, आया सुन्दर भोर
उठ भाई अब
आलस्य त्याग
मिटा मन के
सारे अवसाद
आया प्यारा सुंदर भोर
सूर्य-किरण फैली चहुँ ओर
सभी जीव का मन विहसता
खुशियों से तन - मन हुलसता
उड़ी चिरैया भर मन उल्लास
चहक कर करती परिहास
खुश कर मन उदास
सुंदर
ReplyDeleteआया प्रभात और आयी भोर
ReplyDelete