले।

मस्तक चंदन-भस्म लगाए,
खाते भंग को छान,बाबा बम भोले।

जटा में गंगा,बाल पर चंदा,
रखते विराजमान,बाबा बम भोले।

नाग की माला,बाघ की छाला,
पहनकर करते शान, बाबा बम भोले।

हाथ में त्रिशूल,डमरू शोभे,
कमण्डल में है धान,बाबा बम भोले।

सदा ही करते बैल सवारी,
इनकी है पहचान,बाबा बम भोले।

कैलाश गिरी पर रहने वाले,
फिरते सदा मशान,बाबा बम भोले।

बाबा हैं भोले भंडारी,
कर ले इनका ध्यान, बाबा बम भोले।

ब्रह्मा-विष्णु, कार्तिक-गणपति,
सब करते सम्मान, बाबा बम भोले।

शिवशंकर हैं औघड़ दानी,
देते हैं वरदान, बाबा बम भोले।
         
        सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

Wednesday, August 3, 2022

काश! मैंने कह दिया होता



काश मैंने कह दिया होता

सामने कुर्सी पर दो महिलाएंँ साथ-साथ बैठी थीं। रमेश बाबू दोनों को बारी-बारी से देख रहे थे। दोनों में कितना अंतर है । एक सुंदर, शांत, समझदार, सहनशील,शालीन, मृदुभाषी ।ना कोई नाज नखरे ना कोई शान- घमंड ।दूसरी दिखने में साधारण अशांत,उदंड,बाचाल,नासमझ, नखरेबाज और घमंडी। पहली महिला उसके दोस्त की पत्नी और दूसरी उनकी स्वयं की पत्नी। वे यादों के भंँवर में गोते लगाने लगे। जब उनकी नौकरी लगी थी, पहली महिला के परिजन उनके घर उनसे विवाह का प्रस्ताव लेकर आए थे। उनके घर वालों को लड़की तो भाई लेकिन दान-दहेज ? ना -ना -ना !हम कोई फ़क़ीर घर में बेटे की शादी नहीं करेंगे ।इतने कम में हम क्यों बेटे का विवाह करें ?कोई मेरा बेटा भागा तो नहीं जा रहा ।साइत अच्छा कहें या किस्मत खराब। अगले महीने ही दूसरा परिवार आया और मुँह- मांगी दहेज देने को तैयार हो गया। अब ढेर किस बात की ? सभी ने तुरंत हामी भर् दी।खुशखबरी रमेश बाबू के कानों तक भी पहुंची। संयोग से वे दोनों लड़कियों को जानते थे ।दोनों उनके ही कॉलेज में पढ़ती थी दोनों ही अपने-अपने गुण-दोषों के कारण चर्चित थीं। वे दोनों की तुलना करने लगे ।जमीन- आसमान का अंतर । पहली दुःख-पीड़ा में भी मुस्कुराने वाली। दूसरी घमंड से बरसने-गरजने वाली ।जी में आया -अपने परिवार को कह दें कम दहेज भी लाती है तो पहली लड़की से ही हमारा विवाह करें ।लेकिन कहे तो कैसे ? कहीं इसका कुछ दूसरा अर्थ ना निकल जाए कि साथ में पढ़ती थी .................... फिर  पैसे कम देंगे तो शादी का सारा खर्च कैसे चलेगा ? लोग सरस्वती और शक्ति से ज्यादा महत्व तो लक्ष्मी को ही देते हैं । सो रमेश बाबू के साथ भी ऐसा ही हुआ। आखिर वे उन धनाढ्य की बेटी के साथ बंध गए ।कुछ ही दिनों में पता चला पहली लड़की की शादी उसके बचपन के मित्र लखन से हुई ।दहेज कम देने के कारण प्राइवेट में काम करने वाला लड़का अजीत से उसकी शादी हो गई।
आज उनकी शादी के 25वीं वर्षगांठ है ।मोहल्ले में रहने के कारण अजीत और उसकी पत्नी  भावना भी आमंत्रण पर पधारे। उनकी पत्नी रजनी भावन को जानती थी । इसलिए दोनों साथ -साथ बैठकर बातें करने लगीं। रमेश जी भावना को देख सोच रहे थे । काश मैंने कह दिया होता ,उस दिन अपने परिवार से कि मुझे भावना ही पसंद है ।लोग बातें बनाते, पैसे कम मिलते,लेकिन जीवन तो सुखमय होता। भावना मुहल्ले की सबसे अच्छी और समझदार बहू कहलाती है।और रजनी उफ़ sssss मेरे साथ -साथ मेरे घर वालों और बच्चों के नाक में भी.......................
              सुजाता प्रिय समृद्धि

Tuesday, August 2, 2022

नागपंचमी (हाइकु)



 नागपंचमी (हाइकु)

    नागपंचमी
है आज चलें हम
   पूजा करने।

    नागदेवता
विराजमान देखो
    दुःख हरने

   मंदिर में जा
नागदेवता को हैं
   शीश नवाएँ

    नागदेवता
से हम सब मिल
  आशीष पाएँ

  नागदेवता
हम मानव पर
  देते हैं प्यार

    सुखी रखते
अपने आशीष से
   सारा संसार 

  हम आपको
बारंबार प्रणाम 
   कर रहे हैं

   आप हमारे
जगत के दुखड़े
    हर रहे हैं 
सुजाता प्रिय 'समृद्धि'

नागपंचमी (सायली छंद )

आज 
नागपंचमी है 
चलें हम सब
 नागदेव के 
पास।

नाग 
देवता हैं 
सबके दुख हरते
रखो यह 
विश्वास।

देखो 
नागदेव के 
मंदिर  में  है 
भीड़ लगी 
खूब।

पूजन 
करने आए 
हैं सब लोग 
है मची 
धूम।

दूध 
और लावे 
का सब लोग 
लगा रहे 
भोग।

भजन 
और आरती 
गा रहे मिलकर 
देखो सब 
लोग।

सभी
जन है
शीष झूका कर
आशीष हैं
लेते।

नागदेव
प्रसन्न होकर
यहाँ सबको आज 
वरदान हैं
देते।

सुखी
रहे परिवार
गाँव-गिरांव के
अब सारे
लोग।

हे
नाग देव
आप हर लिजिए
सबके सारे
रोग।
 सुजाता प्रिय समृद्धि

Saturday, July 30, 2022

दारू न पीना

कभी ग़म भुलाने को,तू दारू न पीना।
दिल को जलाकर तू घुट-घुट न जीना।
कभी ग़म भुलाने को.............
ग़म का भुलावा तो, है इक बहाना।
इसके बहाने ना तुम,गले गम लगाना।
मदिरा को अपना तू,मानो कभी ना।
कभी ग़म भुलाने को............. 
माना के वह तेरे, मन में बसी है।
कोई सुंदरी से भी,ज्यादा हसीं है।
सजनी से ज्यादा,ना होगी हसीना।
कभी ग़म भुलाने को.............
नाहक हो अपने,तू तन को जलाते।
खुद पीते हो और दूसरे को पिलाते।
इसी के लिए क्या बहाते हो पसीना।
कभी ग़म भुलाने को.............
सुनो तुम यह दारू, है जानलेवा।
नशेबाजों को यह लगती है मेवा।
हाथ लगे तो,यह लगता नगीना।
कभी ग़म भुलाने को..........
नशा करना है,मानसिक बीमारी।
इसकी चपेट में , है दुनिया सारी।
लाइलाज है ठीक होता कभी ना।
कभी गम भुलाने को...........

सुजाता प्रिय समृद्धि

Friday, July 29, 2022

दुश्मन नशा

‌          दुश्मन नशा

भैया जीवन के लिए नशा दुश्मन से बढ़कर है।
नशा करने से होता, जनों का जीवन बदतर है ।
मत खाओ तू खैनी गुटका,यह कैंसर का घर है।
असमय जनों का जान है लेता,यह ऐसा जहर है।
बीबी -बच्चों का दायित्व, भी तो तेरे ऊपर है।
भैया जीवन के लिए................
मत पीओ सिग्रेट - बीड़ी, इसके धूएँ में जहर है।
जान-बूझ क्यों पीते भैया,इसको हर पहर है।
इसके धूएँ से धुंधला, होकर जीवन बदतर है।
भैया जीवन के लिए........
मत पीओ तुम दारु-ताड़ी,आंत को यह जलाता है।
धीमा-धीमा असर दिखाता,फिर घातक बन जाता है।
इससे अच्छा तो पीना,सादा पानी सक्कर है।
भैया जीवन के लिए..............
मत खाओ तुम भांग,पान-मसाला भ्रष्ट करता दिमाग।
अफीम -चरस ना मुँह लगाना,जाग भाई जाग।
ड्रग्स का सेवन ना करना,तन को करता बंजर है।
भैया जीवन के लिए..............
सदा नशे से दूर रहो तुम, इसमें है तेरी भलाई।
नशे का पैसा भी बचेगा, जीवन होगा सुखदाई।
भैया मन में ले संकल्प,नशे का त्याग बेहतर है
भैया जीवन के लिए.............
              सुजाता प्रिय 'समृद्धि'